1
गजल
फिर आहिस्ता आलम बदलने लगा है
फिर आहिस्ता-आहिस्ता आलम बदलने लगा है,
आसमा में निकला चांद धीरे-धीरे चलने लगा है
दर्द की वो कहानी अब गुम हो चली है,
हर दिल का रास्ता अब बदलने लगा है।
न ज़ख्म पुराने, न आंसू पुराने रहे,
हर चेहरा यहाँ पर अब मुस्कुराने लगा है।
जो थे बेबस कल तक, आज वो भी खड़े हैं,
हर इरादा अब आसमान छूने लगा है।
जो बीत गया, वो कभी लौटकर नहीं आया,
अब नया रास्ता हर ओर दिखने लगा है।
कोई शिकवा न कोई शिकायत अब रही है,
हर दिल अपने दिल से सुलह करने लगा है।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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2
गजल
फिर साज बजने लगा है
फिर खामोशियों में कोई साज़ बजने लगा है,
दिल का हर एक दर्द अब संवरने लगा है।
बिखरे थे जो लम्हे, वो जुड़ने लगा है
सपनों का फिर से कोई शहर बनने लगा है।
तन्हाई की राहों में भी चिराग जल उठे,
अब अंधेरों से डरना हमें कम लगने लगा है।
कभी थे जो दूर, वो करीब आने लगा है
इक नया सफ़र वो फिर से लिखने लगा है।
आंसू भी अब हंसने का बहाना खोज रहे हैं,
दर्द में भी कोई गीत सजने लगा है।
रुख़सत हो रही है अब पुरानी कहानियाँ,
हर एक वक़्त नया अफसाना बनने लगा है।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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3
गज़ल
फिर दिल में लहरें, उठ-उठ कर चलने लगी हैं,
जिंदगी की राहों में, खुशबू बिखरने लगी है।
जो थे खामोश कभी, आज बोलने लगे हैं,
हर एक आवाज़ में, धड़कनें छनने लगी हैं।
चाहतों की गूंज में, अब सुर मिलने लगे हैं,
हर एक मुस्कान में, नयी रंगत आने लगी है।
जो थम गए थे कल, अब वो चलने लगे हैं,
हर एक कदम में अब, हिम्मत भरने लगी है।
जो बिछड़े थे कभी, आज वो मिलते लगे हैं,
हर एक पल में अब, खुशी झरने लगी है।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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4
गज़ल
फिर सवेरे की किरणें, रोशनी फैलाने लगी हैं,
सपनों की ये राहें, अब नए दिखाने लगी हैं।
जो थे उदास कभी, आज मुस्कुराने लगे हैं,
हर एक दिल में अब, नयी उमंग जगाने लगी हैं।
जो थके थे कल तक, आज वो उठने लगे हैं,
हर एक इरादे में, फिर से जान आने लगी है।
बीते लम्हों की छाया, अब धुंधली होने लगी है,
हर एक ख्वाब में अब, नई तस्वीर सजने लगी है।
कोई ग़म न कोई डर, अब दिलों में नहीं रहा,
हर एक दिल में अब, प्यार का गीत गाने लगी है।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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5
गज़ल
फिर बहारों की खुशबू, हर ओर बिखरने लगी है,
हर आँख में आशा की, नई चमक नजरने लगी है।
जो थे टूटे हुए दिल, अब जोड़ने लगे हैं,
हर एक जज़्बात में, फिर से गहराई आने लगी है।
खामोशियों की दुनिया, अब शोर मचाने लगी है,
हर लम्हा अब सच्चाई, की ओर चलने लगी है।
बीते लम्हों की बातें, अब हंसने लगी हैं,
हर एक चेहरे पर, खुशियों की लकीरें उभरने लगी हैं।
कोई तोहफे की तरह, प्यार अब छिपने लगा है,
हर एक साजिश में अब, सच्चाई दिखने लगी है।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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6
गज़ल
हर सुबह की किरणों में, अब नयी बातें हैं,
जो बिछड़े थे पल में, वो फिर से मिलते हैं।
सपनों का ये सफर, अब रंगीन होने लगा है,
हर एक जज़्बात में, नया जोश भरने लगा है।
जो थे अंधेरों में, अब उजाले की ओर हैं,
हर दिल की सदा में, प्यार का गीत सुनते हैं।
बीते दिनों की यादें, अब हंसकर गुनगुनाती हैं,
हर एक राह में खुशियों, की नई लहरें उठ आती हैं।
कोई बेबसी न अब, दिल में बसी है कोई,
हर एक कोशिश में, उम्मीद की चिंगारी जलती है।
गीत
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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7
गज़ल
हर एक वादा तन्हा, अब यादों में खो गया है,
जिसे चाहा था दिल से, वो बेवफा हो गया है।
दिल के अरमां बिखरे, वो खुशियों के सपने थे,
अब तो हर एक लम्हा, बस तन्हाई में सो गया है।
जो कभी था साथी, अब वो साया भी नहीं रहा,
रिश्तों की वो मिठास, अब कड़वे गम में खो गया है।
हर एक हंसी में छुपा, अब गहरा एक राज है,
बेवफाई की चादर में, हर ख़्वाब अब तो खो गया है।
खुद को फिर से पहचानना, अब खुद से लड़ाई है,
जिसे चाहा था दिल से, वो बेवफा निकल गया है।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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8
गज़ल
तन्हाई की रातों में, यादों का मेला है,
जिसे चाहा दिल से, वो अब बेगाना है, बेगाना है।
नज़रों में ख्वाब थे, दिल में उमंगें भरी थीं,
अब तो हंसी के पीछे, एक दर्द छिपा है, छिपा है।
वो मोहब्बत के वादे, अब झूठे लगने लगे हैं,
हर एक ख्वाब में अब, सिसकियाँ ही गूंजती हैं, गूंजती हैं।
जो थे अपने कभी, अब वो पराये से लगे हैं,
सपनों की उस बगिया में, बस कांटे ही कांटे हैं, कांटे हैं।
दिल के वीराने में, अब सन्नाटा ही सन्नाटा है,
जिसे चाहा था कभी मैं, वो अब बेवफा है बेवफा है
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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