नींद नहीं आती, आभा दिखा दे चन्दा ।।
अंतरा १ :
सपनों के सागर में कोई किनारा नहीं,
यादों की लहरों का अब उतारा नहीं,
दिल की बुझी लौ को, फिर से जला दे चन्दा,
नींद नहीं लागे, आभा दिखा दे चन्दा ।।
अंतरा २ :
चुपके से कोई दर्द दिल में उतरता है,
आँखों के आँगन में आँसू ठहरता है,
थोड़ी सी राहत की छाया बना दे चन्दा,
नींद नहीं लागे, आभा दिखा दे चन्दा ।।
अंतरा ३ :
तनहा ये दिल रातों में तड़पता बहुत है,
सपनों की दुनिया में भटकता बहुत है,
सुकून का कोई लम्हा सजा दे चन्दा,
नींद नहीं लागे, आभा दिखा दे चन्दा ।।
अंतरा ४ :
दूर कहीं वो चेहरे की झलक सोई है,
तेरी किरणों में उसकी झलक खोई है,
उस याद की परछाईं दिखा दे चन्दा,
नींद नहीं लागे, आभा दिखा दे चन्दा ।।
अंतरा ५ (समापन):
मन की व्यथा अब गीतों में ढल जाती है,
हर धड़कन तेरे नाम पे चल जाती है,
रात का सन्नाटा महका दे चन्दा,
नींद नहीं लागे, आभा दिखा दे चन्दा ।।