झोलावा औ, कंपियां, कितबिया लेला हो।।2।।
चला चला मोरे ललना, स्कूलवा चला हो।।2।।
मेहनत करबा ता ,मेहनतिया बोली होss,
चमक उठी तोहर,किस्मतिया बोली हो।।
गाँव नगरिया से निकाला पाऊंवा हो, ।।2।।
चला चला मोरे ललना, स्कूलवा चला हो।।
झोलवा औ, कंपनियां , कितबिया लेला हो।।
चला चला मोरे ललना, स्कूलवा चला हो।।
गरीबी के दीवार ई ,गिरेगी हिम्मत से
होला सपनवा ,साकार मेहनत से
इल्मों का दीप जरेला हिम्मत से,
अंधियारा दूर भगवा, तू पढ़ी ला मेहनत से
झोलावा औ, कंपियां, कितबिया लेला हो।।2।।
चला चला मोरे ललना, स्कूलवा चला हो।।2।।
जिंनगी तोहार औ, दुआर सुधर जाई
पढ़ी-लिखी लेबा तो परिवार सुधर जाए
गांव समाज के सम्मान बढ़ जाए
देशवा के अपने, मान बढ़ी जाई
चला चला मोरे ललना, स्कूलवा चला हो।।।।
झोलावा औ, कंपियां, कितबिया लेला हो।।2।।
चला चला मोरे ललना, स्कूलवा चला हो।।2।।
गीत
डॉक्टर चन्द्रपाल राजभर
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चलो स्कूल की गलियां, जहां सपने सजते हैं
मेहनत की धूप में यहां, जीवन फूल बनते हैं
ज्ञान की रोशनी लेकर, अंधियारा मिटता है
चलो स्कूल की गलियां, जहां भविष्य खिलता है
चलो स्कूल की गलियां........
यहां कलम की ताकत से, तकदीर बदलती है
छोटी-सी कोशिश भी, ऊंचाई को छू लेती है
हर बच्चे के मन में, विश्वास पलता है
चलो स्कूल की गलियां, जहां जीवन संवरता है
चलो स्कूल की गलियां........
यहां गुरु का आशीष, सागर सा गहरा है
हर एक नया सवेरा, उम्मीदों का पहरा है
यहीं से हर इंसान, इतिहास बदलता है
चलो स्कूल की गलियां, जहां भारत बढ़ता है
चलो स्कूल की गलियां........
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