जब जब सूरज निकलेगा,
तब तब उपवन महकेगा।
मेरी छोटी सी बगिया में,
रंग–रंग फूल खिलेगा।
अंधियारा चाहे जितना हो,
हौसलों की लौ जलानी है,
टूटी राहों से क्या डरना,
मंज़िल खुद बन जानी है।
मेहनत का दीप जलेगा,
हर सपना सच हो जाएगा।
जब जब सूरज निकलेगा,
तब तब उपवन महकेगा।
मेरी छोटी सी बगिया में,
रंग–रंग फूल खिलेगा।
माटी से ही सोना उपजे,
बीज यही विश्वास बने,
कल की चिंता छोड़ आज में,
परिश्रम ही इतिहास बने।
हर पत्ता गीत लिखेगा,
हर मौसम रंग दिखाएगा।
जब जब सूरज निकलेगा,
तब तब उपवन महकेगा।
मेरी छोटी सी बगिया में,
रंग–रंग फूल खिलेगा।
सपनों की जब उड़ान भरे,
डर की जंजीरें टूटेंगी,
सच की राह पे जो चल निकले,
किस्मत खुद ही रूठेगी।
इंसान अगर न झुकेगा,
तो जग भी शीश झुकाएगा।
जब जब सूरज निकलेगा,
तब तब उपवन महकेगा।
मेरी छोटी सी बगिया में,
रंग–रंग फूल खिलेगा।
गीत
डॉ चन्द्रपाल राजभर (आर्टिस्ट)
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