नज़र से नज़र मिली और कुछ हो गया,
दिल में छुपा दर्द फिर से जगा हो गया।
वो वादे, वो कसमें, सब झूठे लगे,
मोहब्बत के किस्से अधूरे लगे।
जो सोचा था साथी वही बेवफ़ा,
मेरी ज़िंदगी का सफ़र बदल गया।
नज़र से नज़र मिली और कुछ हो गया,
दिल में छुपा दर्द फिर से जगा हो गया।
तेरे बाद दुनिया सुनी-सुनी लगे,
हर राह में जैसे तू खो सा गये।
जुदाई ने छोड़ा है ज़ख्मों का निशां,
मेरा हंसता जहाँ अब तन्हा हो गया।
नज़र से नज़र मिली और कुछ हो गया,
दिल में छुपा दर्द फिर से जगा हो गया।
तेरी याद हर रात जगाती रही,
ख़ामोशी भी मुझसे सवालात करे।
मोहब्बत के बदले मिली बेवफ़ाई,
मेरे सपनों का घर अब ढह-सा गया।
नज़र से नज़र मिली और कुछ हो गया,
दिल में छुपा दर्द फिर से जगा हो गया।
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2
नज़र से नज़र मिली, कुछ कुछ होने लगा,
दिल के उजड़े सफ़र में दर्द बोने लगा।
वो मुस्कुराए तो लगा जैसे चाँद खिल गया,
ज़ख़्म पुराने थे मगर फिर हरा हो गया।
क़दम थम गए वहीं, सब कुछ खोने लगा,
नज़र से नज़र मिली, कुछ कुछ होने लगा।
वो जो क़रीब थे, पर किसी और के हो गए,
सपनों के घर मेरे, आँधियों में खो गए।
साँसों में उनके नाम का ज़हर घुलने लगा,
दिल के उजड़े सफ़र में दर्द बोने लगा।
रातें उदास हैं, नींद अब आती नहीं,
यादों की आग है, आँख बुझ पाती नहीं।
हसीन पल बेवफ़ाई में कहीं खोने लगा,
नज़र से नज़र मिली, कुछ कुछ होने लगा
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3
टूटे सपनों की चुभन में जी रहा हूँ मैं,
तेरे बिन हर रोज़ ज़हर पी रहा हूँ मैं।
दिल की हर धड़कन तेरा नाम लेती है,
राहों में तन्हाई ज़हर घोल देती है।
छोड़ के मुझको तू कहाँ जा रही है,
क्यों झूंठी मोहब्बत का ग़म दे रही है।
टूटे सपनों की चुभन में जी रहा हूँ मैं,
तेरे बिन हर रोज़ ज़हर पी रहा हूँ मैं।
तेरी जुदाई ने जलाया है दिल को,
आँखों ने रो-रो के भुलाया है ग़म को।
फिर भी तेरा नाम लब पर है आता,
ज़ख़्मों को छुप-छुप के दिल सहलाता।
टूटे सपनों की चुभन में जी रहा हूँ मैं,
तेरे बिन हर रोज़ ज़हर पी रहा हूँ मैं।
गीत
डॉक्टर चन्द्रपाल राजभर
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4
तेरी यादों ने दिल को रुला दिया,
सारे सपनों का शहर जला दिया।
जो कसम खाई थी साथ निभाने की,
उस कसम को भी तूने भुला दिया।
तेरी यादों ने दिल को रुला दिया,
सारे सपनों का शहर जला दिया।
चाँदनी रात में तन्हा खड़ा हूँ मैं,
तेरे बिन आज भी अधूरा पड़ा हूँ मैं।
राह देखता रहा हर घड़ी तेरा,
पर नसीबों से हारकर लड़ा हूँ मैं।
तेरी यादों ने दिल को रुला दिया,
सारे सपनों का शहर जला दिया।
पल-पल तेरी कमी सताती है,
खामोशी में भी आवाज़ आती है।
दिल कहता है तू लौट आए कभी,
पर किस्मत हमें दूरियां दिलाती
तेरी यादों ने दिल को रुला दिया,
सारे सपनों का शहर जला दिया।
रचना
डॉक्टर चन्द्रपाल राजभर
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5
बेवफाई का दर्द कैसे सही कोई
दिल के ज़ख्म को कैसे छुपाए कोई,
टूटी हुई सांसों को कैसे जुड़वाएं कोई।
बेवफाई का दर्द कैसे सहे कोई,
आंसुओं को बहाकर कैसे जिए कोई।
वो जो कसम खा के गए थे साथ निभाने को ,
छोड़ गए राह में, किसको बताने को।
दिल में अंधेरों का साया लिए कोई,
बेवफाई का दर्द कैसे सहे कोई।
सपनों की चादर जली राख बन गई,
यादों की खुशबू भी आह बन गई।
टूटी उम्मीदों में रोता रहा कोई,
बेवफाई का दर्द कैसे सहे कोई।
गीत
डाॅ चन्द्रपाल राजभर
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,6
दिल की किताब में तूने, नया ज़ख़्म लिख दिया,
मेरे अरमानों को जैसे, सरेआम जला दिया।
सपनों की दुनिया टूटकर, खामोश हो गई,
तेरे बिना ज़िंदगी ,अधूरी-सी हो गई।
राहों में तेरे कदमों के, निशाँ ढूँढता रहा,
आँसुओं के दरिया में ,मैं ही डूबता रहा।
वक़्त के हाथों से मेरी, खुशियाँ छिन गईं,
तेरी बेवफाई से मेरी, साँसें सिमट गईं।
चाँदनी रातें अब, अंधेरों में बदल गईं,
धड़कनों की ताल भी,सिसकियों में ढल गईं।
तू गया छोड़कर मगर यादें नहीं गईं,
तेरे बिना ये आँखें कभी सूखी नहीं रहीं।
दिल की किताब में तूने, नया ज़ख़्म लिख दिया,
मेरे अरमानों को जैसे, सरेआम जला दिया।
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7
जिसे अपना समझा, वही गैर निकला,
वफ़ाओं के बदले ,वो ख़ंजर निकला।
तेरी कसमों पे जो ,दिल ने भरोसा किया,
वो रिश्ता भी झूठा, और जुदा निकला।
जिसे अपना समझा, वही गैर निकला,
मेरे आँसुओं से भी ,तुझे प्यार न हुआ,
तेरी मुस्कानों में मेरा ,इकरार न हुआ।
दिल को बेचैन किया, यादों ने सताया,
तेरे जाने के बाद जीना,मेरा जीना न हुआ।
जिसे अपना समझा, वही गैर निकला,
जो कहता था हर पल "सिर्फ़ मेरा रहेगा",
वो किसी और की बाहों में,सुकून खोजेगा।
चले आओ कभी देखो मेरी तन्हाई,
तेरे बिना ये ज़िंदगी , बेअसर रहेगी।
जिसे अपना समझा, वही गैर निकला,
वफ़ाओं के बदले ,वो ख़ंजर निकला।
गीत
डाॅ.चन्द्रपाल राजभर
8
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बेवफ़ाई करके वो, मुस्कुरा रहे हैं,
घमण्ड को अपने ,दिखा रहे हैं।
नादान इतना भी, नहीं समझते,
प्यार करके वो, छुपा रहे हैं।
दिल को तोड़ कर ,चैन पा लिये हैं,
आंसुओं से चेहरा को ,छुपा लिये हैं।
हम तड़पते रहे ,उनकी यादों में,
वो बेगानों से रिस्ता, बना लिया हैं।
वो जुदाई को ,जीत मान बैठे हैं
मेरी चाहत को, रीत मान बैठे हैं।
वो अंधेरों में रोशनी, ढूंढते तो हैं,
मगर खुद को , हार मान बैठे हैं।
हर सितम का बोझ, हम उठा रहे हैं,
टूट कर भी हंसी, दिखा रहे हैं।
सच है कि जालिम बड़े बेख़बर हैं,
प्यार की आग को, जो हवा दे रहे हैं।
गीत
डाॅ. चन्द्रपाल राजभर
आर्टिस्ट
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9
चन्द्रपाल राजभर हैं रंगों के कलाकार,
कैनवास पर बुनते सपनों के संसार।
हर चित्र में दिखाते सच्चे व्यवहार,
भारत का गौरव, युगों के आधार।।
चन्द्रपाल राजभर हैं रंगों के कलाकार,
कभी पेड़ों में हरियाली की गूँज है,
कभी वेदना में जीवन की खोज है।
तूलिका से भरते हैं कृतियों में प्यार,
संदेश बन जाते हैं ऐसे चित्रकार।।
चन्द्रपाल राजभर हैं रंगों के कलाकार,
शब्दों में कविता, सुरों में गीत है,
चित्रों में विज्ञान, विचारों की रीत है।
जन-जन में जगाते उजियारा अपार,
डॉ. राजभर हैं सच्चे संस्कार।।
चन्द्रपाल राजभर हैं रंगों के कलाकार,
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10
ग़मों के बादलों में भी, उजाले फिर खिलेंगे,
चले जो हौसले लेकर, वो मंज़िलें फिर मिलेंगे।
ठहर न जा तू राह में, ये मोड़ भी गुजर जाएंगे,
जो जले हैं दीप दिल के, वो शहर भी निखर जाएंगे।
मिटा के ज़ख्म सीने के, नए सपने सिलेंगे,
ग़मों के बादलों में भी, उजाले फिर भी खिलेंगे।
अंतरा 2:
हवाओं ने अगर छीना, तो फूल फिर से खिलेंगे,
कदम जो डगमगाए हैं, वो राह फिर सँभलेंगे।
हर इक अंधेरी रात में, सितारे झिलमिलेंगे,
चले जो हौसले लेकर, वो मंज़िलें भी मिलेंगे।
अंतरा 3:
जहां हो दर्द, वहां भी कुछ रौशनी उतरती है,
उम्मीद की किरन हर बार, नई कहानी करती है।
जो हार मान जाए वो, कहानी से मिटेंगे,
ग़मों के बादलों में भी, उजाले फिर भी खिलेंगे।
अंतिम पंक्तियाँ:
बदलेंगे हालात जब, तू हौसला दिखाएगा,
तूफ़ान भी रुकेंगे जब, तू दीप जलाएगा।
समय के साथ सागर में, किनारे भी मिलेंगे,
चले जो हौसले लेकर, वो मंज़िलें भी मिलेंगे।
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"तेरे जाने के बाद"
तेरे जाने के बाद, दिल ये संभलता नहीं,
तेरी यादों का ज़हर अब निकलता नहीं।
हर तरफ तू ही तू है, मगर तू नहीं,
तेरे जाने के बाद दिल बहलता नहीं।
हमने चाहा तुझे, जैसे खुदा कोई,
पर तू निकला वही, जिसपे भरोसा न कोई।
मेरे अश्कों से तेरी राह सजती रही,
पर तुझे फर्क क्या, दर्द में भी दुआ दी कोई।
तेरी तस्वीर से बातें मैं करता रहा,
हर धड़कन में तेरा नाम भरता रहा।
तू हँसी बाँट के ग़म दे गई ज़िंदगी में,
मैं तो टूटी हुई साँसें गिनता रहा।
तेरे बिना अब कोई रौशनी लगती नहीं,
हर खुशी भी मुझे अब खुशी लगती नहीं।
दिल ने माँगा था बस तेरा साथ ज़रा सा
पर तू ठुकरा गई, वजह लगती नहीं।
तेरे जाने के बाद, दिल ये संभलता नहीं,
तेरी यादों का ज़हर अब निकलता नहीं।
हर तरफ तू ही तू है, मगर तू नहीं,
तेरे जाने के बाद दिल बहलता नहीं।