1
गजल
ऐ चांद
ऐ चाँद से चेहरे वाले, चेहरा छुपाते क्यों हो,
बिछड़े थे पल दो पल के लिए, फिर लौट कर आते क्यों हो।
कभी मेरी हर बात पर तुम मुस्कुराते थे,
अब उसी हंसी से अपने होंठ दबाते क्यों हो।
तुम्हारी आँखों में थी जो मोहब्बत की लौ,
अब उस लौ को तुम आँधियों में बुझाते क्यों हो।
कभी चांदनी रातों में कसमें जो खाई थीं,
अब उन्हीं वादों को भुलाते क्यों हो।
अरे चाँद से चेहरे वाले, चेहरा छुपाते क्यों हो,
मेरे दिल की आवाज़ को अनसुना कर जाते क्यों हो।
तुम्हारे बिना अब ये दुनिया भी वीरान लगे,
फिर इस वीरानी को और बढ़ाते क्यों हो।
जो रिश्ता कभी गुलाब सा महकता था,
अब उस गुलाब की खुशबू मिटाते क्यों हो।
गीत
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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2
चांदनी रात
चांदनी रात में चांद भी शरमा गया,
जैसे आंगन में मेरे कोई प्यार बरसा गया।
खामोशियों में छुपी थी जो एक दास्तां,
उसे चुपके से कोई आज दोहरा गया।
रात की खामोशी में कदम डगमगा गया
दिल की धड़कन को कोई राग सुना गया।
अंधेरों में बसा था जहां वहां उजाला,आ गया
मेरी तनहाइयों में आज नया सबेरा आ गया।
सपनों की दुनिया में कोई गीत सजा गया
फिर से दिल में कोई उम्मीद जगा गया।
टूटते लम्हों में जो चाहत अधूरी थी,
उसे किसी ने आज फिर से सजा गया।
आसमान में तारे भी जैसे झूम उठे,
कोई मेरे ख्वाबों में बहारें लुटा गया।
चांदनी रात में चांद भी शरमा गया,
जैसे आंगन में मेरे कोई प्यार बरसा गया।
गीत
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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3
चांदनी रात थी, हवाएं भी गुनगुना रहीं,
दिल की हर धड़कन कोई नया गीत गा रहीं।
आसमान में चांद भी छुप-छुप के देख रहा,
जैसे कोई मोहब्बत की कहानी सुना रहीं।
चांदनी...
दिल...
नजरें मिलीं तो सारा जहां थम सा गया,
मेरे दिल के वीराने में गुल खिल सा गया।
रात की खामोशी में कोई साया छा सा गया
जैसे मेरी तन्हाई को चुपचाप मिटा सा गया।
चांदनी...
दिल...
बादलों के परे से एक चमक सी आई,
उसके साथ हर एक ख्वाहिश मुस्कुराई।
इस प्यार की बरसात में दिल भीग सा गया,
बादलों में चांद भी शर्म से फिर डूब सा गया।
चांदनी...
दिल...
हवा में घुली थी एक अजीब सी महक,
जैसे किसी की यादों का मीठा था फलक।
चांदनी रात में वो पास आ गया,
जैसे आंगन में मेरे कोई प्यार बरसा गया।
चांदनी...
दिल...
गीत
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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4
गज़ल
चाँद की रौशनी में, अब दिल के राज़ छिपे हैं,
जिनसे मिला था कभी, वो अब बेवफा निकल गए हैं।
सपनों की चादर में, बसी थी जो मधुर बातें,
अब तो हर एक लम्हा वो, सिर्फ ग़म में बिता रहे हैं
चाँद की रातों में, वो ख्वाब अब सजते नहीं हैं,
जो साथ थे कल तक, वो आज तक चलते नहीं हैंं
तारों की चमक में, अब सूनापन छा गया है,
जिसे चाहा दिल से, अब वो साया बेवफा हो गया है
चाँद की चाँदनी में, अब सिर्फ उदासी है,
हर एक मुस्कान में सिर्फ,अब बेवफाई है
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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5
गज़ल
चाँद की सफेदी में, अब धुंधले से राज छिपे हैं,
जिसे चाहा था तन्हा, वो सपने अब बिखर गए हैं।
चाँदनी की गोद में, खोई थी जो हमारी बातें,
अब तो हर रात की सिसकियों में ग़म के साए हैं
तारों की रौशनी में, अब सन्नाटा सा छाया है,
जो कभी थे अपने, अब वो पराए से हो गये हैं
चाँद की मूरत में, अब खामोशी की कस्ती है,
जिसे चाहा दिल से,अब वो बेवफा की बस्ती में है
चाँद की लहरों में, छिपा दर्द अब बयां हो गया,
हर एक मुस्कान में, बेवफाई का ठिकाना हो गया
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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6
गज़ल
चाँद की चाँदनी में, छिपे थे जो राज हमारे,
अब वो यादें भी देखो, सिसकियाँ भरने लगे हैं।
चाँद के संग बीती, वो हसीन रंगीन रातें,
अब तो खामोशी में, दर्द की बातें होने लगी हैं
तारों की चमक में, खो गया है जो अपना,
जिसने छुआ था दिल को, अब जुदा हो गया वो सपना
चाँद की राहों में, अब गम का आलम बसा है
जिसे प्यार किया था, वो अब दूर जा छुपा है
चाँद की हसरतें, अब सन्नाटे में बदल गईं है
हर एक ख्वाब की दुनिया,अब बेवफाई में बदल गई है
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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7
गज़ल
चाँद की रोशनी में, छिपी थी एक हसरत,
जिसे चाहा दिल से, वो अब है एक कसरत।
तारों की महफिल में, बिखरे थे अरमान सब,
अब तो हर एक ख्वाब, बन गया है कर्जदार सब
चाँदनी की रातों में, जो रंगीनी बसी थी,
अब वो हर एक लम्हा, ग़म में ढलने लगी थी
जो थे साथी मेरे, वो अब हो पराए गये
सपनों में बसी यादें, अब वो तन्हाई हो गये
चाँद की चाँदनी में, अब गूंजते हैं सन्नाटे,
जिसे चाहा दिल से, वो अब है बेवफा हो गये
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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8
गज़ल
चाँद की लुकाछुपी में, छिपा है एक राज़ गहरा,
जिसे चाहा दिल से, अब वो हो गया है बहरा
तारों की राहों में, बसी थी मोहब्बत की बातें,
अब तो हर शाम, ग़म की छाया में हैं रातें
चाँदनी की बाहों में, बिखरे थे सपनों के फूल,
अब वो हर रंगीन लम्हा, हो गया है बीराने धूल
जो थे अपने कभी,अब वो बिछड़ने लगे
हर एक तारे की चमक, अब हमें सुनी लगे
चाँद की खामोशी में, छुपी हैं आंसुओं की बातें,
जिसे चाहा दिल से, अब वो बेवफा हो गई रातें
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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