Sunday, November 3, 2024

गजल एल्बम 34 टाईट

1
गजल
तेरे जाने का गम

आज तेरे बदल जाने का गम जरूर है मुझे
तेरी यादों के साए में चुपचाप रहना है मुझे।

वो मुस्कान, वो बातें, सब कुछ रह गईं पीछे
खामोशियों में ढूंढना अब तेरा चेहरा है मुझे।

दिल के हर कोने में तेरी खुशबू बसी है
हर सांस के साथ तेरा एहसास है, ये डर है मुझे।

जबसे तुम बिछड़ गई हो, दुनिया अंधेरी है
हर सुबह का उजाला, अब तेरे बिना अधूरा है मुझे।

जिन राहों पर चलते थे, अब वो वीरान हैं
तेरे बिना हर कदम पर सिसकियाँ भरना है मुझे।

आज तेरे बदल जाने का गम जरूर है मुझे
तेरे बिना इस दिल में खालीपन का मंजर है मुझे।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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2
गजल

अब तुम बहुत बदल गए हो, पहले जैसे नहीं रहे
वो अपनेपन के सिलसिले अब वैसे नहीं रहे।

तुम्हारी बातों में थी जो खुशबू फूलों की कभी
अब उनमें वो एहसास के हिस्से नहीं रहे।

जो प्यार की चमक थी तुम्हारी नजरों में
अब उनमें वो चमकते हुए हिस्से नहीं रहे।

पहले हर दर्द बांटा था तुमने दिल से कभी
अब हमारे बीच वो रिश्ते वैसे नहीं रहे।

हमने जो ख्वाब बुने थे तेरे साथ बैठकर
अब उनमें वो मोहब्बत के किस्से नहीं रहे।

एक वक्त था, जब हर पल में बसते थे तुम
अब तुम मेरे ख्वाबों में भी वैसे नहीं रहे।

तुम्हारी हंसी थी मेरे दिल की राहत कभी
अब उसमें वो पहले जैसे हंसी के रस नहीं रहे।
गजल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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3
गजल
नहीं चाहिए झूठे वादे 

नहीं चाहिए झूठे वादे, न वो बातें पुरानी
दिल को जो लगीं, वो हैं अब भी कहानी पुरानी।

कसमों में जो मिठास थी, वो ख़ाक हो गई
ख्वाबों में छुपी रह गई हर निशानी पुरानी।

वफ़ा की राह पे चले तो खता मानी गई
नासमझ ठहरे हम, है ये कहानी पुरानी।

मोहब्बत की गहराइयों में डूबते रहे
जागे तब देखा, थी हर निशानी पुरानी।

अब तो सच्चे अल्फ़ाज़ की तलाश में हूँ
नहीं चाहिए झूठे वादे, न कहानी पुरानी।

गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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4
गजल
झूठे वादे 

नहीं चाहिए झूठे वादे, न कोई बहाना
जिसे दिल से चाहा, उसने दिया सिर्फ़ फ़साना।

कितनी बार भरोसा किया, पर हासिल कुछ नहीं
वो ही किस्से, वो ही आंसू, वही दर्द पुराना।

मुद्दतों से सहेजा था ख़्वाबों का एक जहाँ
पर अब टूट कर रह गया वो घर आशियाना।

चाहत में जो देखा था, सब धुआं बन गया
अब दिल को समझा लिया, नहीं कोई अफ़साना।

अब सच्चाई ही चाहिए रिश्तों के सिलसिले में
नहीं चाहिए झूठे वादे, न कोई बहाना

गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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5
गजल
आज की रात भीगी भीगी सी 

आज की रात भीगी भीगी सी है
यादों में घुली, कुछ अधूरी सी है।

चाँद भी खामोश है, सितारे भी चुप
दिल की ये हालत बड़ी अजीब सी है।

हवा में बसी है उसकी ख़ुशबू कहीं
फिज़ा में जो लहराती हर सिम्त सी है।

अधूरे ख्वाबों की कहानी कहे
हर धड़कन में जैसे तन्हाई सी है।

पलकों पर ठहरा है दर्द का सफर
ये रात मोहब्बत की गवाही सी है।

गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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6
गजल
भीगी भीगी सी 

आज की रात भीगी भीगी सी है
खामोशियों में छुपी कोई बात सी है।

चुपके से दिल को छू रही है हवा
इन लम्हों में बसी मुलाकात सी है।

कहीं दूर से आती है उसकी सदा
हर सदा में छुपी उसकी याद सी है।

तन्हाइयों में डूबी सी है ये रात
दिल के करीब कोई हयात सी है।

रात ढल जाए मगर ये ख्वाब न टूटें
आज की रात भीगी, कोई सौगात सी है।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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7
गजल
नींद नहीं आती मुझे 

नींद नहीं आती मुझे, ख्यालों में खोया रहता हूँ
तेरी यादों के साये में रात भर सोया रहता हूँ।

चाहा बहुत भुला दूँ मैं, तेरा नाम दिल से मगर
दिल के हर कोने में तेरी ही खुशबू बोया रहता हूँ।

तकिए पर अश्कों का निशां बसा है कब से
तन्हाई में तेरी बातों से ही दिल धोया रहता हूँ।

आती है हर रात तेरी यादें बनके ख्वाब
इस उलझन में हर लम्हा मैं खुद रोया रहता हूँ।

नींद नहीं आती मुझे, तेरा ख्याल ऐसे है पास
जैसे बेमौसम बादल मैं हर पल ढोया रहता हूँ।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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8
गजल
रातों में तेरी यादों के सपने

ये रातों में तेरी यादों के सपने
संग मेरे आकर ये जगाएं अपने।

तन्हाई में आके सजीले ख्याल
दिल को यूँ बसाकर सुलाएं अपने।

हर आहट पे तेरी झलक ढूँढ़ें हम
दिल में बसी हैं ये सदाएं अपने।

तेरी दूरी में दिल बहलता नहीं
आँखों में बसाए जो आएं अपने।

सवेरा भी सूना लगे बिन तेरे
रातों में तुझे पास बुलाएं अपने।

तू ना हो फिर भी एहसास तेरा
यादों के दीपक जलाएं अपने।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 

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