Sunday, April 12, 2026

स्कूल सॉन्ग डॉ चंद्रपाल राजभर

मिट्टी की सोंधी खुशबू में, सपनो का बीज उगाना है
पकड़ के उँगली अपनों की, अब स्कूल हमें भी जाना है।
कंधे पर बस्ता लटका है, माथे पर उज्ज्वल तिलक लगा
देखो गांव की चौपालों में, शिक्षा का सूरज आज जगा।

वो नीम की ठंडी छाँव तले, फिर वही तराना गाना है
सरकारी स्कूल की घंटी ने, सबको पास बुलाना है।
ना जात-पात, ना ऊंच-नीच, सब एक ही बैंच पे बैठेंगे
कलम हाथ में थाम के हम, अपना भाग्य खुद लिखेंगे।

बिटिया भी अब पढ़ेगी और जग में नाम कमाएगी
घर की लक्ष्मी ज्ञान की देवी, बनकर वह दिखाएगी।
साक्षर होगा हर हाथ यहाँ, हर चेहरा मुस्काएगा
मेरा गांव पढ़ेगा जब, तभी तो ये बढ़ पाएगा।

जुमला)
आधी रोटी खाएंगे, स्कूल जरूर जाएंगे!
स्कूल चलो, स्कूल चलो, स्कूल चलो भाई स्कूल चलो!

गीत 
डॉ चन्द्रपाल राजभर 
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2
जागो रे जागो, अब भोर भई है,
ज्ञान की किरनें द्वार खड़ी हैं।
बस्ता उठाओ, कलम सजाओ,
शिक्षा की नई अलख जगाओ।
चलो-चलो अब स्कूल चलें हम,
देश का नाम रोशन करें हम।

गली-मोहल्ला, गाँव और शहर,
पढ़ने की अब जागी है लहर।
न कोई छोटा, न कोई बड़ा,
हर बच्चा अब स्कूल बढ़ा।
अंधियारे को दूर भगाना,
पढ़-लिखकर है जग चमकाना।
चलो-चलो अब स्कूल चलें हम...

खुल गए हैं स्कूल के द्वार,
सपनो को मिलेगा अब आकार।
शिक्षक हमें मार्ग दिखाएंगे,
हम भारत का भाग्य बनाएंगे।
हाथों में लेकर हाथ चलें हम,
नया सवेरा साथ चलें हम।
चलो-चलो अब स्कूल चलें हम..
गीत 
डॉ चन्द्रपाल राजभर 
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3
आओ मिलकर कसम ये खाएं
घर-घर शिक्षा की जोत जलाएं।
छोड़ो आलस, छोड़ो बहाना,
हमें है अब स्कूल जाना।

ज्ञान का पावन दीप जलाकर,
मिटाना है मन का अंधेरा।
चलो स्कूल, चलो स्कूल,
आ गया नया सवेरा।

[अंतरा 1]
पढ़ेंगे-लिखेंगे, खेलेंगे हम,
मंजिल की ओर बढ़ेंगे कदम।
कागज़ पर अपनी किस्मत लिखेंगे,
नई-नई हम बातें सीखेंगे।

ममता की छाँव, गुरुओं का प्यार,
शिक्षा ही है जीवन का आधार।
चलो स्कूल, चलो स्कूल...

[अंतरा 2]
बिटिया भी अब पीछे न होगी,
ज्ञान की वह भी साधक होगी।
हर बालक अब वीर बनेगा,
पढ़-लिखकर ही धीर बनेगा।

कल का भारत गढ़ना है हमें,
ऊंचे शिखर पर चढ़ना है हमें।
चलो स्कूल, चलो स्कूल...
गीत 
डॉ चन्द्रपाल राजभर 
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4
कसम खुदा की कहता हूं मैं, शिक्षा की अलख जगाऊंगा   
पढ़ना लिखना है दौर यही ,दुनिया को यही बताऊंगा  
कसम खुदा की

गांव-गांव में दीप जला, अज्ञान अंधेरा मिटाऊंगा
छोटे-छोटे हाथों में मैं, ज्ञान की ज्योति जलाऊंगा।
न कोई गरीब रहेगा, नहीं कोई अनपढ़ होगा
हर बच्चे के चेहरे पर, शिक्षा का
एक सूरज होगा।
कसम खुदा की......


किताबों से सजते सपने, बात यही बतलाऊंगा
मेहनत की इस राह पे चलकर, मंज़िल तक पहुँचाऊं।
न बेटी, न बेटा झुके सबको हक़ दिलवाऊंगा
शिक्षा के इस पावन पथ पर, सबको मैं ले जाऊंगा।
 कसम खुदा......

अंतरा 3:
स्कूलों में घंटी बजे जब, खुशियों का मौसम होगा
हर कक्षा में ज्ञान का दीपक, उजियारा से भरा होगा।
मिल-जुलकर हम कसम खाएं, कोई न पीछे रह जाए
शिक्षा से ही भारत अपना, दुनिया में जगमग होगा।
कसम खुदा की......
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