Thursday, July 23, 2026

बहिष्कार

बहिष्कार
कुछ चेहरों की पहचान ज़रूरी है
सच और झूठ की भी पहचान ज़रूरी है।।

कुछ चेहरों का सम्मान ज़रूरी है
जो हर दौर में इंसान बने, उनका मान ज़रूरी है।।

कुछ चेहरों का बहिष्कार ज़रूरी है
जो नफ़रत बाँटें, उनका प्रतिकार ज़रूरी है।।

वक़्त सिखा देता है कौन अपना, कौन पराया
इसलिए हर चेहरे को परखना बार-बार ज़रूरी है।।

गज़ल 
डॉ.चन्द्रपाल राजभर (आर्टिस्ट )
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चापलूसी 
जो सच कहे, वही अक्सर निगाहों से उतरता है
चापलूस हर महफ़िल में ऊँचा ही दिखता है।।

हुनर से ज़्यादा जिसकी झूठी तारीफ़ चलती हो
वहीं पर क़ाबिलों का हौसला अक्सर बिखरता है।।

ज़मीर बेचकर जो रोज़ रिश्ते ढूँढ़ लाते हैं
वही हर दौर में अपना ही चेहरा बदलता है।।

चमकते शब्द सुनकर हर किसी पर मत यक़ीं करना
कई चेहरों के पीछे एक गहरा खेल चलता है।।

न झूठी वाह-वाही से कभी किरदार बनता है
सचाई का दिया ही आँधियों में ही सँभलता है।।

जो सत्ता, धन,ताक़त की चौखट पर झुका रहता
वो इंसानों नहीं, बस फ़ायदे के साथ चलता है।।

रखो ईमान को ज़िंदा, यही दौलत है जीवन की
चापलूसी का महल इक दिन ज़रूर ढहता है।

गज़ल 
डॉ चद्रपाल राजभर 

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चापलूसी 

चापलूसों की चापलूसी, हर दरबार में छाई है
सच की बोली आज यहाँ, कितनों को भरमाई है।।
झूठ के मोती पिरो-पिरोकर, वाह-वाही बटोर रहे
मेहनत वाले कोने बैठे, अपने आँसू पोंछ रहे।।

मुँह पर मीठी बात करेंगे, मन में रखते और गुबार
मतलब पूरा होते ही फिर, बदलें अपनी बागडोर।।
जिस थाली में खाते-पीते, उसी में शेंध लगाते हैं
मौका मिलते ही अपने भी, गैर नज़र आते हैं।।

सच का दीपक धीमा होगा, लेकिन बुझता कब है ये
ईमानों की राह कठिन है, पर झुकता कब है ये।।
झूठ की नाव भँवर में जाकर, डूब ही जाती है एक दिन 
सच्चे मन की छोटी कोशिश, बदनाम कराती है एक दिन।।

मत करना तुम चापलूसी, मत बेचना अपना ईमान
सच की राह पकड़कर चलना, यही सच्ची है पहचान।।
दुनिया चाहे साथ न दे तो, हिम्मत मत तुम हारना
सत्य और स्वाभिमान में ही , जीवन का है श्रृंगार।।

रचना 
डॉ.चन्द्रपाल राजभर 
(आर्टिस्ट)

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