हंसते रहो
1
राहों में कांटे बिछे हों, चलते रहोदिल में हो जज़्बा जला के, चलते रहो।
थक जाओ फिर भी मुस्कुराना न छोड़ो
दर्द की चादर ओढ़ के, हँसते रहो।
हर ठोकर इक सबक देती है दोस्त
गिरकर भी सपनों को सजाते रहो।
साया न हो जब ज़िन्दगी की डगर में
अपने ही हौसलों से सपने जगाते रहो।
अंधेरों से लड़ना है तो डर कैसा?
दीया बनो, औरों को सजाते रहो।
जो भी कहे "तुमसे नहीं होगा कुछ"
उनको भी कामयाबी अपनी दिखाते रहो।
संघर्ष ही जीवन का है असली रूप है
हर हाल में खुद को सँवारते रहो।
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2 पहचान
खुद की पहचान बनाने में वक्त लग जाता है
एक छोटे से बीज को भी वृक्ष बनने में वक्त लग जाता है।
मत घबरा अगर आज तेरा नाम कोई नहीं जानता
सूरज को भी निकलकर चमकने में वक्त लग जाता है।
तेरी मेहनत की गूंज एक दिन जरूर सुनाई देगी
खामोश प्रयासों को भी असर करने में वक्त लग जाता है।
आज जो खड़े हैं तेरे रास्ते में दीवार बनकर
उन्हीं को गिरने में और तुझे बढ़ने में वक्त लग जाता है।
विश्वास रख अपने कदमों और अपने इरादों पर
क्योंकि मुकाम को भी अपनाने में वक्त लग जाता है।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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3 उड़ान
अभी तेरे इरादों की उड़ान बाकी है
तेरे हौसलों की पहचान बाकी है।
मत रुक मुश्किलों के इस छोटे से दौर में
तेरे सामने पूरा आसमान बाकी है।
जो आज तुझे समझ नहीं पा रहे हैं लोग
उन्हें तेरी असली पहचान देखना बाकी है।
मेहनत को अपनी आदत बना ले ऐ दोस्त
तेरे हाथों में अभी पूरा जहान बाकी है।
तू खुद पर भरोसा रखना हर हाल में “चन्दू”
तेरी किस्मत को तुझसे मिलना अभी बाकी है।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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4 विश्वास
खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ी हार है
तेरे अंदर ही छुपी हर जीत की तलवार है।
मत रुक इन छोटी-छोटी मुश्किलों के सामने
तेरे इरादों के आगे हर तूफान बेकार है।
जो आज तुझे गिराने की कोशिश कर रहे हैं
वही कल कहेंगे तू ही असली सरदार है।
मेहनत को अपना धर्म बना ले ऐ मुसाफ़िर
यही तुझे ले जाएगी वहाँ, जहाँ सम्मान अपार है।
तेरा नाम भी चमकेगा एक दिन सितारों की तरह
बस विश्वास रख, तेरा समय भी तैयार है।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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5 सबक
जो खुद से जीत जाता है, वही असली विजेता होता है
हर गिरना उसके लिए एक नया सबक होता है।
मुश्किलें तो सिर्फ हौसलों की परीक्षा लेने आती हैं
इनसे डरने वाला ही रास्ते में रुक जाता है।
जिसके इरादों में आग और दिल में विश्वास होता है
उसके लिए हर सपना एक दिन साकार होता है।
मत देख तू वक्त की धीमी चाल को ऐ दोस्त
मेहनत करने वाला कभी लाचार नहीं होता है।
तू आज मेहनत कर, कल इतिहास तेरा होगा
क्योंकि हौसलों वाला ही दुनिया में खास होता है।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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6 मिट्टी
मिट्टी में मिलकर भी अपना वजूद बचाए रख
गिरकर भी हर बार उठने का जुनून जगाए रख।
यही मिट्टी तुझे कल आसमान बना देगी
बस अपने हौसलों की जड़ें इसमें जमाए रख।
मिट्टी कभी शिकायत नहीं करती ठोकरों की मार से
यही मिट्टी सोना बनती है अपने ही विस्तार से।
जो खुद को तपाता है धूप और अंधियारों में
वही चमकता है एक दिन चाॅंद और सितारों में ।
मत डर कि तू आज मिट्टी में दबा हुआ है
यह सच है कि तू अभी समय से छुपा हुआ है।
जब तेरी मेहनत की बारिश इस मिट्टी को भिगोएगी
तभी तेरा अस्तित्व एक वटवृक्ष सा निकलकर आयेगी।
मिट्टी सिखाती है झुकना, मिट्टी सिखाती है उठना
खामोशी में रहकर भी, अपने लक्ष्य तक बढ़ना।
जो खुद को मिट्टी से जोड़कर सफर तय करता है
वही एक दिन इतिहास में अपना नाम लिखता है।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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7 मुकाम
मिट्टी ने हर बार मुझे गिरकर संभलना सिखाया है
खामोश रहकर भी जीवन का अर्थ बताया है।
जो झुक गया वो टूटकर बिखर नहीं पाया कभी
जो जुड़ा रहा मिट्टी से, उसने ही मुकाम पाया है।
मिट्टी में दबकर भी बीज मुस्कुराया करता है
अंधेरों में रहकर भी उजाला बनाया करता है।
मत सोच कि तेरा आज धूल में मिला हुआ है
यही धूल अक्सर सितारा बनाया करता है।
मिट्टी का स्वभाव है हर रूप में ढल जाना
ठोकर मिले हजार फिर भी आगे निकल जाना।
जो खुद को मेहनत की मिट्टी में गढ़ लेता है
उसके लिए आसान हो जाता है इतिहास बदल देना।
तू मिट्टी है तो क्या हुआ, तुझमें सृजन की शक्ति है
तेरे अंदर ही छुपी हर सपने की भक्ति है।
तू आज अगर साधारण सा कण दिखाई देता है
कल तुझमें ही एक नई दुनिया बनने की शक्ति है।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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8 मजबूत इरादे
चल पड़े हो अगर, तो ठहरना मत रास्तों में
आंधियां भी झुकेंगी तुम्हारे ही हौसलों में।
जो अंधेरों से डरकर लौट जाते हैं अक्सर
नाम उनका नहीं होता कभी मंजिलों में।
खुद को इतना मजबूत बना लो ऐ मुसाफिर
हार भी आके रोए तुम्हारे ही फैसलों में।
वक्त लिखता है किस्मत उसी के पसीने से
जो यकीन रखता है अपने ही हौसलों में।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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9 तप
संघर्ष की अग्नि में जो तप जाता है
वही मनुष्य कुंदन बनकर निखर जाता है।
जो विपत्तियों से घबराकर रुक जाता है
उसका स्वप्न अधूरा ही बिखर जाता है।
विश्वास रखो अपने कर्म और साहस पर
भाग्य भी परिश्रम से ही सँवर जाता है।
चलते रहो निडर होकर अपने पथ पर
समय भी झुककर तुम्हें अमर कर जाता है।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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10 संघर्ष
अभी थका नहीं हूँ, अभी झुका नहीं हूँ
संघर्ष के पथ से मैं रुका नहीं हूँ।
अंधकार चाहे कितना भी गहरा हो
मैं आशा का दीप हूं बुझा नहीं हूँ।
मेरे धैर्य की शक्ति को मत परखो
मैं समय से पहले कहुं हारा नहीं हूँ।
मंजिल स्वयं कदम चूमेगी एक दिन
मैं प्रयासों से कभी दूर हुआ नहीं हूँ।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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