Saturday, September 13, 2025

गीत डा. चन्द्रपाल राजभर

नज़र से नज़र मिली और कुछ हो गया,
दिल में छुपा दर्द फिर से जगा हो गया।

वो वादे, वो कसमें, सब झूठे लगे,
मोहब्बत के किस्से अधूरे लगे।
जो सोचा था साथी वही बेवफ़ा,
मेरी ज़िंदगी का सफ़र बदल गया।

नज़र से नज़र मिली और कुछ हो गया,
दिल में छुपा दर्द फिर से जगा हो गया।

तेरे बाद दुनिया सुनी-सुनी लगे,
हर राह में जैसे तू खो सा गये।
जुदाई ने छोड़ा है ज़ख्मों का निशां,
मेरा हंसता जहाँ अब तन्हा हो गया।

नज़र से नज़र मिली और कुछ हो गया,
दिल में छुपा दर्द फिर से जगा हो गया।

तेरी याद हर रात जगाती रही,
ख़ामोशी भी मुझसे सवालात करे।
मोहब्बत के बदले मिली बेवफ़ाई,
मेरे सपनों का घर अब ढह-सा गया।

नज़र से नज़र मिली और कुछ हो गया,
दिल में छुपा दर्द फिर से जगा हो गया।
___________
2
नज़र से नज़र मिली, कुछ कुछ होने लगा,
दिल के उजड़े सफ़र में दर्द बोने लगा।

वो मुस्कुराए तो लगा जैसे चाँद खिल गया,
ज़ख़्म पुराने थे मगर फिर हरा हो गया।
क़दम थम गए वहीं, सब कुछ खोने लगा,
नज़र से नज़र मिली, कुछ कुछ होने लगा।

वो जो क़रीब थे, पर किसी और के हो गए,
सपनों के घर मेरे, आँधियों में खो गए।
साँसों में उनके नाम का ज़हर घुलने लगा,
दिल के उजड़े सफ़र में दर्द बोने लगा।

रातें उदास हैं, नींद अब आती नहीं,
यादों की आग है, आँख बुझ पाती नहीं।
हसीन पल बेवफ़ाई में कहीं खोने लगा,
नज़र से नज़र मिली, कुछ कुछ होने लगा

--------------
3
टूटे सपनों की चुभन में जी रहा हूँ मैं,
तेरे बिन हर रोज़ ज़हर पी रहा हूँ मैं।

दिल की हर धड़कन तेरा नाम लेती है,
राहों में तन्हाई ज़हर घोल देती है।
छोड़ के मुझको तू कहाँ जा रही है,
क्यों झूंठी मोहब्बत का ग़म दे रही है।

टूटे सपनों की चुभन में जी रहा हूँ मैं,
तेरे बिन हर रोज़ ज़हर पी रहा हूँ मैं।

तेरी जुदाई ने जलाया है दिल को,
आँखों ने रो-रो के भुलाया है ग़म को।
फिर भी तेरा नाम लब पर है आता,
ज़ख़्मों को छुप-छुप के दिल सहलाता।

टूटे सपनों की चुभन में जी रहा हूँ मैं,
तेरे बिन हर रोज़ ज़हर पी रहा हूँ मैं।

गीत 
डॉक्टर चन्द्रपाल राजभर 
------------------
4
तेरी यादों ने दिल को रुला दिया,
सारे सपनों का शहर जला दिया।
जो कसम खाई थी साथ निभाने की,
उस कसम को भी तूने भुला दिया।

तेरी यादों ने दिल को रुला दिया,
सारे सपनों का शहर जला दिया।

चाँदनी रात में तन्हा खड़ा हूँ मैं,
तेरे बिन आज भी अधूरा पड़ा हूँ मैं।
राह देखता रहा हर घड़ी तेरा,
पर नसीबों से हारकर लड़ा हूँ मैं।

तेरी यादों ने दिल को रुला दिया,
सारे सपनों का शहर जला दिया।

पल-पल तेरी कमी सताती है,
खामोशी में भी आवाज़ आती है।
दिल कहता है तू लौट आए कभी,
पर किस्मत हमें दूरियां दिलाती

तेरी यादों ने दिल को रुला दिया,
सारे सपनों का शहर जला दिया।

रचना 
डॉक्टर चन्द्रपाल राजभर 
________________
5
बेवफाई का दर्द कैसे सही कोई

दिल के ज़ख्म को कैसे छुपाए कोई,
टूटी हुई सांसों को कैसे जुड़वाएं कोई।
बेवफाई का दर्द कैसे सहे कोई,
आंसुओं को बहाकर कैसे जिए कोई।

वो जो कसम खा के गए थे साथ निभाने को ,
छोड़ गए राह में, किसको बताने को।
दिल में अंधेरों का साया लिए कोई,
बेवफाई का दर्द कैसे सहे कोई।

सपनों की चादर जली राख बन गई,
यादों की खुशबू भी आह बन गई।
टूटी उम्मीदों में रोता रहा कोई,
बेवफाई का दर्द कैसे सहे कोई।

गीत 
डाॅ चन्द्रपाल राजभर 
--------------
,6
दिल की किताब में तूने, नया ज़ख़्म लिख दिया,
मेरे अरमानों को जैसे, सरेआम जला दिया।

सपनों की दुनिया टूटकर, खामोश हो गई,
तेरे बिना ज़िंदगी ,अधूरी-सी हो गई।

राहों में तेरे कदमों के, निशाँ ढूँढता रहा,
आँसुओं के दरिया में ,मैं ही डूबता रहा।

वक़्त के हाथों से मेरी, खुशियाँ छिन गईं,
तेरी बेवफाई से मेरी, साँसें सिमट गईं।

चाँदनी रातें अब, अंधेरों में बदल गईं,
धड़कनों की ताल भी,सिसकियों में ढल गईं।

तू गया छोड़कर मगर यादें नहीं गईं,
तेरे बिना ये आँखें कभी सूखी नहीं रहीं।

दिल की किताब में तूने, नया ज़ख़्म लिख दिया,
मेरे अरमानों को जैसे, सरेआम जला दिया।

____________________
7

जिसे अपना समझा, वही गैर निकला,
वफ़ाओं के बदले ,वो ख़ंजर निकला।
तेरी कसमों पे जो ,दिल ने भरोसा किया,
वो रिश्ता भी झूठा, और जुदा निकला।
जिसे अपना समझा, वही गैर निकला,

मेरे आँसुओं से भी ,तुझे प्यार न हुआ,
तेरी मुस्कानों में मेरा ,इकरार न हुआ।
दिल को बेचैन किया, यादों ने सताया,
तेरे जाने के बाद जीना,मेरा जीना न हुआ।
जिसे अपना समझा, वही गैर निकला,

जो कहता था हर पल "सिर्फ़ मेरा रहेगा",
वो किसी और की बाहों में,सुकून खोजेगा।
चले आओ कभी देखो मेरी तन्हाई,
तेरे बिना ये ज़िंदगी , बेअसर रहेगी।
जिसे अपना समझा, वही गैर निकला,
वफ़ाओं के बदले ,वो ख़ंजर निकला।

गीत 
डाॅ.चन्द्रपाल राजभर 

8
------------------

बेवफ़ाई करके वो, मुस्कुरा रहे हैं,
घमण्ड को अपने ,दिखा रहे हैं।
नादान इतना भी, नहीं समझते,
प्यार करके वो, छुपा रहे हैं।

दिल को तोड़ कर ,चैन पा लिये हैं,
आंसुओं से चेहरा को ,छुपा लिये हैं।
हम तड़पते रहे ,उनकी यादों में,
वो बेगानों से रिस्ता, बना लिया हैं।

वो जुदाई को ,जीत मान बैठे हैं 
मेरी चाहत को, रीत मान बैठे हैं।
वो अंधेरों में रोशनी, ढूंढते तो हैं,
मगर खुद को , हार मान बैठे हैं।

हर सितम का बोझ, हम उठा रहे हैं,
टूट कर भी हंसी, दिखा रहे हैं।
सच है कि जालिम बड़े बेख़बर हैं,
प्यार की आग को, जो हवा दे रहे हैं।

गीत 
डाॅ. चन्द्रपाल राजभर 
आर्टिस्ट 
_____________&&
 9
चन्द्रपाल राजभर हैं रंगों के कलाकार,
कैनवास पर बुनते सपनों के संसार।
हर चित्र में दिखाते सच्चे व्यवहार,
भारत का गौरव, युगों के आधार।।
चन्द्रपाल राजभर हैं रंगों के कलाकार,

कभी पेड़ों में हरियाली की गूँज है,
कभी वेदना में जीवन की खोज है।
तूलिका से भरते हैं कृतियों में प्यार,
संदेश बन जाते हैं ऐसे चित्रकार।।
चन्द्रपाल राजभर हैं रंगों के कलाकार,

शब्दों में कविता, सुरों में गीत है,
चित्रों में विज्ञान, विचारों की रीत है।
जन-जन में जगाते उजियारा अपार,
डॉ. राजभर हैं सच्चे संस्कार।।
चन्द्रपाल राजभर हैं रंगों के कलाकार,

________________
10

ग़मों के बादलों में भी, उजाले फिर खिलेंगे,
चले जो हौसले लेकर, वो मंज़िलें फिर मिलेंगे।

ठहर न जा तू राह में, ये मोड़ भी गुजर जाएंगे,
जो जले हैं दीप दिल के, वो शहर भी निखर जाएंगे।
मिटा के ज़ख्म सीने के, नए सपने सिलेंगे,
ग़मों के बादलों में भी, उजाले फिर भी खिलेंगे।

अंतरा 2:
हवाओं ने अगर छीना, तो फूल फिर से खिलेंगे,
कदम जो डगमगाए हैं, वो राह फिर सँभलेंगे।
हर इक अंधेरी रात में, सितारे झिलमिलेंगे,
चले जो हौसले लेकर, वो मंज़िलें भी मिलेंगे।

अंतरा 3:
जहां हो दर्द, वहां भी कुछ रौशनी उतरती है,
उम्मीद की किरन हर बार, नई कहानी करती है।
जो हार मान जाए वो, कहानी से मिटेंगे,
ग़मों के बादलों में भी, उजाले फिर भी खिलेंगे।

अंतिम पंक्तियाँ:
बदलेंगे हालात जब, तू हौसला दिखाएगा,
तूफ़ान भी रुकेंगे जब, तू दीप जलाएगा।
समय के साथ सागर में, किनारे भी मिलेंगे,
चले जो हौसले लेकर, वो मंज़िलें भी मिलेंगे।

----------------*---*
"तेरे जाने के बाद"

तेरे जाने के बाद, दिल ये संभलता नहीं,
तेरी यादों का ज़हर अब निकलता नहीं।
हर तरफ तू ही तू है, मगर तू नहीं,
तेरे जाने के बाद दिल बहलता नहीं।

हमने चाहा तुझे, जैसे खुदा कोई,
पर तू निकला वही, जिसपे भरोसा न कोई।
मेरे अश्कों से तेरी राह सजती रही,
पर तुझे फर्क क्या, दर्द में भी दुआ दी कोई।

तेरी तस्वीर से बातें मैं करता रहा,
हर धड़कन में तेरा नाम भरता रहा।
तू हँसी बाँट के ग़म दे गई ज़िंदगी में,
मैं तो टूटी हुई साँसें गिनता रहा।

तेरे बिना अब कोई रौशनी लगती नहीं,
हर खुशी भी मुझे अब खुशी लगती नहीं।
दिल ने माँगा था बस तेरा साथ ज़रा सा
पर तू ठुकरा गई, वजह लगती नहीं।

तेरे जाने के बाद, दिल ये संभलता नहीं,
तेरी यादों का ज़हर अब निकलता नहीं।
हर तरफ तू ही तू है, मगर तू नहीं,
तेरे जाने के बाद दिल बहलता नहीं।


Friday, August 22, 2025

प्रेरणा गीत डॉ. चद्रपाल राजभर

प्रेरणा गीत 🌟

गिरते हुए तारे भी, उजाला छोड़ जाते हैं,
संघर्षों की राहों में, हीरे गढ़े जाते हैं।

मंज़िल नहीं कठिन है, बस हिम्मत को जगाना है
अंधकार चाहे हो कितना, दिया फिर भी जलाना है।
जो थक कर रुक न जाएँ, वही तो जगमगाते हैं
संघर्षों की राहों में, हीरे गढ़े जाते हैं।

तूफ़ान रुक ही जाए, अगर नाविक अडिग हो जाए
पर्वत भी झुकें आगे, अगर साहस खड़ा हो जाए।
विश्वास जिनके भीतर हो, वही इतिहास बनाते हैं
संघर्षों की राहों में, हीरे गढ़े जाते हैं।

आशा की किरण बनकर, बढ़ो तुम देश में आगे 
सपनों को साकार करो, उठो नव प्रयास से आगे।
जिनके कदम थकते नहीं, वही दुनिया बदलते हैं,
संघर्षों की राहों में, हीरे गढ़े जाते हैं।

गीत 
डाक्टर चन्द्रपाल रजभर

---------------------
2
बदल जाए अगर माली, चमन होता नहीं खाली,
मेहनत से सजे बगिया, तो हर मौसम रहे आली।

आंधी चाहे आये तो, न घबराना तुम साथी,
बीजों में है उजियारा, वही देता है गवाही।
बदल जाए अगर माली, चमन होता नहीं खाली…

पत्थर राह में कितने, कदम को रोक पाएंगे,
जो चलते दृढ़ इरादे, वो मंज़िल छू ही जाएंगे।
पसीने की ही बूँदों से, बनें सपनों की थाली,
बदल जाए अगर माली, चमन होता नहीं खाली…

अंधेरा जब भी छाएगा, उजाला संग आएगा,
हौसला अगर न टूटे तो, समय भी रंग लाएगा।
उठा लो दीप विश्वास का, रहे न रात काली,
बदल जाए अगर माली, चमन होता नहीं खाली…


Thursday, August 21, 2025

उल्टी गतिविधि - डाॅ. चन्द्रपाल राजभर

उल्टी बोली – सीधी समझ" खेल

कैसे खेलें:

1. समूह को दो टीमों में बाँट दीजिए।

2. एक टीम का सदस्य कोई सामान्य वाक्य बोलेगा, लेकिन शब्दों का क्रम उल्टा करके।

जैसे: "मैं पानी पी रहा हूँ।" → "हूँ रहा पी पानी मैं।"

3. दूसरी टीम को इसे सही वाक्य में बदलकर बताना होगा।

4. सही जवाब देने पर अंक मिलेंगे।

5. जो टीम सबसे ज़्यादा वाक्य सही बनाएगी, वही जीतेगी।

मजेदार उदाहरण:

"खा खाना सबने आज" → "आज सबने खाना खा लिया।"

"हूँ रहा नाच मैं" → "मैं नाच रहा हूँ।"

"है प्यारा कितना यह खेल" → "यह खेल कितना प्यारा है।"

 डाक्टर चन्द्रपाल राजभर.

----------------------------------*--------------------
2
गतिविधि 
 "चॉकलेट चैलेंज – जो जीते वही सिकंदर"

दो टीमों का गठन किया जाएगा। प्रत्येक टीम से क्रमवार एक-एक प्रतिभागी को बुलाया जाएगा। प्रतिभागी की आंखों पर पट्टी बांधी जाएगी और उसके हाथ में एक खाली गिलास दिया जाएगा।
बेंच पर एक चॉकलेट रखी जाएगी। प्रतिभागी को निर्देश दिया जाएगा कि वह अपने हाथ से बेंच पर रखी चॉकलेट का स्थान महसूस करते हुए गिलास को सावधानीपूर्वक इस प्रकार रखे कि चॉकलेट पूरी तरह गिलास के अंदर (ढक) जाए।
यदि प्रतिभागी सफलतापूर्वक गिलास से चॉकलेट को ढक देता है, तो वह चॉकलेट उसी की होगी। उसकी सफलता पर सभी प्रतिभागी जोरदार तालियों से उसका उत्साहवर्धन करेंगे।
इसके बाद दूसरी टीम से भी एक प्रतिभागी इसी प्रकार अपनी बारी निभाएगा। दोनों टीमों के सभी प्रतिभागियों को समान अवसर दिया जाएगा। अंत में जिस टीम के सबसे अधिक प्रतिभागी सफल होंगे, उसे विजेता घोषित किया जाएगा और विजेता टीम को "जो जीते वही सिकंदर" की उपाधि प्रदान की जाएगी।
गतिविधि के उद्देश्य:
एकाग्रता एवं ध्यान का विकास।
स्पर्श के आधार पर सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाना।
आत्मविश्वास एवं साहस का विकास।
टीम भावना, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सहयोग की भावना विकसित करना।
मनोरंजन के साथ सीखने का अवसर प्रदान करना।
सावधानियाँ:
बेंच मजबूत एवं स्थिर हो।
गिलास प्लास्टिक का हो ताकि चोट का खतरा न रहे।
प्रतिभागी के पास एक संचालक मौजूद रहे ताकि आवश्यकता पड़ने पर सहायता मिल सके।
सभी प्रतिभागियों को समान समय और समान अवसर दिया जाए।
गतिविधि 
डॉ चन्द्रपाल राजभर 
---------------------------------------------
3
गतिविधि नवाचार
गतिविधि का नाम: चेहरा बनाओ – सही स्थान पर लगाओ
सृजनकर्ता: डॉ. चन्द्रपाल राजभर

1. परिचय
यह एक रोचक, मनोरंजक एवं शिक्षाप्रद गतिविधि है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अवलोकन क्षमता, स्मरण शक्ति, एकाग्रता, तार्किक सोच तथा टीम भावना का विकास करना है। खेल-खेल में सीखने (Learning by Doing) की अवधारणा पर आधारित यह गतिविधि विद्यार्थियों को सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित करती है।
2. शैक्षणिक उद्देश्य
विद्यार्थियों में अवलोकन एवं पहचानने की क्षमता का विकास करना।
चेहरे के अंगों (आंख, कान, नाक एवं होंठ) के सही स्थान की जानकारी देना।
एकाग्रता एवं स्मरण शक्ति का विकास करना।
निर्णय लेने एवं समय प्रबंधन की क्षमता विकसित करना।
स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, सहयोग एवं टीम भावना को बढ़ावा देना।
आत्मविश्वास एवं नेतृत्व क्षमता का विकास करना।
3. आवश्यक सामग्री
चेहरे के आकार का एक बड़ा मास्क (जिसमें केवल सिर/बाल का आकार बना हो)
मास्क पहनने के लिए रिबन या रबर
आंख, कान, नाक एवं होंठ के अलग-अलग कटआउट
मेज
डबल साइड टेप/वेल्क्रो/गोंद
स्टॉपवॉच या टाइमर
4. समय
प्रत्येक प्रतिभागी – 1 से 2 मिनट
कुल गतिविधि – 15 से 20 मिनट (प्रतिभागियों की संख्या के अनुसार)
5. गतिविधि की प्रक्रिया
सभी प्रतिभागियों को दो टीमों में विभाजित किया जाएगा।
प्रत्येक टीम अपना एक कप्तान चुनेगी।
दोनों कप्तानों को मंच पर बुलाया जाएगा।
प्रत्येक कप्तान को रिबन सहित एक मास्क पहनाया जाएगा। मास्क में केवल बाल/सिर का आकार होगा, जबकि आंख, कान, नाक एवं होंठ अलग-अलग कटआउट के रूप में मेज पर रखे होंगे।
संचालक के संकेत मिलते ही दोनों प्रतिभागी निर्धारित समय के भीतर चेहरे के सभी अंगों को उनके सही स्थान पर लगाने का प्रयास करेंगे।
जो प्रतिभागी सबसे पहले और सबसे सही ढंग से सभी अंगों को उचित स्थान पर लगा देगा, उसे विजेता घोषित किया जाएगा।
यदि कोई प्रतिभागी अंगों को सही स्थान पर नहीं लगा पाता है, तो उसे पराजित माना जाएगा।
इसी प्रकार अन्य प्रतिभागियों के साथ भी गतिविधि दोहराई जा सकती है।
6. दर्शकों की भूमिका
गतिविधि के दौरान दोनों टीमें अपने-अपने प्रतिभागी का तालियों एवं सकारात्मक नारों के माध्यम से उत्साहवर्धन करेंगी। इससे प्रतियोगिता में उत्साह, सहभागिता एवं आनंद का वातावरण बनेगा।
7. मूल्यांकन
प्रतिभागियों का मूल्यांकन निम्न आधारों पर किया जाएगा—
सही स्थान पर अंगों का चयन
कार्य पूर्ण करने में लगा समय
सटीकता
आत्मविश्वास
नेतृत्व एवं प्रस्तुति
8. प्रतिफल
चेहरे के अंगों की सही पहचान विकसित होगी।
अवलोकन एवं स्मरण शक्ति में वृद्धि होगी।
एकाग्रता एवं तार्किक सोच का विकास होगा।
टीम भावना एवं नेतृत्व क्षमता का विकास होगा।
विद्यार्थियों में आत्मविश्वास एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होगी।
खेल-खेल में सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी एवं आनंददायक बनेगी।
9. निष्कर्ष
यह गतिविधि सरल, कम लागत वाली, आकर्षक एवं नवाचारी है। इसे विद्यालयों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, बाल मेलों तथा शैक्षिक कार्यशालाओं में आसानी से कराया जा सकता है। यह विद्यार्थियों को मनोरंजन के साथ-साथ अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) का अवसर प्रदान करती है तथा सीखने को अधिक प्रभावी और स्थायी बनाती है।
सृजनकर्ता:
डॉ. चन्द्रपाल राजभर
---*****-----------------------------------------
4
गतिविधि नवाचार
शीर्षक-मार्कर कैप चैलेंज (Marker Cap Challenge)
सृजनकर्ता: डॉ. चन्द्रपाल राजभर

उपयोगी सामग्री
- आंखों पर बांधने के लिए पट्टी – 2
- मार्कर पेन – 1
- मार्कर पेन की टोपी – 1

उद्देश्य
1. विद्यार्थियों में एकाग्रता एवं समन्वय (Coordination) का विकास करना।
2. आपसी सहयोग एवं टीम भावना को बढ़ावा देना।
3. नेतृत्व क्षमता एवं आत्मविश्वास का विकास करना।
4. निर्देशों का पालन करने तथा निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना।
5. मनोरंजन के माध्यम से अनुभवात्मक अधिगम (Learning by Doing) को प्रोत्साहित करना।

गतिविधि का समय
प्रत्येक टीम – लगभग 2 मिनट
कुल गतिविधि – 15–20 मिनट (प्रतिभागियों की संख्या के अनुसार)

गतिविधि की प्रक्रिया
1. सबसे पहले सभी प्रतिभागियों को दो समान टीमों में विभाजित किया जाएगा।
2. प्रत्येक टीम अपना एक कप्तान चुनेगी।
3. प्रत्येक टीम से कप्तान तथा उसका एक सहयोगी मंच पर बुलाया जाएगा।
4. कप्तान के हाथ में एक बिना टोपी वाला मार्कर पेन दिया जाएगा तथा सहयोगी के हाथ में उसी मार्कर की टोपी दी जाएगी।
5. दोनों प्रतिभागियों की आंखों पर पट्टी बांध दी जाएगी ताकि वे कुछ भी देख न सकें।
6. दोनों प्रतिभागियों को लगभग 2 फीट की दूरी पर आमने-सामने खड़ा किया जाएगा।
7. संचालक के संकेत मिलते ही दोनों प्रतिभागी धीरे-धीरे एक-दूसरे की ओर बढ़ेंगे और बिना आंखों से देखे केवल आपसी समन्वय एवं अनुमान के आधार पर मार्कर की टोपी को मार्कर पेन पर लगाने का प्रयास करेंगे।
8. जो टीम निर्धारित समय के भीतर सबसे पहले एवं सही ढंग से मार्कर की टोपी लगा देगी, उसे विजेता घोषित किया जाएगा।
9. यदि कोई टीम निर्धारित समय में टोपी नहीं लगा पाती है, तो उसे पराजित माना जाएगा।

दर्शकों की भूमिका
गतिविधि के दौरान दोनों टीमों के दर्शक तालियों एवं सकारात्मक उत्साहवर्धन के माध्यम से अपनी-अपनी टीम का मनोबल बढ़ाएंगे। इससे प्रतिभागियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा तथा गतिविधि अधिक रोचक एवं प्रेरणादायक बनेगी।

गतिविधि का प्रतिफल
- एकाग्रता एवं ध्यान में वृद्धि होती है।
- हाथों के समन्वय तथा सूक्ष्म मोटर कौशल (Fine Motor Skills) का विकास होता है।
- नेतृत्व एवं सहयोग की भावना विकसित होती है।
- आत्मविश्वास, धैर्य एवं समस्या समाधान की क्षमता में वृद्धि होती है।
- स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एवं खेल भावना का विकास होता है।
- खेल-खेल में सीखने का वातावरण तैयार होता है तथा विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता बढ़ती है।

निष्कर्ष
यह गतिविधि कम लागत, सरल एवं अत्यंत प्रभावी शैक्षणिक नवाचार है। इसे विद्यालयों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं एवं बाल मेलों में सहजता से आयोजित किया जा सकता है। यह विद्यार्थियों में सहयोग, एकाग्रता, समन्वय, नेतृत्व तथा आत्मविश्वास जैसे जीवनोपयोगी कौशलों का विकास करते हुए सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक एवं प्रभावी बनाती है।

सृजनकर्ता
डॉ. चन्द्रपाल राजभर
--*****---------------------------------
5
गतिविधि का नाम : - हँसी रोककर बोलो
सृजन : डॉ. चन्द्रपाल राजभर
उद्देश्य :
प्रतिभागियों के उच्चारण, स्पष्ट वाणी, आत्मविश्वास तथा भाषा कौशल का विकास करते हुए मनोरंजन के माध्यम से सीखने का अवसर प्रदान करना।
आवश्यक सामग्री :
2 चम्मच
2 छोटी गेंदें या 2 नींबू
शैक्षिक शब्दों की सूची
प्रतिभागी :
दो टीमों के एक-एक कप्तान
गतिविधि की विधि :
दोनों टीमों से एक-एक कप्तान को मंच पर बुलाया जाएगा।
प्रत्येक कप्तान अपने मुँह में एक चम्मच पकड़कर उस पर एक छोटी गेंद या नींबू संतुलित रखेगा।
संचालक क्रमशः पाँच शैक्षिक शब्द बोलेगा, जैसे— संविधान, पर्यावरण, गणित, विद्यालय, विज्ञान।
दोनों कप्तानों को चम्मच और गेंद/नींबू गिराए बिना प्रत्येक शब्द का स्पष्ट एवं सही उच्चारण करना होगा।
यदि गेंद/नींबू गिर जाता है, तो प्रतिभागी दोबारा संतुलन बनाकर अगले शब्द का उच्चारण करेगा।
निर्णय का आधार :
शब्दों का स्पष्ट और शुद्ध उच्चारण
चम्मच एवं गेंद/नींबू का संतुलन बनाए रखना
सभी शब्दों को सही ढंग से पूरा करना
विजेता :
जो प्रतिभागी सबसे अधिक शब्दों का स्पष्ट उच्चारण करते हुए संतुलन बनाए रखेगा, उसे विजेता घोषित किया जाएगा।
विशेष आकर्षण :
प्रतिभागियों की मज़ेदार बोलने की शैली और संतुलन बनाए रखने के प्रयास से दर्शक खूब हँसेंगे, वहीं खेल-खेल में उच्चारण एवं भाषा कौशल का भी प्रभावी अभ्यास होगा।
सृजन कर्ता 
डॉ चन्द्रपाल राजभर 
*------********************///
6

गतिविधि का शीर्षक:
"स्पर्श से पहचान – सीख की उड़ान"
गतिविधि का विवरण:
दो टीमों के एक-एक कप्तान को मंच पर बुलाया जाएगा। दोनों की आँखों पर पट्टी बाँध दी जाएगी। एक कप्तान को किसी विशेष शारीरिक मुद्रा (जैसे हाथ ऊपर, एक पैर आगे, दोनों हाथ फैलाकर आदि) में खड़ा कर दिया जाएगा। दूसरा कप्तान स्पर्श (टच) के माध्यम से उस मुद्रा को पहचानने का प्रयास करेगा। पहचानने के बाद वह स्वयं भी उसी मुद्रा में खड़ा होगा। यदि वह सही मुद्रा बना लेता है, तो सभी प्रतिभागी तालियाँ बजाकर उसका उत्साहवर्धन करेंगे।
शैक्षिक उद्देश्य
स्पर्श आधारित अवलोकन एवं संवेदनशीलता का विकास करना।
एकाग्रता, स्मरण शक्ति एवं कल्पनाशक्ति का विकास करना।
आत्मविश्वास, साहस एवं सहभागिता की भावना बढ़ाना।
टीम भावना एवं सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना।
अधिगम प्रतिफल (Learning Outcomes)
प्रतिभागी स्पर्श के आधार पर आकृति/मुद्रा की सही पहचान कर सकेंगे।
प्रतिभागियों में सूक्ष्म अवलोकन एवं त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित होगी।
सहयोग, संचार एवं आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।
खेल-खेल में सीखने के प्रति रुचि विकसित होगी।
समय
8–10 मिनट
शैक्षिक महत्व
अनुभवात्मक (Experiential) एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण को बढ़ावा देता है।
प्रतिभागियों की इंद्रिय-आधारित अधिगम क्षमता को विकसित करता है।
प्रशिक्षण को रोचक, आनंददायक एवं यादगार बनाता है।
हँसी, उत्साह और सहभागिता के माध्यम से सीखने का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

सृजन- डॉक्टर चन्द्रपाल‌ राजभर 

Sunday, August 10, 2025

पर्यावरण पर लेख एवं संक्षिप्त परिचय

🎤 तपती धरती पर संवेदना की हरियाली: डाॅ.चन्द्रपाल राजभर का पर्यावरणीय योगदान
नाम - डॉ.चन्द्रपाल राजभर 
पिता/पति का नाम-: राम अनुज राजभर 
जन्म स्थल-: ग्राम सजमपुर जनपद सुल्तानपुर
जन्मतिथि -:06/07/1990 
राष्ट्रीयता-:भारतीय 
पता 
स्थाई पता -:ग्राम सजमपुर पोस्ट हरपुर थाना अखण्डनगर तहसील कादीपुर जनपद सुलतानपुर उत्तर प्रदेश पिन कोड 22 8172
वर्तमान पता-: प्राथमिक विद्यालय रानीपुर कायस्थ कादीपुर जनपद सुलतानपुर उत्तर प्रदेश पिन कोड 228145 
ई-मेल-:chandrapal6790@gmail.com
मोबाइल नम्बर-:9721764379,7984612205
शिक्षा-: बीटीसी,एम.ए.(चित्रकला)मास्टर आॅफ योगा,मास्टर आॅफ जर्नलिज्म(MJ) डॉक्ट्रेट उपाधि (ड्राइंग पेंटिंग)
पद-
चित्रकारिता /बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक विद्यालय रानीपुर कायस्थ ब्लॉक-कादीपुर में सहायक अध्यापक
कार्यक्षेत्र /विधा-: कला एवं शिक्षा
वर्तमान पद पर सेवा -
राष्ट्रीय अध्यक्ष (कला एंव शिक्षक विंग) क्राइम इन्फार्मेशन ब्यूरो इण्डिया, 
जिला आईटी सेल प्रभारी आॅल टीचर/इम्पलाईज बेलफेयर ऐसोशिऐशन उत्तर प्रदेश
जिलाध्यक्ष क्राइम इन्फार्मेशन ब्यूरो इण्डिया
जिला मीडिया प्रभारी उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ सुल्तानपुर 
लेखक गीतकार- (SWA) स्क्रीन राइटर एसोसिएशन अंधेरी मुंबई
संपादक(पूर्व)नयी दिशा पत्रिका
लेखक- प्रकृति चित्रण पुस्तक आईजी/इण्टरमीडिएट), ग़ज़ल अभिलाषा दर्द-ए-बेवफाई खण्ड-१, ग़ज़ल अभिलाषा दर्द-ए-तन्हाई खण्ड-2, अभिलाषा मोटिवेशनल ग़ज़ल खण्ड-3
सहायक अध्यापक वेसिक शिक्षा विभाग सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश
कवि,लेखक,चित्रकार,पत्रकार, मूर्तिकार ,संगीतकार, सिंगर,शिक्षक,सोसल ऐक्टविष्ट, 
वैज्ञानिकवादी सामाजिक कला चिन्तक
 1. परिचय: जब तपिश ने चेतना जगाई
बढ़ती गर्मी, तेज़ धूप और पर्यावरणीय असंतुलन ने जब मन को विचलित किया, तब मेरे भीतर एक भाव जगा कि अगर आज भी प्रकृति के लिए कुछ नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ केवल ताप, प्रदूषण और सूखे भविष्य की विरासत पाएंगी। मैं डाॅ.चन्द्रपाल राजभर, एक चित्रकार, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता, वर्षों से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य कर रहा हूं। मेरा मानना है कि प्रकृति केवल चित्रों में रंगों का विषय नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। प्रकृति के प्रति मेरा प्रेम केवल कैनवास तक सीमित नहीं रहा, वह पौधों, वृक्षों और हरियाली में भी प्रकट होता है।



 2. वृक्षारोपण की प्रेरणा: तपती धूप से उपजा संकल्प
वृक्षारोपण की प्रेरणा मुझे मार्च की उस दोपहर से मिली जब विद्यालय परिसर में खड़ा होकर मैंने सूरज की तीखी किरणों को सीधे महसूस किया। उस समय मन में एक विचार कौंधा—"अगर आज छांव नहीं बनाई गई, तो कल कोई छांव मिलेगी ही नहीं।" उसी क्षण मैंने ठान लिया कि पर्यावरण को बचाने का सबसे सरल, सस्ता और प्रभावी तरीका यही है कि अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएं। मैंने ढिटर का एक पौधा लगाया, जो आज एक सुंदर, घना वृक्ष बन चुका है और विद्यालय में आने वाले बच्चों को छांव देता है।

 3. अब तक कुल लगाए गए पौधों की संख्या
वर्ष 2007 से लेकर अब तक, मैंने अपने विद्यालय, घर, गाँव और विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर लगभग 1200 से अधिक पौधे लगाए हैं। यह कार्य मेरे लिए कोई कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन का एक जरूरी हिस्सा बन गया है। इन पौधों को लगाना मेरे लिए किसी सामाजिक सेवा से कम नहीं। हर पौधा मेरे लिए एक जीवन के अंकुर के समान है, जो भविष्य को सांसें देगा।

 4. वृक्ष बन चुके पौधों की संख्या
इन लगाए गए पौधों में से अब तक लगभग 402 पौधे पूर्ण रूप से वृक्ष बन चुके हैं। कुछ विद्यालय के बच्चों की देखरेख में, कुछ ग्रामीणों द्वारा संरक्षित किए गए, और कुछ स्वयं मेरी देखरेख में बड़े हुए हैं। ढिटर, नीम, पीपल, आम,अमरूद, सहजन, अर्जुन और आम जैसे पेड़ आज अपनी शाखाओं में न केवल छांव देते हैं, बल्कि पर्यावरण को शुद्ध भी करते हैं। इन वृक्षों ने यह प्रमाणित किया है कि एक व्यक्ति की पहल समाज को बदल सकती है।

5. पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता का कार्य
सिर्फ पेड़ लगाना काफी नहीं होता, लोगों को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार करना ज़रूरी होता है। मैंने बच्चों को प्रकृति की महत्ता समझाने के लिए विशेष कक्षाएं चलाईं। दीवारों पर प्रेरक पर्यावरणीय चित्र बनवाए, स्कूल के हर कार्यक्रम में एक पौधा लगाने की परंपरा शुरू की। साथ ही सामाजिक मंचों, कार्यशालाओं और लेखों के माध्यम से आम जनता को जागरूक करता रहा हूं कि "विकास केवल इमारतें नहीं, हरियाली भी है।" मेरे गीतों, कविताओं और चित्रों में भी पर्यावरणीय संदेश समाहित रहता है।

6. पर्यावरण संरक्षण हेतु सम्मान एवं पहचान
मेरे द्वारा किए गए कार्यों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिली है। मुझे पर्यावरण प्रहरी सम्मान 2020,पर्यावरण प्रहरी सम्मान-2021,अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण योद्धा सम्मान 2022,अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण योद्धा सम्मान- 2023,अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण वॉरियर सम्मान 2024,राष्ट्रीय पर्यावरण एवं बालिका शिक्षा पुरस्कार-2025,इंटरनेशनल एनवायरनमेंट वॉरियर अवार्ड 2025 आदि लगभग 30 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं, जो इस बात के प्रमाण हैं कि अगर कार्य सच्चे मन से किया जाए, तो समाज उसे सराहता भी है।

इन सम्मानों से मुझे व्यक्तिगत संतोष तो मिलता ही है, साथ ही यह जिम्मेदारी भी महसूस होती है कि मैं और अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ूं, ताकि हर गली, हर आंगन, हर विद्यालय एक हरित दिशा में कदम बढ़ा सके।

 "पेड़ लगाइए, पीढ़ियाँ बचाइए"—यही मेरा संदेश है।
— आर्टिस्ट चंद्रपाल राजभर

Thursday, July 31, 2025

एक भारत प्यारा लगे

गीत: एक भारत प्यारा लगे

पर्वत, नदियाँ, खेत हरे हैं
सबके मन में दीप जले हैं।
रंग अनेक, विssचार नयेsss हैं,
दिल में भारत प्रेम पलेsss हैं।
पर्वत......

बोली-बानी लाख रही है
पर मिट्टी की ,खुशबू वही है।
चलो मिलाएँ हाथ सभी से,
देश बने मिसाल सही है।
पर्वत.....

जात-पात की ,छोड़ गुलामी,
भारत को दे, प्रेम निशानी।
भाईचारे का स्वर जब गूंजे,
हर कोना फिर, फूलों से पूंजे।
पर्वत.......

गीत 
चन्द्रपाल राजभर 
--------------------++--
2
गीत: "एक भारत प्यारा है"

नीला अम्बर, हरे नज़ारे,
फूल खिले हर बाग़ किनारे।
हर दिल में है प्रेम हमारा,
सपनों जैसा देश हमारा।

एक भारत प्यारा है,
सबका इसमें सहारा है।

भाषा-भेष भले हों कितने,
मन के दीप जलें हैं अपने।
मिलकर बोलें स्नेह की बोली,
सदियों तक ये बात न भूली।

एक भारत प्यारा है,
सबका इसमें सहारा है।

cp
-------------------
कजरी: “चलो दीप जलाएं 

चलो रे मनवा, कुछ कर दिखाएँ
अंधियारी रातों में,चलो दीपक जलाएँ।
चलो रे मनवा ,कुछ करके दिखायें ।।

हिम्मत की नैया है, साहस की पतवार
छू लेंना अंबर को, कभी पाँव न पसार  
चलो रे मनवा......

रुकना नहीं अब,थकना नहीं है
हर मुश्किल को अब, सुलझाना यहीं है।

चलो रे मनवा , कुछ कर दिखाएँ,
अंधियारी रातों में, चलो दीपक जलाएँ।

चन्द्रपाल राजभर

Sunday, July 27, 2025

तपती धूप ने जब सताया,तब छाया के बीज से एक कलाकार ने धरती को संवेदना का आँचल पहनाया।

तपती धूप ने जब सताया,तब छाया के बीज से एक कलाकार ने धरती को संवेदना का आँचल पहनाया।


तपती हुई दोपहर, जब अप्रैल की धूप मानों धरती को जलानें पर उतारू हो, उस समय कोई यदि छाया का सपना देखे तो वह केवल कल्पना नहीं, संवेदनशीलता की चरम अभिव्यक्ति है। ऐसा ही एक संवेदनशील क्षण था, जब मैंने अपने विद्यालय परिसर में ढिठोर का पौधा रोपा। उस क्षण मेरे मन में बस एक ही बात चल रही थी—यदि आज हम न सोचे, तो आने वाले बच्चे/पीढ़ियाँ तपती धूप में जलते रहेंगे, छाया के लिए तरसते रहेंगे।प्रकृति से मेरा लगाव केवल एक चित्रकार का सौंदर्यबोध भर नहीं है, यह मेरे भीतर की उस पीड़ा की अभिव्यक्ति है, जो हर बार जलती गर्मी में और सूखती नदियों में महसूस होती है। एक कलाकार के रूप में मैंने प्रकृति को न केवल रंगों में उतारा है, बल्कि उसे जिया भी है। हर पेड़ जो मैंने लगाया, वह मेरे चित्र का जीवंत अंश है—कभी वह पत्तियों की सरसराहट में मेरी कविता बनती है, तो कभी उसकी छाया मेरे विचारों की शांति बन जाती है।मनोविज्ञान यह कहता है कि हर संवेदनशील मनुष्य भीतर से प्रकृति से जुड़ा होता है। जब हम किसी फूल को मुरझाता देखते हैं और मन दुखी होता है, तो वह हमारी आत्मा का संकेत होता है कि हम अभी भी इंसान हैं। यह इंसानियत ही तो है, जो हमें पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करती है, बिना किसी शोर, बिना किसी अपेक्षा के। और जब वही संवेदनशीलता मेरे भीतर कलाकार बनकर फूटती है, तो मैं उसे केवल चित्रों में नहीं, पेड़ों की छाया में भी उकेरता हूं।5 जून, जब विश्व पर्यावरण दिवस आता है, तब मैं उसे एक औपचारिकता की तरह नहीं देखता। यह दिन मेरे लिए आत्ममंथन का दिन होता है—क्या मैंने इस वर्ष धरती के लिए कुछ किया? क्या मेरी आत्मा ने प्रकृति को कुछ लौटाया? शायद इसी सोच के चलते मैं केवल विद्यालय परिसर में ही नहीं, बल्कि नगर के विविध स्थलों पर भी पौधे लगाने का निरंतर प्रयास करता हूं।ढिठोर का वह पेड़, जो अब विद्यालय में विद्यार्थियों को छाया दे रहा है, मेरी सोच और चिंता का जीवंत प्रमाण है। बच्चों को जब उस पेड़ के नीचे बैठते देखता हूं, तो मन को सुकून मिलता है कि मैंने उन्हें सिर्फ शिक्षा ही नहीं, जीवन को बचानें की एक दिशा भी दी है। वे अब पेड़ों को किताबों की तरह पढ़ते हैं, उन्हें समझते हैं, और सबसे बड़ी बात—उन्हें अपनाते हैं।मनुष्य जब तक प्रकृति से अलग होकर विकास की बातें करेगा, तब तक विनाश तय है। वनों की कटाई, कंक्रीट की दीवारें, और हवा में घुलते ज़हर ने इस धरती को जर्जर बना दिया है। यह वही धरती है जो कभी पुष्पों से लदी रहती थी, अब धूल से भरी है। जब गर्मी का ताप असहनीय हो गया, तब मैंने जाना कि राहत केवल मशीनों में नहीं, पेड़ों में है। और यह समझ ही मेरे जीवन की प्रेरणा बन गई।शायद यही कारण है कि मेरे प्रयासों को समाज ने पहचाना, और मुझे पर्यावरण योद्धा जैसे सम्मानों से नवाजा गया। लेकिन पुरस्कार मेरे लिए केवल प्रमाण नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का एहसास हैं—कि मुझे और करना है, औरों को भी जोड़ना है।विद्यालय अब केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक बन गया है। बच्चे अब जानते हैं कि किताबों से ज़्यादा जरूरी पेड़ भी हैं। और मैं, एक शिक्षक, एक कलाकार, एक लेखक, एक कवि, एक सिंगर,एक भारत का नागरिक होने के नाते, यह संकल्प लेता हूं कि जब तक सांसें हैं, हर वर्ष कुछ पौधे धरती को अर्पित करता रहूंगा।
क्योंकि एक कलाकार होने के नाते मैं मानता हूं—धरती सबसे सुंदर चित्र है, और हम सब उसके रंग। अगर हमनें यह चित्र बिगाड़ दिया, तो फिर कोई कैनवास नहीं बचेगा।

— आर्टिस्ट चंद्रपाल राजभर