चाहे खुद को मिटाना पड़े
पर तुम सफलता पाना जरूर
चाहे कुछ भी करना पड़े
दुनिया........
चाहे.........
सफलता मिलेगी, चलो सोलों पर
डरने से कुछ भी,न होता यहां पर
उम्मीदों की लव को, जलाकर चलों तुम।।2।।
मंजिल तुम्हारी होगी यहां पर
दुनिया........
चाहे.........
मेहनत की मिट्टी में, सपनों को बोना
आंखों में सपने,सजाकर न होना
जली है मसालें ,जलाए ही रखना
उम्मीदों को अपने, कभी न खोना
दुनिया.......
चाहे.......
अम्बर भी झुकेगा, इरादों से तेरे
लिख दे नई कहानी, वो प्यारे।
विश्वास का दीपक, जलाकर चलो तुम
जीत ही लिखी होगी, मुकद्दर की तेरे ।।
दुनिया.......
चाहे.......
गीत
डॉ.चन्द्रपाल राजभर
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2
चलते रहो, रुकना नहीं, मंज़िल पुकारती Sssl
मेहनत की हर बूँदों से, तक़दीर सँवारती।
गिरकर भी मुस्कान भरो, हिम्मत न हारो तुम
कल का सूरज अपना होगा, सपना सँवारो तुम ।
राहों में काँटे होंगे, फूल खिल जाएँगे
सच्चे इरादों वाले, मंज़िल पा जायेंगे ।
आँधी से जो टकराए, वह बीर कहलाये
मेहनत करने वालों का, सपना मुस्काये।।
पत्थर भी पिघलते हैं, विश्वास की गर्मी से
किस्मत भी बदलती है, कर्मों की सच्चाई से।
आज अगर अँधेरा है, कल उजियारा आएगा
तेरे संघर्षों का किस्सा, दुनिया सुनाएगा।
चलते रहो, रुकना नहीं, मंज़िल पुराती
मेहनत की इस धरती पर,है हार जीतती
विश्वास की लौ जलाकर, आगे कदम बढ़ाना,एक दिन दुनिया बोलेगी—यही है सच्चा दीवाना।
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3
चल, खुद अपनी राह बना
कदमों से इतिहास बना।
ठोकर को न हार समझ
उससे ही विश्वास बना।।
चल खुद......
कदमों से.......
सूरज बनकर रोज़ निकलना
तम को हर पल दूर ss करना।
अपने दम पर मंज़िल पाना
किस्मत का दस्तूर बदलना।।
पर्वत भी झुक जाएगा ।।2।।
संकल्प अगर टिक जायेगा।
चल खुद......
कदमों से....
जब जलता दीपक मेहनत का
अँधियारा ढ़लss जाता है।
जिसने खुद को जीत लिया
दुनिया वो ही बदलता है।।
अपने कर्मों की ताकत से ll2ll
भाग्य नया लिखा जाता है।
चल खुद......
कदमों से....
नदियों सा बहते रहना तुम
रुकना तेरा काम ss नहीं।
गिरकर फिर उठ जाना तुम
वीरों की पहचान यही।।
तेरी मेहनत तेरा धन ।।2।।
तेरा साहस तेरा मन।
चल खुद......
कदमों से.......
गीत
डॉ.चन्द्रपाल राजभर (आर्टिस्ट)
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4
वक़्त पुकार रहा है तुमको
अब तो आगे बढ़ना है।
अपने दम पर लिखना
जीवन का हर सपना है।।
कल की बातें छोड़ मुसाफ़िर
आज नया आगाज़ करो
मेहनत की तू मशाल जलाकर
हर मुश्किल पर राज करो
वक्त......
अब......
अपने.....
जीवन......
बीज अगर मिट्टी में सोता
तब बनता है वृक्ष कोई।
तपकर ही सोना निखरता
प्रकृति का दस्तूर यही ।
धूप मिले तो हँसते जाना
छाँव मिले आराम नहीं।
जब तक मंज़िल पास न आए
तब तक कोई विराम नहीं।।
वक्त......
अब......
अपने.....
जीवन......
छोटे-छोटे रोज़ कदम ही
बनते ऊँची उड़ानों में।
बूँद-बूँद से सागर भरता
यही लिखा है गानों में।।
आज पसीना जो बहाता
कल ये सम्मान दिलाएगा।
तेरी सच्ची कर्म कहानी
युग-युग तक गाया जायेगा।।
वक्त......
अब......
अपने.....
जीवन......
गीत
डॉ.चन्द्रपाल राजभर (आर्टिस्ट)
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5
निराशा कुहासे हटाकर चलो तुम
कठिन राह पर आगे बढ़ो तुम
जो रोके जंजीरें जमाने की
उन्हें आत्मबल से मिटाते रहो तुम
मिले शूल पथ पर, तो विचलित न होना
धैर्य का दामन कभी न तुम खोना ।
साहस के तरकश में विश्वास को रखकर
चुनौतियों ss में बीर बनकर तुम रहना
पराजय कभी मन में अपने न लाना
निराशा को दामन में आने देना
विपत्ति तो आती जाती रहेगी
पुरुषार्थ ही तो मुसीबत टलेगी
तपस्या में तपकर निखरता है कुंदन
सीप में ही तो मोती सदा होते सुंदर ।
कठिन अति डगर है ,मगर श्रेष्ठ तुम हो
यही शूरवीर तो होता है समन्दर।
गीत
डॉ.चन्द्रपाल राजभर (आर्टिस्ट)
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