1- ग़ज़ल
आंसुओं में डूबी रात क्यों हो
आसुओं में डूबी हर रात क्यों हो,
दिल की ख़ामोशी में बगावत क्यों हो।
जो ख्वाब चुरा ले गई थी हवा,
फिर उस ख़्वाब की हिफाज़त क्यों हो।
मिट्टी में छुपी थी जो कहानी कभी,
अब उस पर लिखी इबारत क्यों हो।
वो जो बिछड़ गया था, कब का खो गया,
अब उसकी तलाश की आदत क्यों हो।
फिर वही गलियां, वही सूना सफर,
जहाँ दिल को मिली थी राहत क्यों हो।
राहें नई, मंज़िलें भी बदल गईं,
अब पुराने रास्तों से मोहब्बत क्यों हो।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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2
ग़ज़ल
तेरे बिना ये जिंदगी, अधूरी सी लगती है,
दिल की हर धड़कन में, तन्हाई बसी लगती है।
जब से तू दूर हुआ, सन्नाटे ने घेर लिया,
तेरे हंसने की गूंज भी अब तो फीकी लगती है।
आँखों में बसी हैं, यादों की नदियाँ कई,
उनमें तेरा चेहरा, हर लहर में झलकती है।
बिछड़ने की रातों में, खोईं हैं तन्हाइयाँ,
तेरी हंसी की गूंज अब मुझे सताने लगती है।
कितनी बार खुद से मैंने, तुझे भुलाने की कोशिश की,
लेकिन दिल की कोने में, तू हर दम बसने लगती है।
क्या कहूँ, ये दर्द मेरे अल्फाज़ से भी गहरा है,
तेरे बिना हर खुशी, अब तो मायूस सी लगती है।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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3
गज़ल
निगाह में आओगे तो जरूर पूछूंगा
कभी निगाह में आओगे तो जरूर पूछूंगा,
तेरी इस बेवफाई की वजह क्या थी ।
तेरी यादों के साये में गुजरती है रातें,
कितनी तन्हाई है, ये सब मैं जरूर पूछूंगा।
दिल की धड़कन में छिपा है जो दर्द-ए-इश्क़,
जब तुम पास आओगी,तो मैं जरूर पूछूंगा।
बातों की मिठास से जो हुई थी सजा,
उसे फिर से याद करके,मैं जरूर पूछूंगा।
कभी जो हंसते थे,अब वो आंसू बन गए,
उन लम्हों की कहानी का मैं, जरूर पूछूंगा।
तू जो मेरी चाहत की तस्वीर है, यार,
किसी ख्वाब की तरह, मैं जरूर पूछूंगा।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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4
गज़ल
जरूर पूछूंगा
कभी निगाह में आओगे तो जरूर पूछूंगा,
इस बेवफाई की वजह क्या थी, जरूर पूछूंगा।
जब भी तेरा ख्याल आएगा मेरे दिल में,
उस दिल के ख्वाबों में, क्या थी, जरूर पूछूंगा।
तेरी हंसी की खुशबू से महका है हर कोना,
उस खुशबू की कसरत, क्या थी, जरूर पूछूंगा।
किसी राह पर चलते हुए, जब तुम पास आओगी,
साथ बैठकर उन लम्हों की बात, क्या थी, पूछूंगा।
मेरे हर एक अल्फाज़ में बसा है तेरा जिक्र,
उन अल्फाज़ों की मिठास, क्या थी, जरूर पूछूंगा।
जब तुमसे फिर मिलूँगा, दिल की बातें होंगी,
इन दिल की धड़कनों की, वजह क्या थी, जरूर पूछूंगा।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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5
गज़ल:
जब बेवफाई ही करना था,तो प्यार क्यों किया,
इज़हार करके फिर,खामोश क्यों किया
तेरे वादों की कसमें,कितनी हसीन थीं,
उन वादों की तनहाई में,हम सोये क्यों रहे।
तूने जो दिल को तोड़ा,वो एक पल था,
उस पल की यादों में,हम रोते क्यों रहे।
हर एक दर्द को सहकर,मुस्कुराते रहे,
इस दर्द की गहराई में,हम जाते क्यों रहे।
जब तुझसे जुड़ीं यादें,दिल को बेकरार करें
उन यादों की तलाश में,हम खोये क्यों रहें।
अब तुझसे न कोई शिकायत,न कोई आरज़ू,
बस बेवफाई में तेरे,हम बेकरार क्यों रहें।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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6
गज़ल:
जब बेवफाई ही करना था,तो पास क्यों आए,
दिल में उजाले भरने को,अहसास क्यों आए।
छोड़ दिया जब राहों में,तो पास क्यों आये
अगर दिल तोड़ना ही था,तो याद क्यों आए।
जब चाहतों की बातें थीं,तो फरेब क्यों लाए,
दिल में मेरे ख्वाबों को, फिर रास क्यों आए।
तेरी ही जुस्तजू में तो, हमने सब कुछ छोड़ा,
अब दर्द बनके लौटे हो,फिर साथ क्यों आए।
जाने की थी अगर राहें,तो भीड़ क्यों लाए,
जगाया दिल को तुमने फिर,एहसास क्यों आए।
अब यादों के उजालों में,बस तन्हाई है,
खामोशियों में साए का,इतिहास क्यों लाए।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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7
गज़ल:
अरे अभी, तुम बेवफा क्यों हो गई,
प्यार का नाटक हमसे क्यों रचा गई।
दिल की राहों में जो फूल खिलाने थे,
उसमें तन्हाई के कांटे क्यों बिछा गई।
जब वादा किया था,साथ निभाने का
फिर छोड़कर यूँ तन्हा क्यों चला गई।
तेरी बातों में था जो अपनापन कभी
अब ओ अपनापन क्यों झूंठा बना गई
हमने रखा था दिल को तेरे ही लिए,
वो दिल का टुकड़ा तू क्यों चुरा गई।
क्यों हंसकर तुम मेरा,दर्द बड़ा गई
आँखों में आंसू मेरे,क्यों छोड़ गई।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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8
गज़ल:
अभिलाष मन की, क्यों बेवफा हो गई,
हर वादे से फिर जुदा क्यों हो गई।
मेरा दिल था तेरे नाम का आईना,
फिर टूटकर तू खफा क्यों हो गई।
हमने जोड़े थे हर ख्वाब तेरे लिए,
तू उन ख्वाबों से दगा क्यों हो गई।
पलकों पे रखे थे तेरा हर लम्हा,
फिर नज़रों से तू गिरा क्यों हो गई।
जो दिल की बातें थीं बस हमारे बीच,
वो हर बात अब हवा क्यों हो गई।
हँसते थे जो तेरी यादों के साथ,
अब वो यादें सजा क्यों हो गई।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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