Monday, October 27, 2025

गीत आभा दिखा दे चन्दा - डॉ चन्द्रपाल राजभर

रात बड़ी लम्बी, आनन दिखा दे चन्दा,
नींद नहीं आती, आभा दिखा दे चन्दा ।।

अंतरा १ :
सपनों के सागर में कोई किनारा नहीं,
यादों की लहरों का अब उतारा नहीं,
दिल की बुझी लौ को, फिर से जला दे चन्दा,
नींद नहीं लागे, आभा दिखा दे चन्दा ।।

अंतरा २ :
चुपके से कोई दर्द दिल में उतरता है,
आँखों के आँगन में आँसू ठहरता है,
थोड़ी सी राहत की छाया बना दे चन्दा,
नींद नहीं लागे, आभा दिखा दे चन्दा ।।

अंतरा ३ :
तनहा ये दिल रातों में तड़पता बहुत है,
सपनों की दुनिया में भटकता बहुत है,
सुकून का कोई लम्हा सजा दे चन्दा,
नींद नहीं लागे, आभा दिखा दे चन्दा ।।

अंतरा ४ :
दूर कहीं वो चेहरे की झलक सोई है,
तेरी किरणों में उसकी झलक खोई है,
उस याद की परछाईं दिखा दे चन्दा,
नींद नहीं लागे, आभा दिखा दे चन्दा ।।

अंतरा ५ (समापन):
मन की व्यथा अब गीतों में ढल जाती है,
हर धड़कन तेरे नाम पे चल जाती है,
रात का सन्नाटा महका दे चन्दा,
नींद नहीं लागे, आभा दिखा दे चन्दा ।।

Monday, October 20, 2025

पवन गीत- लेखक डॉ चन्द्रपाल राजभर

पवन बोले जब प्यारी बात,
दिलाए तेरी मेरी फिर याद।
फूलों से खुशबू अब बरसे,
मन में उठे मीठी बरसात॥
पवन बोले जब प्यारी बात,
दिलाए तेरी मेरी फिर याद।

बादल छाए, नभ मुस्काए,
जाने कहाँ तू खोई जाए।
तेरी हँसी का झोंका आए,
मन में मेरे उल्लास जगाये।।
पवन बोले जब, प्यारी बात,
दिलाए तेरी मेरी फिर याद।

सावन में गाए, साजन तेरे,
झरनों में बहें ,अरमान मेरे।
सपनों में तेरा ,नाम पुकारे,
प्रीत की अलख, फिर जगाये॥
पवन बोले जब प्यारी बात,
दिलाए तेरी मेरी फिर याद।

चाँद सा गोरा मुखड़ा तेरा,
पवन करे अब तेरा पहरा।
साँसों में तेरी खुशबू ठहरे,
मन को मिले तेरी सौगात॥
पवन बोले जब प्यारी बात,
दिलाए तेरी मेरी फिर याद।
फूलों से खुशबू अब बरसे,
मन में उठे मीठी बरसात॥

लेखक 
डॉ चन्द्रपाल राजभर