तुम्हारी नज़रें कुछ कह जाती हैं,
ख़ामोशी में भी शोर मचा जाती हैं,
बिन छुए ही जो दिल को छू जाए,
वो हर धड़कन मेरी बन जाती हैं।
होठों की लकीरों में छुपी बातों को,
आँखों की चमक यूँ उजागर करती है,
एक मुस्कान की हल्की सी बारिश,
रूह के आँगन को तर करती है।
सांसों में घुली जो खुशबू तुम्हारी,
हर लम्हा नया एहसास जगाती है।
तुम्हारी नज़रें कुछ कह जाती हैं
ख़ामोशी में भी शोर मचा जाती हैं,
पलकों का झुकना, फिर नज़र उठना,
कह जाता है जो लफ्ज़ न कह पाए,
एक नज़र में सौ वादे लिखकर,
सीधे दिल के पन्ने पर उतर जाए।
नज़रों का ये जादू संभाले न संभले,
नीयत भी राहें बदल जाती है।
तुम्हारी नज़रें कुछ कह जाती हैं
ख़ामोशी में भी शोर मचा जाती हैं,
उल्फत की गलियों में जो कदम रखा,
एक धड़कन वहीं ठहर सी गई,
तुम्हारी आँखों में जो घर पाया,
मेरी हर तन्हाई बिखर सी गई।
सीने में जो धड़कन आज भी धड़के,
वो तुम्हारी धड़कन कहलाती है।
तुम्हारी नज़रें कुछ कह जाती हैं,
ख़ामोशी में भी शोर मचा जाती हैं
गीत
डॉ चन्द्रपाल राजभर (आर्टिस्ट)
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