वो सपनों में आते हैं और जगाकर चले जाते हैं
(ग़ज़ल)
वो सपनों में आते हैं और जगाकर चले जाते हैं
दिल को धड़कनों से बहलाकर चले जाते हैं।
हर रात में आहट उनकी महसूस होती है
पर हर बार हमें तड़पाकर चले जाते हैं।
सवालों से भरा रहता है दिल का ये आलम
वो नजरों से सबकुछ समझाकर चले जाते हैं।
उनकी खुशबू से महकता है कमरा मेरा
वो हवा की तरह लहराकर चले जाते हैं।
कभी वो ख्वाबों में हॅंसी बिखेर जाते हैं
कभी अश्कों में डुबाकर चले जाते हैं।
वो सपनों में आते हैं और जगाकर चले जाते हैं
जैसे हर बार नया दर्द दे जाते हैं।
ग़ज़ल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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2
ग़ज़ल
वो ख्वाबों में आते हैं
(ग़ज़ल)
वो ख्वाबों में आते हैं और तड़पा कर चले जाते हैं
दिल की गहराई में दर्द जगा कर चले जाते हैं।
हर रात उनकी आहट से आँखें सजती हैं
पर सुबह में वो आँसू बहा कर चले जाते हैं।
उनकी हँसी की गूँज रह जाती है फ़िज़ाओं में
जैसे खुशी के पल उड़ा कर चले जाते हैं।
तन्हाइयों में वो बसेरा बना चुके हैं
मुझे खामोशियों में उलझा कर चले जाते हैं।
वो लौटेंगे ये उम्मीद हर बार छोड़ जाते हैं
पर वादे की रस्म निभा कर चले जाते हैं।
वो ख्वाबों में आते हैं और तड़पा कर चले जाते हैं
जैसे हर साँस को थमा कर चले जाते हैं।
गजल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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3
गजल
वो ख्वाबों में आते हैं और रुला कर चले जाते हैं
दिल की गहराइयों को हिला कर चले जाते हैं।
हर रात उनकी परछाईं नजर आती है
जागती आँखों में वो बस कर चले जाते हैं।
उनके हर लफ़्ज़ में होता है एक अजब सा दर्द
जो वो ख़ामोशी से सुना कर चले जाते हैं।
उम्मीदें उनकी हर बार लौ देती हैं
पर वो मेरी चाहत बुझा कर चले जाते हैं।
दिल चाहता है रोक लूँ हर एक बार उन्हें
मगर वो लम्हे अधूरे बचा कर चले जाते हैं।
वो ख्वाबों में आते हैं और रुला कर चले जाते हैं
जिंदगी में नए ज़ख्म लगा कर चले जाते हैं।
ग़ज़ल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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4
मेरे मन में वो बस कर चले जाते हैं
(ग़ज़ल)
मेरे मन में वो बस कर चले जाते हैं
हर ख़्वाब को अधूरा कर चले जाते हैं।
उनकी यादों का शोर बसा है दिल में
ख़ामोशी में भी आकर चले जाते हैं।
हर बात उनकी दिल पर असर छोड़ जाती
वो कह कर भी कुछ कहे बिना चले जाते हैं।
जिन लम्हों में हम साथ हँसा करते थे
अब उन लम्हों में तन्हा कर चले जाते हैं।
दिल की गहराई में बसते हैं वो यूँ
जैसे दर्द की लौ जला कर चले जाते हैं।
मेरे मन में वो बस कर चले जाते हैं
हर साँस में एक टीस बढ़ा कर चले जाते हैं।
ग़ज़ल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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5
मेरे मन में वो बस कर चले जाते हैं
(ग़ज़ल)
मेरे मन में वो बसकर चले जाते हैं
हर ख़्वाब को अधूरा कर चले जाते हैं।
रातों की चुप में उनकी बातें गूॅंजती हैं
हर इक पल में हमें तड़पा कर चले जाते हैं।
दिल में दबे अरमानों को वो पहचानते हैं
मुस्कान छोड़कर, आँसू बहा कर चले जाते हैं।
चली जाती हैं राहें उनके बिना मंजिल के
वो हर ख़्वाब को चुराकर चले जाते हैं।
कभी जो था साथ, वो दूर हो गया है
साया छोड़कर, हवा बनकर चले जाते हैं।
मेरे मन में वो बसकर चले जाते हैं
ज़िंदगी में कुछ राज़ छोड़कर चले जाते हैं।
ग़ज़ल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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6
नींद में बातें
(ग़ज़ल)
नींद में आकर वह क्यों बातें करती है
सपनों में खोकर मुझे यादें देती है।
वो खामोशियाँ, जो दिल में थीं बसी
रात के सन्नाटे में वो सुनाती है।
आँखों में वो जो एक ग़म था कभी
अब नींद में आकर वह बता जाती है।
जगते हुए कभी न कह सकी जो बात
वह नींद में आकर मुझे समझाती है।
कभी वो हंसी, कभी वो आँसू का दर्द
सपनों में आकर वह बयाँ करती है।
नींद में आकर वह क्यों बातें करती है
मुझे अपने करीब महसूस कराती है।
ग़ज़ल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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7
ग़ज़ल
वह दूर है फिर भी पास रहती है
(ग़ज़ल)
वह दूर है फिर भी पास रहती है
मेरे दिल की धड़कन में हमेशा रहती है।
हर पल उसकी यादों में खो जाता हूँ
वह दूर होकर भी मेरे साथ रहती है।
कभी उसकी हँसी हवा में गूॅंजती है
वह हर पल मेरी रूह में बस रहती है।
वो बातों में छिपा हुआ जो प्यार था
वह दूर होते हुए भी पास रहती है।
जिन राहों पर हम दोनों कभी साथ थे
वह उन राहों पर अब अकेला चलता है
पर वह दूर है फिर भी पास रहती है।
ग़ज़ल
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
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8
वह दूर है फिर भी पास रहती है
(ग़ज़ल)
वह दूर है फिर भी पास रहती है
मेरे ख्वाबों में हमेशा बस रहती है।
ग़मों की रातें उसे याद करती हैं
वह दूर होकर भी पास रहती है।
हर पल उसे दिल में महसूस करता हूॅं
साँसों में बसी वह हमेशा रहती है।
कभी कोई उसकी यादों का गीत हो
वह दूर होकर भी मेरे पास रहती है।
सन्नाटों में उसकी आवाज़ गूॅंजती है
वह खामोश होकर भी पास रहती है।
वह दूर है फिर भी पास रहती है
मेरे दिल की दुनिया में बसी रहती है।
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