1
सूरज सा जलो
जलना है अगर तो सूरज सा जलो
अंधेरों के सीने में हिम्मत सा जलो।
रुको मत कभी ठोकरों से घबराकर
तुम रास्तों में भी इक शोला सा जलो।
मुसीबत की रातें अगर सामने हों
उम्मीदों के बनकर सितारा सा जलो।
न झुको हालातों के तूफान से तुम
इरादों में बनकर चिंगारी सा जलो।
जहाँ लोग बुझाने में लगे हों तुम्हें
वहाँ तुम स्वयं एक उजाला सा जलो।
न हारो कभी वक्त की सख्तियों से
संघर्षों में बनकर नजारा सा जलो।
पहचान बनानी है इस जग में अगर
तुम दीपक नहीं, एक सूरज सा जलो।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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2
लकीरें
हाथों की लकीरों पे भरोसा नहीं करता
मैं मेहनत की स्याही से मुकद्दर लिखता हूँ।
रोकें जो मेरी राह में बनकर अंधेरे
मैं हौसलों की लौ से उजाला लिखता हूँ।
गिरकर भी संभलना मेरी फितरत में है शामिल
मैं ठोकर को ही जीत का अवसर लिखता हूँ।
कहते हैं सभी वक्त बदलता है एक दिन
मैं कर्म से अपना ही ये मंज़र लिखता हूँ।
डरता नहीं हालात की कठोर आँधियों से
मैं हिम्मत से हर दर्द का उत्तर लिखता हूँ।
दुनिया की निगाहों में बनानी है जो पहचान
मैं संघर्ष से जीवन का समंदर लिखता हूँ।
जो आज मुझे देख के हँसते हैं राहों में
मैं कल के लिए अपना ही शिखर लिखता हूँ।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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3 जीत
हार की धूल से उठी जो नई उमंग, वही जीत है
संघर्ष की अग्नि में तपकर जो हुआ स्वर्ण, वही जीत है।
रात ने लाख बाँधना चाहा उजालों के पंख मगर
भोर बनकर जो चमका हर बार, वही जीत है।
काँटों ने रोका बहुत, राह भी वीरान रही
फूल बनकर जो महका हर हाल, वही जीत है।
आँधियों ने बुझाने की कोशिश हजारों की मगर
लौ बनकर जो जलती रही हर रात, वही जीत है।
भाग्य की रेखाओं से नहीं बनता शिखर जीवन का
कर्म से जो गढ़े अपना आकाश, वही जीत है।
भीड़ में खोकर नहीं, जो अलग पहचान बना
अपने साहस से जो बना प्रकाश, वही जीत है।
गिरकर भी जिसने हौसलों का दामन नहीं छोड़ा
अंत में जो मुस्काया लेकर विश्वास, वही जीत है।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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4 मैं जिन्दा हूॅं
आंधियों से कह दो अभी मैं ज़िंदा हूँ
टूटकर भी अपने हौसलों से ज़िंदा हूँ।
रोक नहीं सकती कोई मुश्किल मेरी राह
मैं अपने इरादों का परिंदा हूँ।
ठोकर ने सिखाया है संभलना हर बार
इसलिए गिरकर भी मैं ज़िंदा हूँ।
अंधेरों ने लाख कोशिश की बुझाने की मगर
मैं उम्मीद की लौ बनकर ज़िंदा हूँ।
किस्मत भी झुकेगी मेरे कर्मों के आगे
मैं मेहनत का लिखा हुआ बन्दा हूँ।
दुनिया ने भुलाना चाहा लाख बार मुझे
मैं अपने कर्मों और विश्वास से ज़िंदा हूँ।
हार नहीं मानूँगा ये ठान लिया है दिल ने
जब तक है ये सांस, तब तक मैं ज़िंदा हूँ।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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5 विश्वास
दिल में हौसलों का उजाला रखना है
खुद को हर हाल में संभाले रखना ।
राह में कांटे मिलें तो डरना कैसा
पांव में हिम्मत का छाला बनाये रखना ।
हार आकर भी लौट जाएगी खुद ही
जीत का खुद वादा बनाये रखना।
वक्त बदलेगा ये विश्वास जरूरी है
मन में उम्मीद का प्याला बनाये रखना।
मिट्टी से सीखो उठना गिरकर भी
खुद को हर दर्द में ढाल रखना है।
भीड़ भटकाएगी तुझको हर मोड़ पर
खुद को सच्चाई पर विश्रवास रखना।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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6
मेहनत
जो मेहनतों से जुड़ा है, वही आगे बढ़ेगा
अंधेरों से लड़कर ही उजाला मिलेगा।
गिरा है जो हजार बार, वही संभल सकेगा
संघर्ष की भट्ठी में ही सोना निखरेगा।
न रोको अपने कदम को, ये वक्त ही सिखाएगा
जो चलता रहेगा, वही मंज़िल पाएगा।
निराशा की घटाओं को हटा दें अपने मन से
उम्मीदों का सूरज फिर से निकल आयेगा।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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7 थकान
थकान कितनी भी हो मग़र तुम चलते रहो
मंज़िल पुकारेगी एक दिन, बस चलते रहो।
राहों में धूप मिले या मिले साया कम
विश्वास दिल में जगा कर यूँ ही चलते रहो।
ठोकर से गिर जाओ तो हंसकर उठो फिर से
हिम्मत का हाथ थामे हर दम चलते रहो।
लोगों की बातों का असर दिल पे न लेना
सपनों को आँखों में लिए तुम चलते रहो।
किस्मत भी झुक जाएगी तेरे इरादों पर
मेहनत को अपना बना कर चलते रहो।
मक़ता
नाम रोशन होगा तेरा कर्म की राहों में
सच्चाई को साथ लिए तुम चलते रहो।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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8
हिम्मत
तू अगर हिम्मत करे, पत्थर भी भगवान बन जाएगा
तेरे कर्मों से ही तेरा नया पहचान बन जाएगा।
राह की मुश्किल से घबराना नहीं ऐ मुसाफ़िर
तेरा हर संघर्ष ही मंज़िल का अरमान बन जाएगा।
आज जो तुझको हंसकर देखता है बेबसी में
कल वही तेरी सफलता का गुणगान बन जाएगा।
वक्त की भट्ठी में खुद को तपाना सीख ले तू
तेरा हर आंसू ही चमकता हुआ सम्मान बन जाएगा।
हार को भी सीख की दौलत समझकर साथ रख
यही तजुर्बा एक दिन तेरा अभिमान बन जाएगा।
मक़ता
तू चल निरंतर, न रुकना कभी थककर राह में
तेरा छोटा सा कदम ही बड़ा तूफान बन जाएगा।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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9 पसीना
मैं पसीने से ही अपना मुकद्दर लिखता हूँ
वक्त की हर चोट को पत्थर पे लिखता हूँ।
हार मिलती है तो सीखों का खजाना मिलता
इसलिए हर दर्द को अवसर लिखता हूँ।
राह में कांटे मिले, फिर भी न रुकता हूँ कभी
अपने कदमों से नया मंज़र लिखता हूँ।
लोग कहते हैं कि किस्मत ही सब कुछ देती
मैं तो मेहनत से नया अध्याय लिखता हूँ।
रात अंधेरी ही सही, डर नहीं लगता मुझको
दिल में उम्मीद का मैं सागर लिखता हूँ।
मक़ता
नाम होगा रोशन ये विश्वास है दिल में
हर कदम से नया एक सफर लिखता हूँ।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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10 ठोकरें
ठोकरों को भी मैंने रास्ता कर लिया
हर मुसीबत को हौसलों से हरा कर लिया।
धूप कितनी भी तेज़ थी राहों में मग़र
खुद को उम्मीद की छांव में खड़ा कर लिया।
लोग कहते रहे रुक जा, थक जाएगा तू
मैंने हर डर को अपने से जुदा कर लिया।
हार जब सामने आई मुझे गिराने को
मैंने विश्वास को अपना खुदा बना लिया।
वक्त ने लाख साजिश की मुझे तोड़ने की
मैंने हर घाव को ताकत बना लिया।
मक़ता
नाम रोशन हुआ मेहनत की बदौलत मेरी
मैंने सपनों को अपनी हकीकत में बदल लिया।
डॉ चन्द्रपाल राजभर
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