1 परिश्रम
परिश्रम की बूंदों से जो पथ सींचता है
वही मनुष्य सफलता का फल खींचता है।
कठिनाइयाँ रोक नहीं सकतीं उसके कदम
जो साहस से हर बाधा को लांघता है।
विश्वास जिसकी सांसों में बस जाता है
वही शिखर पर अपना ध्वज फहराता है।
रुकना नहीं, झुकना नहीं, यही है संकल्प
इसी से व्यक्ति इतिहास नया रच जाता है।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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2 अटल
संकल्प यदि अटल हो, तो राह बन ही जाती है
अंधकार की चादर भी एक दिन हट ही जाती है।
जो पुरुषार्थ को अपना धर्म बना लेता है
उसके चरणों में सफलता झुक ही जाती है।
मत रुकना बाधाओं के क्षणिक आघातों से
धैर्य की धारा पत्थर को भी काट ही जाती है।
जो स्वयं पर विश्वास बनाए रखता है सदा
उसकी पहचान समय में अंकित हो ही जाती है।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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3 अमर
निश्चय जिनका अडिग होता है, वे हार नहीं मानते
तूफानों के सामने भी अपने कदम नहीं डिगाते।
विपत्तियाँ केवल साहस की परीक्षा लेती हैं
कायर ही उनसे डरकर अपने स्वप्नों को त्यागते।
जो परिश्रम को ही अपना भाग्य बना लेते हैं
वे ही समय के शिलालेखों पर नाम लिखाते।
चलते रहो सत्य और कर्म के उज्ज्वल पथ पर
ऐसे ही पुरुष इतिहास में अमर हो जाते।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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4 दीप
दीप बनो तो ऐसा बनो जो अंधकार हर ले
स्वप्न बनो तो ऐसा बनो जो जीवन स्वर दे।
राह कठिन हो, फिर भी कदम डगमगाने न देना
संकल्प ऐसा रखो जो पर्वत भी झुका दे।
परिश्रम की साधना व्यर्थ कभी जाती नहीं
यह वही शक्ति है जो भाग्य को नया आकार दे।
विश्वास यदि अटल है अपने पुरुषार्थ पर
समय भी एक दिन तुम्हें सर्वोच्च स्थान दे।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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5 प्रगति
तूफानों में भी जो दीपक बनकर जलते रहे
वही लोग अंधेरों से आगे निकलते रहे।
जिन्होंने विश्वास को अपनी शक्ति बना लिया
वे हर कठिनाई से निर्भीक होकर चलते रहे।
राह में कांटे आए, फिर भी नहीं रुके कदम
अपने लक्ष्य के लिए हर पीड़ा सहते रहे।
समय ने भी झुककर उनका सम्मान किया
जो पुरुषार्थ के पथ पर निरंतर बढ़ते रहे।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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6 स्वरूप
संघर्ष की अग्नि में तपकर जो मजबूत बने
वही जीवन के पथ पर सबसे अद्भुत बने।
जिसने विश्वास को अपने हृदय में स्थान दिया
उसके हर प्रयास समय का अमिट स्वरूप बने।
कठिनाइयों से जिसने कभी समझौता नहीं किया
उसके साहस के किस्से जग में अनूप बने।
चलते रहो निरंतर अपने पुरुषार्थ के साथ
तुम भी एक दिन प्रेरणा का ध्रुव स्वरूप बने।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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7 झुका नहीं
अभी मिटा नहीं हूँ, अभी झुका नहीं हूँ
संघर्ष की राह से मैं हटा नहीं हूँ।
तूफानों ने लाख कोशिश की मुझे रोकने की
पर अपने इरादों से मैं डरा नहीं हूँ।
अंधेरों ने घेरकर परखा है बार-बार मुझे
फिर भी आशा का दीप मैं बुझा नहीं हूँ।
समय लिखेगा एक दिन मेरी कहानी स्वयं
क्योंकि अपने पुरुषार्थ से मैं थका नहीं हूँ।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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8 चेहरा
आज भले ही पथ पर घना अंधेरा होगा
कल इसी पथ पर उजाला मेरा होगा।
मेहनत की हर बूंद व्यर्थ नहीं जाती
इनसे ही सफलता का सवेरा होगा।
मत रुकना तू बाधाओं की दीवारों से
तेरे साहस से हर पत्थर किनारा होगा।
विश्वास अगर अटल रहा अपने कर्मों पर
तेरा नाम ही कल युग का चेहरा होगा।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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9 धूल
मैं हार की धूल नहीं, जीत की पहचान हूँ
मैं ठहरा हुआ नहीं, निरंतर उड़ान हूँ।
रोकना चाहें लाख मुझे ये कठिनाइयों के जाल
मैं टूटकर भी न झुकूँ, ऐसा स्वाभिमान हूँ।
अंधेरों की शक्ति क्या परखेगी मेरे हौसलों को
मैं स्वयं ही अपने पथ का जलता हुआ प्रमाण हूँ।
समय भी लिखेगा एक दिन स्वर्ण अक्षरों में मुझे
क्योंकि मैं कर्म से गढ़ी हुई अमिट कहानी का मान हूँ।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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10 ठोकरें
मैं ठोकरों से गिरा, तो और मजबूत बन गया
संघर्ष की धूप में तपकर अनमोल बन गया।
रोकना चाहा समय ने लाख कठिन राहों से
पर मेरा हौसला ही मेरा संबल बन गया।
अंधेरों ने भी परखा मेरे विश्वास का दीप
मैं जलता रहा और स्वयं उजाला बन गया।
अब कौन रोकेगा मेरे बढ़ते हुए कदमों को
मेरा पुरुषार्थ ही मेरी पहचान बन गया।