Friday, July 31, 2026

प्रार्थना

धरती मेरी पालनहारा, हम भी धारा को सजाएंगे।
पेड़ हमें देते हैं वायु, हम भी पेड़ लगाएंगे।
नदिया ताल तलैया कुइया, सब जल हमको देते हैं।
हम भी इनको संजोएंगे, जल जो यह हम पीते हैं।।
धरती...

माटी देती अन्न सुनहरा, जीवन का आधार यही
इसकी सेवा सबसे बढ़कर, अपना सच्चा प्यार यही।
कूड़ा-कचरा न फैलाएँ, स्वच्छ धरा ये बनाएँगे 
माँ के आँचल जैसी धरती, मिलकर इसे सजाएँगे।।
धरती...

हरी-भरी हो हर एक बगिया, हर मौसम मुस्काएगा
चिड़ियों का मधुरिम कलरव, घर-आँगन महकाएगा।
वन-उपवन की रक्षा करके, हरियाली फैलाएँगे
धरती माँ का मान बढ़ाकर, सुख का दीप जलाएँगे।।
धरती...

जल,जंगल और यह जीवन, हम सबका सम्मान करें
आने वाली हर पीढ़ी का, सुंदर सा निर्माण करें।
मिलकर ऐसा प्रण लें साथी, जग को स्वर्ग बनाएँगे
धरती माँ की सेवा करके, अपना धर्म निभाएँगे।।
धरती...

रचना 
डॉ.चन्द्रपाल राजभर

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प्रार्थना 2

हे सृष्टि के पालनहारे
भर दो जीवन में उजियारे।
सत्य, प्रेम का दीप जलाओ
हमको सच्चा पथ दिखलाओ।।
हे......
भर दो......

अंतरा – 1
मन में करुणा, प्रेम अपार
जीवन हो खुशियों का हार।
सेवा अपना धर्म बनाएँ
सबके मन में प्रेम जगाएँ।।
हे......
भर दो......

अंतरा – 2
ज्ञान-विवेक का हो प्रकाश
सत्य रहे हर पल के पास।
दया, क्षमा का मान बढ़ाएँ
मानवता का दीप जलाएँ।।
हे......
भर दो......

अंतरा – 3
धरती, अम्बर, जल से प्यार
यही हमारा हो संस्कार।
तेरी कृपा सदा मिल जाए
जीवन सफल हमारा हो जाए।।
हे......
भर दो......

Friday, July 24, 2026

ट्रेनिंग कॉबेडियम

https://docs.google.com/spreadsheets/d/1IUaDKj_3vvlSvjU3mmQjmgu6Iw6y5EMvDAmM0DcTW-Q/edit?gid=0#gid=0

Thursday, July 23, 2026

बहिष्कार

बहिष्कार
कुछ चेहरों की पहचान ज़रूरी है
सच और झूठ की भी पहचान ज़रूरी है।।

कुछ चेहरों का सम्मान ज़रूरी है
जो हर दौर में इंसान बने, उनका मान ज़रूरी है।।

कुछ चेहरों का बहिष्कार ज़रूरी है
जो नफ़रत बाँटें, उनका प्रतिकार ज़रूरी है।।

वक़्त सिखा देता है कौन अपना, कौन पराया
इसलिए हर चेहरे को परखना बार-बार ज़रूरी है।।

गज़ल 
डॉ.चन्द्रपाल राजभर (आर्टिस्ट )
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2

चापलूसी 
जो सच कहे, वही अक्सर निगाहों से उतरता है
चापलूस हर महफ़िल में ऊँचा ही दिखता है।।

हुनर से ज़्यादा जिसकी झूठी तारीफ़ चलती हो
वहीं पर क़ाबिलों का हौसला अक्सर बिखरता है।।

ज़मीर बेचकर जो रोज़ रिश्ते ढूँढ़ लाते हैं
वही हर दौर में अपना ही चेहरा बदलता है।।

चमकते शब्द सुनकर हर किसी पर मत यक़ीं करना
कई चेहरों के पीछे एक गहरा खेल चलता है।।

न झूठी वाह-वाही से कभी किरदार बनता है
सचाई का दिया ही आँधियों में ही सँभलता है।।

जो सत्ता, धन,ताक़त की चौखट पर झुका रहता
वो इंसानों नहीं, बस फ़ायदे के साथ चलता है।।

रखो ईमान को ज़िंदा, यही दौलत है जीवन की
चापलूसी का महल इक दिन ज़रूर ढहता है।

गज़ल 
डॉ चद्रपाल राजभर 

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चापलूसी 

चापलूसों की चापलूसी, हर दरबार में छाई है
सच की बोली आज यहाँ, कितनों को भरमाई है।।
झूठ के मोती पिरो-पिरोकर, वाह-वाही बटोर रहे
मेहनत वाले कोने बैठे, अपने आँसू पोंछ रहे।।

मुँह पर मीठी बात करेंगे, मन में रखते और गुबार
मतलब पूरा होते ही फिर, बदलें अपनी बागडोर।।
जिस थाली में खाते-पीते, उसी में शेंध लगाते हैं
मौका मिलते ही अपने भी, गैर नज़र आते हैं।।

सच का दीपक धीमा होगा, लेकिन बुझता कब है ये
ईमानों की राह कठिन है, पर झुकता कब है ये।।
झूठ की नाव भँवर में जाकर, डूब ही जाती है एक दिन 
सच्चे मन की छोटी कोशिश, बदनाम कराती है एक दिन।।

मत करना तुम चापलूसी, मत बेचना अपना ईमान
सच की राह पकड़कर चलना, यही सच्ची है पहचान।।
दुनिया चाहे साथ न दे तो, हिम्मत मत तुम हारना
सत्य और स्वाभिमान में ही , जीवन का है श्रृंगार।।

रचना 
डॉ.चन्द्रपाल राजभर 
(आर्टिस्ट)

Friday, July 10, 2026

प्रेरणा गीत

दुनिया जहां से लड़ना पड़े 
चाहे खुद को मिटाना पड़े 
पर तुम सफलता पाना जरूर 
चाहे कुछ भी करना पड़े 
दुनिया........
चाहे.........

सफलता मिलेगी, चलो सोलों पर
डरने से कुछ भी,न होता यहां पर
उम्मीदों की लव को, जलाकर चलों तुम।।2।।
मंजिल तुम्हारी होगी यहां पर 
दुनिया........
चाहे.........

मेहनत की मिट्टी में, सपनों को बोना
आंखों में सपने,सजाकर न सोना
जली है मसालें ,जलाए ही रखना 
उम्मीदों को अपने, कभी न खोना 
दुनिया.......
चाहे.......

अम्बर भी झुकेगा, इरादों से तेरे 
लिख दे नई कहानी, वो प्यारे।
विश्वास का दीपक, जलाकर चलो तुम
जीत लिखी है, मुकद्दर की तेरे ।।
दुनिया.......
चाहे.......

गीत 
डॉ.चन्द्रपाल राजभर

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2
चलते रहो, रुकना नहीं, मंज़िल पुकारती Sssl
मेहनत की हर  बूँदों से, तक़दीर सँवारती।
गिरकर भी मुस्कान भरो, हिम्मत न हारो तुम
कल का सूरज अपना होगा, सपना सँवारो तुम ।

राहों में काँटे होंगे, फूल खिल जाएँगे
सच्चे इरादों वाले, मंज़िल पा जायेंगे ।
आँधी से जो टकराए, वह बीर कहलाये
मेहनत करने वालों का, सपना मुस्काये।।


पत्थर भी पिघलते हैं, विश्वास की गर्मी से
किस्मत भी बदलती है, कर्मों की सच्चाई से।
आज अगर अँधेरा है, कल उजियारा आएगा
तेरे संघर्षों का किस्सा, दुनिया सुनाएगा।

चलते रहो, रुकना नहीं, मंज़िल पुराती
मेहनत की इस धरती पर,है हार जीतती
विश्वास की लौ जलाकर, आगे कदम बढ़ाना,एक दिन दुनिया बोलेगी—यही है सच्चा दीवाना।
________________________
3
चल, खुद अपनी राह बना
कर्मो से इतिहास बना।
ठोकर को न हार समझ
उसमें ही विश्वास बना।।
चल खुद......
कदमों से.......

सूरज बनकर रोज़ निकलना
तम को हर पल दूर ss करना।
अपने दम पर मंज़िल पाना
किस्मत का दस्तूर बदलना।।
पर्वत भी झुक जाएगा ।।2।।
संकल्प अगर टिक जायेगा।
चल खुद......
कदमों से....

जब जलता दीपक मेहनत का
अँधियारा ढ़लss जाता है।
जिसने खुद को जीत लिया
दुनिया वो ही बदलता है।।
अपने कर्मों की ताकत से ll2ll
भाग्य नया लिखा जाता है।
चल खुद......
कदमों से....

नदियों सा बहते रहना तुम
रुकना तेरा काम ss नहीं।
गिरकर फिर उठ जाना तुम
वीरों की पहचान यही।।
तेरी मेहनत तेरा धन ।।2।।
तेरा साहस तेरा मन।
चल खुद......
कदमों से.......

गीत 
डॉ.चन्द्रपाल राजभर (आर्टिस्ट) 
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4

वक़्त पुकार रहा है तुमको
अब तो आगे बढ़ना है।
अपने दम पर लिखना 
जीवन का हर सपना है।।
कल की बातें छोड़ मुसाफ़िर
आज नया आगाज़ करो
मेहनत की तू मशाल जलाकर
हर मुश्किल पर राज करो
वक्त......
अब......
अपने.....
जीवन......

बीज अगर मिट्टी में सोता
तब बनता है वृक्ष कोई।
तपकर ही सोना निखरता
प्रकृति का दस्तूर यही ।

धूप मिले तो हँसते जाना
छाँव मिले आराम नहीं।
जब तक मंज़िल पास न आए
तब तक कोई विराम नहीं।।
वक्त......
अब......
अपने.....
जीवन......

छोटे-छोटे रोज़ कदम ही
बनते ऊँची उड़ानों में।
बूँद-बूँद से सागर भरता
यही लिखा है गानों में।।

आज पसीना जो बहाता
कल ये सम्मान दिलाएगा।
तेरी सच्ची कर्म कहानी
युग-युग तक गाया जायेगा।।
वक्त......
अब......
अपने.....
जीवन......

गीत 
डॉ.चन्द्रपाल राजभर (आर्टिस्ट)

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5
निराशा कुहासे हटाकर चलो तुम
कठिन राह पर आगे बढ़ो तुम
जो रोके जंजीरें जमाने की
उन्हें आत्मबल से मिटाते रहो तुम 

मिले शूल पथ पर, तो विचलित न होना 
धैर्य का दामन कभी न तुम खोना ।
साहस के तरकश में  विश्वास को रखकर
चुनौतियों ss में बीर बनकर तुम रहना

पराजय कभी मन में अपने न लाना 
निराशा को दामन में आने देना
विपत्ति तो आती जाती रहेगी 
पुरुषार्थ ही तो मुसीबत टलेगी

तपस्या में तपकर निखरता है कुंदन 
सीप में ही तो मोती सदा होते सुंदर ।
कठिन अति डगर है ,मगर श्रेष्ठ तुम हो
यही शूरवीर तो होता है समन्दर।

गीत 
डॉ.चन्द्रपाल राजभर (आर्टिस्ट)
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6
चलो नया इतिहास लिखें, मंज़िल को अपने पास लिखें
मेहनत की हर बूँद से, सपनों का हम विश्वास लिखें।
हार नहीं, हिम्मत की भाषा, हर दिल में हम आज लिखें
चलो नया इतिहास लिखें, मंज़िल को अपने पास लिखें।

आँधी चाहे राहें रोके, कदम कभी रुकने न दें
काँटों वाली इन राहों को, फूलों सा झुकने न दें।
सूरज बनकर चमकेंगे हम, ऐसा एक प्रयास लिखें
चलो नया इतिहास लिखें, मंज़िल को अपने पास लिखें।

देश हमारा शान हमारी, इसकी रक्षा धर्म बने
एकता की डोर थामकर, हर दिल अपना कर्म बने।
भारत माँ के स्वर्णिम कल का, मिलकर हम उल्लास लिखें
चलो नया इतिहास लिखें, मंज़िल को अपने पास लिखें।

ज्ञान हमारा सबसे बड़ा धन, सेवा सबसे बड़ा मान
सत्य, प्रेम और कर्म की शक्ति, बन जाए अपनी पहचान।
हर बच्चे के उज्ज्वल कल का, मिलकर नया विकास लिखें
चलो नया इतिहास लिखें, मंज़िल को अपने पास लिखें।
गीत 
चन्द्रपाल राजभर 
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7

Wednesday, July 8, 2026

आर्ट क्लास

https://drive.google.com/file/d/1j-IbQINNbO8rzpp29Q_fY4O77GTpNT0F/view?usp=drivesdk
8 July 
Bhartiya kala class 1


https://drive.google.com/file/d/1cgMzxh_pvjtSW7IgZMw21QVyZ8swTWPd/view?usp=drivesdk
9 July 
Bhartiya kala class 2


https://drive.google.com/file/d/1Oh4wKE3QqEAZ9pJWHWUECTbNMzkRgYxd/view?usp=drivesd
10 july 
Bhartiya kala
Class 3

https://drive.google.com/file/d/1AzFCvW4G9gwTi0nEmCu_9fviz5LPPU4m/view?usp=drivesdk
11 July 
Bhartiya kala class 4

https://drive.google.com/file/d/1G9A-P6_N0OWKpUmFK5BSUtlrjptH9-d0/view?usp=sharing 13 July Bhartiya kala class 5
https://drive.google.com/file/d/19dLtaJgGLQzYuRUROOScI0ychrETZt9s/view?usp=drivesdk
15 July 
Bhartiya kala class 6

https://drive.google.com/file/d/1L13r1xBgNIQD64BtyEVvc082cC-HSvh2/view?usp=drivesdk
16 july 
Bhartiya kala class 7

https://drive.google.com/file/d/1cqhFjWmBo-NeEyeA2L1l4CsjkXwRmLz0/view?usp=drivesdk
17 july 
Bhartiya kala class 8