Friday, August 22, 2025

प्रेरणा गीत डॉ. चद्रपाल राजभर

प्रेरणा गीत 🌟

गिरते हुए तारे भी, उजाला छोड़ जाते हैं,
संघर्षों की राहों में, हीरे गढ़े जाते हैं।

मंज़िल नहीं कठिन है, बस हिम्मत को जगाना है
अंधकार चाहे हो कितना, दिया फिर भी जलाना है।
जो थक कर रुक न जाएँ, वही तो जगमगाते हैं
संघर्षों की राहों में, हीरे गढ़े जाते हैं।

तूफ़ान रुक ही जाए, अगर नाविक अडिग हो जाए
पर्वत भी झुकें आगे, अगर साहस खड़ा हो जाए।
विश्वास जिनके भीतर हो, वही इतिहास बनाते हैं
संघर्षों की राहों में, हीरे गढ़े जाते हैं।

आशा की किरण बनकर, बढ़ो तुम देश में आगे 
सपनों को साकार करो, उठो नव प्रयास से आगे।
जिनके कदम थकते नहीं, वही दुनिया बदलते हैं,
संघर्षों की राहों में, हीरे गढ़े जाते हैं।

गीत 
डाक्टर चन्द्रपाल रजभर

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बदल जाए अगर माली, चमन होता नहीं खाली,
मेहनत से सजे बगिया, तो हर मौसम रहे आली।

आंधी चाहे आये तो, न घबराना तुम साथी,
बीजों में है उजियारा, वही देता है गवाही।
बदल जाए अगर माली, चमन होता नहीं खाली…

पत्थर राह में कितने, कदम को रोक पाएंगे,
जो चलते दृढ़ इरादे, वो मंज़िल छू ही जाएंगे।
पसीने की ही बूँदों से, बनें सपनों की थाली,
बदल जाए अगर माली, चमन होता नहीं खाली…

अंधेरा जब भी छाएगा, उजाला संग आएगा,
हौसला अगर न टूटे तो, समय भी रंग लाएगा।
उठा लो दीप विश्वास का, रहे न रात काली,
बदल जाए अगर माली, चमन होता नहीं खाली…


Thursday, August 21, 2025

उल्टी गतिविधि - डाॅ. चन्द्रपाल राजभर

उल्टी बोली – सीधी समझ" खेल

कैसे खेलें:

1. समूह को दो टीमों में बाँट दीजिए।

2. एक टीम का सदस्य कोई सामान्य वाक्य बोलेगा, लेकिन शब्दों का क्रम उल्टा करके।

जैसे: "मैं पानी पी रहा हूँ।" → "हूँ रहा पी पानी मैं।"

3. दूसरी टीम को इसे सही वाक्य में बदलकर बताना होगा।

4. सही जवाब देने पर अंक मिलेंगे।

5. जो टीम सबसे ज़्यादा वाक्य सही बनाएगी, वही जीतेगी।

मजेदार उदाहरण:

"खा खाना सबने आज" → "आज सबने खाना खा लिया।"

"हूँ रहा नाच मैं" → "मैं नाच रहा हूँ।"

"है प्यारा कितना यह खेल" → "यह खेल कितना प्यारा है।"

 डाक्टर चन्द्रपाल राजभर.

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गतिविधि 
 "चॉकलेट चैलेंज – जो जीते वही सिकंदर"

दो टीमों का गठन किया जाएगा। प्रत्येक टीम से क्रमवार एक-एक प्रतिभागी को बुलाया जाएगा। प्रतिभागी की आंखों पर पट्टी बांधी जाएगी और उसके हाथ में एक खाली गिलास दिया जाएगा।
बेंच पर एक चॉकलेट रखी जाएगी। प्रतिभागी को निर्देश दिया जाएगा कि वह अपने हाथ से बेंच पर रखी चॉकलेट का स्थान महसूस करते हुए गिलास को सावधानीपूर्वक इस प्रकार रखे कि चॉकलेट पूरी तरह गिलास के अंदर (ढक) जाए।
यदि प्रतिभागी सफलतापूर्वक गिलास से चॉकलेट को ढक देता है, तो वह चॉकलेट उसी की होगी। उसकी सफलता पर सभी प्रतिभागी जोरदार तालियों से उसका उत्साहवर्धन करेंगे।
इसके बाद दूसरी टीम से भी एक प्रतिभागी इसी प्रकार अपनी बारी निभाएगा। दोनों टीमों के सभी प्रतिभागियों को समान अवसर दिया जाएगा। अंत में जिस टीम के सबसे अधिक प्रतिभागी सफल होंगे, उसे विजेता घोषित किया जाएगा और विजेता टीम को "जो जीते वही सिकंदर" की उपाधि प्रदान की जाएगी।
गतिविधि के उद्देश्य:
एकाग्रता एवं ध्यान का विकास।
स्पर्श के आधार पर सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाना।
आत्मविश्वास एवं साहस का विकास।
टीम भावना, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सहयोग की भावना विकसित करना।
मनोरंजन के साथ सीखने का अवसर प्रदान करना।
सावधानियाँ:
बेंच मजबूत एवं स्थिर हो।
गिलास प्लास्टिक का हो ताकि चोट का खतरा न रहे।
प्रतिभागी के पास एक संचालक मौजूद रहे ताकि आवश्यकता पड़ने पर सहायता मिल सके।
सभी प्रतिभागियों को समान समय और समान अवसर दिया जाए।
गतिविधि 
डॉ चन्द्रपाल राजभर 
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गतिविधि नवाचार
गतिविधि का नाम: चेहरा बनाओ – सही स्थान पर लगाओ
सृजनकर्ता: डॉ. चन्द्रपाल राजभर

1. परिचय
यह एक रोचक, मनोरंजक एवं शिक्षाप्रद गतिविधि है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अवलोकन क्षमता, स्मरण शक्ति, एकाग्रता, तार्किक सोच तथा टीम भावना का विकास करना है। खेल-खेल में सीखने (Learning by Doing) की अवधारणा पर आधारित यह गतिविधि विद्यार्थियों को सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित करती है।
2. शैक्षणिक उद्देश्य
विद्यार्थियों में अवलोकन एवं पहचानने की क्षमता का विकास करना।
चेहरे के अंगों (आंख, कान, नाक एवं होंठ) के सही स्थान की जानकारी देना।
एकाग्रता एवं स्मरण शक्ति का विकास करना।
निर्णय लेने एवं समय प्रबंधन की क्षमता विकसित करना।
स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, सहयोग एवं टीम भावना को बढ़ावा देना।
आत्मविश्वास एवं नेतृत्व क्षमता का विकास करना।
3. आवश्यक सामग्री
चेहरे के आकार का एक बड़ा मास्क (जिसमें केवल सिर/बाल का आकार बना हो)
मास्क पहनने के लिए रिबन या रबर
आंख, कान, नाक एवं होंठ के अलग-अलग कटआउट
मेज
डबल साइड टेप/वेल्क्रो/गोंद
स्टॉपवॉच या टाइमर
4. समय
प्रत्येक प्रतिभागी – 1 से 2 मिनट
कुल गतिविधि – 15 से 20 मिनट (प्रतिभागियों की संख्या के अनुसार)
5. गतिविधि की प्रक्रिया
सभी प्रतिभागियों को दो टीमों में विभाजित किया जाएगा।
प्रत्येक टीम अपना एक कप्तान चुनेगी।
दोनों कप्तानों को मंच पर बुलाया जाएगा।
प्रत्येक कप्तान को रिबन सहित एक मास्क पहनाया जाएगा। मास्क में केवल बाल/सिर का आकार होगा, जबकि आंख, कान, नाक एवं होंठ अलग-अलग कटआउट के रूप में मेज पर रखे होंगे।
संचालक के संकेत मिलते ही दोनों प्रतिभागी निर्धारित समय के भीतर चेहरे के सभी अंगों को उनके सही स्थान पर लगाने का प्रयास करेंगे।
जो प्रतिभागी सबसे पहले और सबसे सही ढंग से सभी अंगों को उचित स्थान पर लगा देगा, उसे विजेता घोषित किया जाएगा।
यदि कोई प्रतिभागी अंगों को सही स्थान पर नहीं लगा पाता है, तो उसे पराजित माना जाएगा।
इसी प्रकार अन्य प्रतिभागियों के साथ भी गतिविधि दोहराई जा सकती है।
6. दर्शकों की भूमिका
गतिविधि के दौरान दोनों टीमें अपने-अपने प्रतिभागी का तालियों एवं सकारात्मक नारों के माध्यम से उत्साहवर्धन करेंगी। इससे प्रतियोगिता में उत्साह, सहभागिता एवं आनंद का वातावरण बनेगा।
7. मूल्यांकन
प्रतिभागियों का मूल्यांकन निम्न आधारों पर किया जाएगा—
सही स्थान पर अंगों का चयन
कार्य पूर्ण करने में लगा समय
सटीकता
आत्मविश्वास
नेतृत्व एवं प्रस्तुति
8. प्रतिफल
चेहरे के अंगों की सही पहचान विकसित होगी।
अवलोकन एवं स्मरण शक्ति में वृद्धि होगी।
एकाग्रता एवं तार्किक सोच का विकास होगा।
टीम भावना एवं नेतृत्व क्षमता का विकास होगा।
विद्यार्थियों में आत्मविश्वास एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होगी।
खेल-खेल में सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी एवं आनंददायक बनेगी।
9. निष्कर्ष
यह गतिविधि सरल, कम लागत वाली, आकर्षक एवं नवाचारी है। इसे विद्यालयों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, बाल मेलों तथा शैक्षिक कार्यशालाओं में आसानी से कराया जा सकता है। यह विद्यार्थियों को मनोरंजन के साथ-साथ अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) का अवसर प्रदान करती है तथा सीखने को अधिक प्रभावी और स्थायी बनाती है।
सृजनकर्ता:
डॉ. चन्द्रपाल राजभर
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गतिविधि नवाचार
शीर्षक-मार्कर कैप चैलेंज (Marker Cap Challenge)
सृजनकर्ता: डॉ. चन्द्रपाल राजभर

उपयोगी सामग्री
- आंखों पर बांधने के लिए पट्टी – 2
- मार्कर पेन – 1
- मार्कर पेन की टोपी – 1

उद्देश्य
1. विद्यार्थियों में एकाग्रता एवं समन्वय (Coordination) का विकास करना।
2. आपसी सहयोग एवं टीम भावना को बढ़ावा देना।
3. नेतृत्व क्षमता एवं आत्मविश्वास का विकास करना।
4. निर्देशों का पालन करने तथा निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना।
5. मनोरंजन के माध्यम से अनुभवात्मक अधिगम (Learning by Doing) को प्रोत्साहित करना।

गतिविधि का समय
प्रत्येक टीम – लगभग 2 मिनट
कुल गतिविधि – 15–20 मिनट (प्रतिभागियों की संख्या के अनुसार)

गतिविधि की प्रक्रिया
1. सबसे पहले सभी प्रतिभागियों को दो समान टीमों में विभाजित किया जाएगा।
2. प्रत्येक टीम अपना एक कप्तान चुनेगी।
3. प्रत्येक टीम से कप्तान तथा उसका एक सहयोगी मंच पर बुलाया जाएगा।
4. कप्तान के हाथ में एक बिना टोपी वाला मार्कर पेन दिया जाएगा तथा सहयोगी के हाथ में उसी मार्कर की टोपी दी जाएगी।
5. दोनों प्रतिभागियों की आंखों पर पट्टी बांध दी जाएगी ताकि वे कुछ भी देख न सकें।
6. दोनों प्रतिभागियों को लगभग 2 फीट की दूरी पर आमने-सामने खड़ा किया जाएगा।
7. संचालक के संकेत मिलते ही दोनों प्रतिभागी धीरे-धीरे एक-दूसरे की ओर बढ़ेंगे और बिना आंखों से देखे केवल आपसी समन्वय एवं अनुमान के आधार पर मार्कर की टोपी को मार्कर पेन पर लगाने का प्रयास करेंगे।
8. जो टीम निर्धारित समय के भीतर सबसे पहले एवं सही ढंग से मार्कर की टोपी लगा देगी, उसे विजेता घोषित किया जाएगा।
9. यदि कोई टीम निर्धारित समय में टोपी नहीं लगा पाती है, तो उसे पराजित माना जाएगा।

दर्शकों की भूमिका
गतिविधि के दौरान दोनों टीमों के दर्शक तालियों एवं सकारात्मक उत्साहवर्धन के माध्यम से अपनी-अपनी टीम का मनोबल बढ़ाएंगे। इससे प्रतिभागियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा तथा गतिविधि अधिक रोचक एवं प्रेरणादायक बनेगी।

गतिविधि का प्रतिफल
- एकाग्रता एवं ध्यान में वृद्धि होती है।
- हाथों के समन्वय तथा सूक्ष्म मोटर कौशल (Fine Motor Skills) का विकास होता है।
- नेतृत्व एवं सहयोग की भावना विकसित होती है।
- आत्मविश्वास, धैर्य एवं समस्या समाधान की क्षमता में वृद्धि होती है।
- स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एवं खेल भावना का विकास होता है।
- खेल-खेल में सीखने का वातावरण तैयार होता है तथा विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता बढ़ती है।

निष्कर्ष
यह गतिविधि कम लागत, सरल एवं अत्यंत प्रभावी शैक्षणिक नवाचार है। इसे विद्यालयों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं एवं बाल मेलों में सहजता से आयोजित किया जा सकता है। यह विद्यार्थियों में सहयोग, एकाग्रता, समन्वय, नेतृत्व तथा आत्मविश्वास जैसे जीवनोपयोगी कौशलों का विकास करते हुए सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक एवं प्रभावी बनाती है।

सृजनकर्ता
डॉ. चन्द्रपाल राजभर
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गतिविधि का नाम : - हँसी रोककर बोलो
सृजन : डॉ. चन्द्रपाल राजभर
उद्देश्य :
प्रतिभागियों के उच्चारण, स्पष्ट वाणी, आत्मविश्वास तथा भाषा कौशल का विकास करते हुए मनोरंजन के माध्यम से सीखने का अवसर प्रदान करना।
आवश्यक सामग्री :
2 चम्मच
2 छोटी गेंदें या 2 नींबू
शैक्षिक शब्दों की सूची
प्रतिभागी :
दो टीमों के एक-एक कप्तान
गतिविधि की विधि :
दोनों टीमों से एक-एक कप्तान को मंच पर बुलाया जाएगा।
प्रत्येक कप्तान अपने मुँह में एक चम्मच पकड़कर उस पर एक छोटी गेंद या नींबू संतुलित रखेगा।
संचालक क्रमशः पाँच शैक्षिक शब्द बोलेगा, जैसे— संविधान, पर्यावरण, गणित, विद्यालय, विज्ञान।
दोनों कप्तानों को चम्मच और गेंद/नींबू गिराए बिना प्रत्येक शब्द का स्पष्ट एवं सही उच्चारण करना होगा।
यदि गेंद/नींबू गिर जाता है, तो प्रतिभागी दोबारा संतुलन बनाकर अगले शब्द का उच्चारण करेगा।
निर्णय का आधार :
शब्दों का स्पष्ट और शुद्ध उच्चारण
चम्मच एवं गेंद/नींबू का संतुलन बनाए रखना
सभी शब्दों को सही ढंग से पूरा करना
विजेता :
जो प्रतिभागी सबसे अधिक शब्दों का स्पष्ट उच्चारण करते हुए संतुलन बनाए रखेगा, उसे विजेता घोषित किया जाएगा।
विशेष आकर्षण :
प्रतिभागियों की मज़ेदार बोलने की शैली और संतुलन बनाए रखने के प्रयास से दर्शक खूब हँसेंगे, वहीं खेल-खेल में उच्चारण एवं भाषा कौशल का भी प्रभावी अभ्यास होगा।
सृजन कर्ता 
डॉ चन्द्रपाल राजभर 
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गतिविधि का शीर्षक:
"स्पर्श से पहचान – सीख की उड़ान"
गतिविधि का विवरण:
दो टीमों के एक-एक कप्तान को मंच पर बुलाया जाएगा। दोनों की आँखों पर पट्टी बाँध दी जाएगी। एक कप्तान को किसी विशेष शारीरिक मुद्रा (जैसे हाथ ऊपर, एक पैर आगे, दोनों हाथ फैलाकर आदि) में खड़ा कर दिया जाएगा। दूसरा कप्तान स्पर्श (टच) के माध्यम से उस मुद्रा को पहचानने का प्रयास करेगा। पहचानने के बाद वह स्वयं भी उसी मुद्रा में खड़ा होगा। यदि वह सही मुद्रा बना लेता है, तो सभी प्रतिभागी तालियाँ बजाकर उसका उत्साहवर्धन करेंगे।
शैक्षिक उद्देश्य
स्पर्श आधारित अवलोकन एवं संवेदनशीलता का विकास करना।
एकाग्रता, स्मरण शक्ति एवं कल्पनाशक्ति का विकास करना।
आत्मविश्वास, साहस एवं सहभागिता की भावना बढ़ाना।
टीम भावना एवं सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना।
अधिगम प्रतिफल (Learning Outcomes)
प्रतिभागी स्पर्श के आधार पर आकृति/मुद्रा की सही पहचान कर सकेंगे।
प्रतिभागियों में सूक्ष्म अवलोकन एवं त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित होगी।
सहयोग, संचार एवं आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।
खेल-खेल में सीखने के प्रति रुचि विकसित होगी।
समय
8–10 मिनट
शैक्षिक महत्व
अनुभवात्मक (Experiential) एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण को बढ़ावा देता है।
प्रतिभागियों की इंद्रिय-आधारित अधिगम क्षमता को विकसित करता है।
प्रशिक्षण को रोचक, आनंददायक एवं यादगार बनाता है।
हँसी, उत्साह और सहभागिता के माध्यम से सीखने का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

सृजन- डॉक्टर चन्द्रपाल‌ राजभर 

Sunday, August 10, 2025

पर्यावरण पर लेख एवं संक्षिप्त परिचय

🎤 तपती धरती पर संवेदना की हरियाली: डाॅ.चन्द्रपाल राजभर का पर्यावरणीय योगदान
नाम - डॉ.चन्द्रपाल राजभर 
पिता/पति का नाम-: राम अनुज राजभर 
जन्म स्थल-: ग्राम सजमपुर जनपद सुल्तानपुर
जन्मतिथि -:06/07/1990 
राष्ट्रीयता-:भारतीय 
पता 
स्थाई पता -:ग्राम सजमपुर पोस्ट हरपुर थाना अखण्डनगर तहसील कादीपुर जनपद सुलतानपुर उत्तर प्रदेश पिन कोड 22 8172
वर्तमान पता-: प्राथमिक विद्यालय रानीपुर कायस्थ कादीपुर जनपद सुलतानपुर उत्तर प्रदेश पिन कोड 228145 
ई-मेल-:chandrapal6790@gmail.com
मोबाइल नम्बर-:9721764379,7984612205
शिक्षा-: बीटीसी,एम.ए.(चित्रकला)मास्टर आॅफ योगा,मास्टर आॅफ जर्नलिज्म(MJ) डॉक्ट्रेट उपाधि (ड्राइंग पेंटिंग)
पद-
चित्रकारिता /बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक विद्यालय रानीपुर कायस्थ ब्लॉक-कादीपुर में सहायक अध्यापक
कार्यक्षेत्र /विधा-: कला एवं शिक्षा
वर्तमान पद पर सेवा -
राष्ट्रीय अध्यक्ष (कला एंव शिक्षक विंग) क्राइम इन्फार्मेशन ब्यूरो इण्डिया, 
जिला आईटी सेल प्रभारी आॅल टीचर/इम्पलाईज बेलफेयर ऐसोशिऐशन उत्तर प्रदेश
जिलाध्यक्ष क्राइम इन्फार्मेशन ब्यूरो इण्डिया
जिला मीडिया प्रभारी उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ सुल्तानपुर 
लेखक गीतकार- (SWA) स्क्रीन राइटर एसोसिएशन अंधेरी मुंबई
संपादक(पूर्व)नयी दिशा पत्रिका
लेखक- प्रकृति चित्रण पुस्तक आईजी/इण्टरमीडिएट), ग़ज़ल अभिलाषा दर्द-ए-बेवफाई खण्ड-१, ग़ज़ल अभिलाषा दर्द-ए-तन्हाई खण्ड-2, अभिलाषा मोटिवेशनल ग़ज़ल खण्ड-3
सहायक अध्यापक वेसिक शिक्षा विभाग सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश
कवि,लेखक,चित्रकार,पत्रकार, मूर्तिकार ,संगीतकार, सिंगर,शिक्षक,सोसल ऐक्टविष्ट, 
वैज्ञानिकवादी सामाजिक कला चिन्तक
 1. परिचय: जब तपिश ने चेतना जगाई
बढ़ती गर्मी, तेज़ धूप और पर्यावरणीय असंतुलन ने जब मन को विचलित किया, तब मेरे भीतर एक भाव जगा कि अगर आज भी प्रकृति के लिए कुछ नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल ताप, प्रदूषण और सूखे भविष्य की विरासत पाएंगी। मैं डाॅ.चन्द्रपाल राजभर, एक चित्रकार, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता, वर्षों से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहा हूं। मेरा मानना है कि प्रकृति केवल चित्रों में रंगों का विषय नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। प्रकृति के प्रति मेरा प्रेम केवल कैनवास तक सीमित नहीं रहा, वह पौधों, वृक्षों और हरियाली में भी प्रकट होता है।



 2. वृक्षारोपण की प्रेरणा: तपती धूप से उपजा संकल्प
वृक्षारोपण की प्रेरणा मुझे मार्च की उस दोपहर से मिली जब विद्यालय परिसर में खड़ा होकर मैंने सूरज की तीखी किरणों को सीधे महसूस किया। उस समय मन में एक विचार कौंधा—"अगर आज छांव नहीं बनाई गई, तो कल कोई छांव मिलेगी ही नहीं।" उसी क्षण मैंने ठान लिया कि पर्यावरण को बचाने का सबसे सरल, सस्ता और प्रभावी तरीका यही है कि अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएं। मैंने ढिटर का एक पौधा लगाया, जो आज एक सुंदर, घना वृक्ष बन चुका है और विद्यालय में आने वाले बच्चों को छांव देता है।

 3. अब तक कुल लगाए गए पौधों की संख्या
वर्ष 2007 से लेकर अब तक, मैंने अपने विद्यालय, घर, गाँव और विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर लगभग 1200 से अधिक पौधे लगाए हैं। यह कार्य मेरे लिए कोई कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन का एक जरूरी हिस्सा बन गया है। इन पौधों को लगाना मेरे लिए किसी सामाजिक सेवा से कम नहीं। हर पौधा मेरे लिए एक जीवन के अंकुर के समान है, जो भविष्य को सांसें देगा।

 4. वृक्ष बन चुके पौधों की संख्या
इन लगाए गए पौधों में से अब तक लगभग 402 पौधे पूर्ण रूप से वृक्ष बन चुके हैं। कुछ विद्यालय के बच्चों की देखरेख में, कुछ ग्रामीणों द्वारा संरक्षित किए गए, और कुछ स्वयं मेरी देखरेख में बड़े हुए हैं। ढिटर, नीम, पीपल, आम,अमरूद, सहजन, अर्जुन और आम जैसे पेड़ आज अपनी शाखाओं में न केवल छांव देते हैं, बल्कि पर्यावरण को शुद्ध भी करते हैं। इन वृक्षों ने यह प्रमाणित किया है कि एक व्यक्ति की पहल समाज को बदल सकती है।

5. पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता का कार्य
सिर्फ पेड़ लगाना काफी नहीं होता, लोगों को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार करना ज़रूरी होता है। मैंने बच्चों को प्रकृति की महत्ता समझाने के लिए विशेष कक्षाएं चलाईं। दीवारों पर प्रेरक पर्यावरणीय चित्र बनवाए, स्कूल के हर कार्यक्रम में एक पौधा लगाने की परंपरा शुरू की। साथ ही सामाजिक मंचों, कार्यशालाओं और लेखों के माध्यम से आम जनता को जागरूक करता रहा हूं कि "विकास केवल इमारतें नहीं, हरियाली भी है।" मेरे गीतों, कविताओं और चित्रों में भी पर्यावरणीय संदेश समाहित रहता है।

6. पर्यावरण संरक्षण हेतु सम्मान एवं पहचान
मेरे द्वारा किए गए कार्यों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिली है। मुझे पर्यावरण प्रहरी सम्मान 2020,पर्यावरण प्रहरी सम्मान-2021,अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण योद्धा सम्मान 2022,अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण योद्धा सम्मान- 2023,अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण वॉरियर सम्मान 2024,राष्ट्रीय पर्यावरण एवं बालिका शिक्षा पुरस्कार-2025,इंटरनेशनल एनवायरनमेंट वॉरियर अवार्ड 2025 आदि लगभग 30 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं, जो इस बात के प्रमाण हैं कि अगर कार्य सच्चे मन से किया जाए, तो समाज उसे सराहता भी है।

इन सम्मानों से मुझे व्यक्तिगत संतोष तो मिलता ही है, साथ ही यह जिम्मेदारी भी महसूस होती है कि मैं और अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ूं, ताकि हर गली, हर आंगन, हर विद्यालय एक हरित दिशा में कदम बढ़ा सके।

 "पेड़ लगाइए, पीढ़ियाँ बचाइए"—यही मेरा संदेश है।
— आर्टिस्ट चंद्रपाल राजभर