Wednesday, December 11, 2024

कल्पना कीजिए, यदि समाज से अच्छे लोग पूरी तरह हट जाएं, तो शेष समाज का स्वरूप कैसा होगा? आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर का एक चिंतन

                   आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
     
कल्पना कीजिए, यदि समाज से अच्छे लोग पूरी तरह हट जाएं, तो शेष समाज का स्वरूप कैसा होगा? आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर का एक चिंतन

     समाज का स्वरूप किसी भी व्यक्ति, परिवार, या समूह के सामूहिक प्रयासों और मूल्यों का प्रतिबिंब होता है। जब एक समाज में सकारात्मकता, सहयोग, और प्रोत्साहन का माहौल होता है, तब वह समाज विकास और सामूहिक उत्थान की ओर अग्रसर होता है। लेकिन यदि अच्छे लोगों को नीचा दिखाने, बदनाम करने या उनके प्रयासों को हतोत्साहित करने का चलन बढ़ने लगे, तो वह समाज न केवल अपने नैतिक और सांस्कृतिक स्तर को खो देता है, बल्कि दीर्घकालिक रूप से आत्म-विनाश की ओर अग्रसर हो जाता है।

ऐसी परिस्थितियों में, जहां अच्छाई को तिरस्कार और बुराई को महत्व दिया जाए, वहां समाज का संतुलन बिगड़ने लगता है। अच्छे लोग, जिनके प्रयासों से समाज को दिशा मिलती है, यदि निरंतर आलोचना और हतोत्साहन का शिकार हों, तो उनकी ऊर्जा, रचनात्मकता, और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कमजोर पड़ने लगती है। परिणामस्वरूप, समाज में नकारात्मकता का प्रसार तेज हो जाता है, और एक ऐसा वातावरण तैयार होता है जहां स्वार्थ, प्रतिस्पर्धा, और असंतोष मुख्य धारा बन जाते हैं।

मनोविज्ञान की दृष्टि से देखें, तो प्रोत्साहन और सराहना किसी भी व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह एक प्रकार की सकारात्मक ऊर्जा है, जो व्यक्ति को न केवल अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने में मदद करती है, बल्कि उसे अपने कार्य को और अधिक प्रभावी ढंग से करने की प्रेरणा भी देती है। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर एक साधारण लाइक, कमेंट, या प्रशंसा भले ही छोटी प्रतीत हो, लेकिन इसका प्रभाव गहरा होता है। यह संदेश देता है कि किसी का प्रयास न केवल देखा जा रहा है, बल्कि उसकी कद्र भी की जा रही है।

अच्छे लोगों को नीचा दिखाने का प्रयास करने वाले लोग अक्सर अपनी असुरक्षा, ईर्ष्या, और स्वार्थ से प्रेरित होते हैं। वे यह नहीं समझते कि अपने व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के लिए वे समाज की जड़ों को कमजोर कर रहे हैं। ऐसे लोगों का उद्देश्य केवल अपने लाभ के लिए दूसरों को हानि पहुंचाना होता है, और इसके परिणामस्वरूप समाज में विघटन और असंतुलन बढ़ता है।

समाज को इस गिरावट से बचाने के लिए आवश्यक है कि हम अच्छे लोगों की पहचान करें और उनके प्रयासों को खुले दिल से प्रोत्साहित करें। चाहे वह कलाकार हो, शिक्षक हो, लेखक हो, या समाजसेवी—उनके प्रयासों की सराहना करना हमारी जिम्मेदारी है। यह सराहना केवल उनके काम को मान्यता देने का माध्यम नहीं है, बल्कि एक ऐसा तंत्र है जो समाज में सकारात्मकता और रचनात्मकता का प्रसार करता है।

कल्पना कीजिए, यदि समाज से अच्छे लोग पूरी तरह हट जाएं, तो शेष समाज का स्वरूप कैसा होगा? यह एक ऐसा भयावह चित्र होगा जहां कोई मूल्य, कोई दिशा, और कोई प्रेरणा शेष नहीं रहेगी। यह वह स्थिति होगी जहां स्वार्थ, नैतिक पतन, और अराजकता का बोलबाला होगा। इसलिए यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि हम अच्छाई को संरक्षित करें, उसका पोषण करें, और उसे बढ़ावा दें।

प्रोत्साहन न केवल व्यक्तियों को उनकी सीमाओं से परे जाने के लिए प्रेरित करता है, बल्कि समाज को एकजुट और प्रगतिशील बनाता है। इसलिए, हर व्यक्ति का यह कर्तव्य बनता है कि वह अपने शब्दों, कार्यों, और समर्थन के माध्यम से अच्छाई का साथ दे। केवल तभी हम एक ऐसा समाज बना सकते हैं जो न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक प्रेरणा बन सके।

आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर
लेखक-SWA MUMBAI
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Tuesday, December 3, 2024

ग़ज़ल एल्बम 55

1
ग़ज़ल 
सफ़र 
सफ़र था मग़र हमसफ़र खो गया
हर मोड़ पर दिल का सफ़र खो गया।

वो चेहरे जो कभी अपने लगते थे
अब यादों में उनका असर खो गया।

जो बात थी दिल में, अधूरी ही रह गई
लबों से कहने का हुनर खो गया।

हर ख़ुशी को सजाया था चाहत से
पर चाहतों का भी समर खो गया।

तेरी राहों में जो क़दम बढ़ाए थे
अब उन राहों का भी असर खो गया।

दिल को सँभालकर चले थे कहीं
पर रास्ते में ही सब सब्र खो गया।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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2
ग़ज़ल 
वो लम्हा जो मेरा था, गुज़र गया
हर ख़्वाब आँखों से बिखर गया।

कभी चाहतें थीं जो दिल में बसी
वो भी अब सन्नाटे में उतर गया।

कहानी अधूरी, सवालों से भरी
हर जवाब वक़्त से मुकर गया।

दिल ने ढूँढा सुकून हर कोने में
पर हर सुकून दर्द में सिमट गया।

जो ऱिश्ता तेरा और मेरा था कभी
वो अब अजनबीपन में बदल गया।

चलो मान लें, ज़िंदगी का ये सफ़र
बस ख़ुद से ही शुरू, ख़ुद पर ख़त्म हुआ।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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3
ग़ज़ल 
उनकी बेवफ़ाई को मैं क्या नाम दूॅं 
ख़ुदा, तू ही बता उन्हें क्या इनाम दूॅं।

जो ख़्वाब बिखरे हैं मेरी ऑंंखों में
उन ख़्वाबों के संजोने को क्या अंज़ाम दूॅं।

वो चलते गए हर जख़्म छोड़ते हुए
अब दिल की इन दरारों को क्या पैग़ाम दूॅं।

जमाना गूॅंगा-बहरा बना है यहाॅं
ख़ुदा, तू ही बता इन्हें क्या इल्ज़ाम दूॅं।

हर मोड़ पर ख़ामोशियाॅं मिली मुझको
इन ख़ामोशियों को अब मैं क्या नाम दूॅं।

दुआओं से मेरी किस्मत रोशन नहीं
अब उनके लिए दुआ को क्या आयाम दूॅं।

जो दर्द छोड़ा है उनके कदमों ने
उस दर्द को और कितना मैं आराम दूॅं।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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4
ग़ज़ल 

Monday, December 2, 2024

ग़ज़ल एल्बम 54

1
ग़ज़ल 
जो वक्त था
जो वक़्त था, वो फ़िर न लौटेगा कभी
तेरी यादें अब मेरी सौगात हैं सभी।

जिन्हें चाहा था दिल से मैंने कभी
उनसे अब कोई उम्मीद नहीं रही।

हर दर्द अब तो मुस्कान बन चुका है
जो था ग़म, वो अब राहत बन चुका है।

कुछ लम्हे अब आँखों में रुकते नहीं
जो कभी थे, वो अब पास आते नहीं।

जीते जी तो हम सब ने खो दिया
मगर मौत के बाद हम फ़िर से जोड़े गए।

जो था मेरा, वो अब तेरा हो चुका
कभी पास था, अब वो सपना हो चुका।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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2
ग़ज़ल 
वो मिला नहीं 
जो हमें चाहिए था, वो कभी मिला नहीं
इस रास्ते में फ़िर हमें तेरा प्यार मिला नहीं।

तू गया तो दिल का ख़ालीपन बढ़ गया
लेकिन तुझसे बढ़कर अब कोई मिला नहीं।

चाहतें थीं बहुत, मगर हासिल नहीं हुईं
मेरे अरमान में तुझ सा कोई मिला नहीं।

हर रोज़ नए सपने सजाते थे हम
लेकिन उन सपनों में कोई तुमसा मिला नहीं।

तू गया तो खामोशियाँ बनीं रूह का हिस्सा
 दिल में जो दर्द की आवाज़ थी वो कोई सुन नहीं

जो तुझसे बिछड़ा, वो ख़ुद से भी खो गया
अब दिल में वो भी कभी जीता नहीं।
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3
ग़ज़ल 

ख़ुद को ढूँढ़ते-ढूँढ़ते खो गया हूँ मैं
हर उम्मीद को दिल से छोड़ा गया हूँ मैं।

वक़्त की धारा में बहते-बहते
अब तो ख़ुद से ही दूर हो गया हूँ मैं।

जो कभी था दिल में तेरा नाम
अब उसी नाम से डर गया हूँ मैं।

कभी रौशनी थी राहों में अपनी
अब ॲंधेरों में खो गया हूँ मैं।

वो पल, वो लम्हे, जो साथ तूने दिया
अब अकेले सन्नाटों से घिर गया हूँ मैं।

तू था मेरे साथ जब मेरा था अस्तित्व
अब तुझसे दूर, बहुत तन्हा हो गया हूँ मैं।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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4
ग़ज़ल 
दिल के दरिया 
दिल के दरिया में अब किनारा नहीं रहा
उसकी यादों का कोई सहारा नहीं रहा।

सपनों का शहर अब वीरान हो गया
जहाँ बसते थे वो, नज़ारा नहीं रहा।

हर ग़म को सीने में दबा लिया है मैंने
अब किसी दर्द का इज़हार नहीं रहा।

वो लम्हे, जो कभी ख़ुशबू से भरे थे
अब उनमें कोई भी ख़ुमार नहीं रहा।

वक़्त ने हमसे सब कुछ छीन लिया
अब ज़िंदगी में वो निखार नहीं रहा।

जो तुझसे जुड़ा था, सब टूट चुका है
अब रिश्तों का कोई भी पुकार नहीं रहा।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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5
ग़ज़ल 
लम्हों का साथ 
जिन लम्हों ने साथ निभाया था, खो गए
वो ख़्वाब जो आँखों में आए थे, सो गए।

दुनियाॅं के रंग में बदलते रहे सब
हम अपने ही साए में कहीं खो गए।

वो बातों की ख़ुशबू, वो हँसी के पल
जो कभी थे हमारे, कहाँ वो चले गए।

हर दर्द को दिल से लगाया हमने
पर वो घाव भी अब धुँधले हो गए।

वो चेहरा, जो दिल का सुकून था कभी
आज यादों के जाल में बिखर के रह गए।

जो सफ़र शुरू हुआ था तेरे नाम से
उस सफ़र के निशाँ भी अब मिट गए।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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6
ग़ज़ल 
ख़्वाबों का किनारा 
ख़्वाबों का कोई किनारा नहीं मिला
मंज़िल का भी कोई इशारा नहीं मिला।

हर राह में ढूँढा तुझे बार-बार
लेकिन तेरा कोई सहारा नहीं मिला।

दिल की ज़मीन बंजर सी हो गई
फूलों का फ़िर से नज़ारा नहीं मिला।

जो दर्द छुपा था लफ्ज़ों के बीच
उस दर्द का भी गमख़्वारा नहीं मिला।

वो वादे, जो किए थे तुझसे कभी
उनका निभाना गवारा नहीं मिला।

ज़िंदगी ने दिए लाख सबक हमें
पर सुकून का भी खज़ाना नहीं मिला।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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7
ग़ज़ल 
सुनाने की चाह
जो कहा नहीं, वो सुनाने की चाह थी
ख़ामोशी में भी एक तराने की चाह थी।

दिल ने माॅंगी थी बस थोड़ी सी राहत
मग़र हर ग़म को छुपाने की चाह थी।

वो जो अपना था, अब पराया हो गया
फिर भी रिश्ते को निभाने की चाह थी।

सफ़र तो तय हुआ, मग़र तन्हा ही सही
हर मोड़ पर मुस्कुराने की चाह थी।

चाहा था एक रोशनी का सहारा मिले
ॲंधेरों में भी दीप जलाने की चाह थी।

दिल ने टूटकर भी ख़्वाब देखे बहुत
हर ख़्वाब को सजाने की चाह थी।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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8
ग़ज़ल 
हासिल हुआ
जो हासिल हुआ, वो खोने का डर रहा
हर ख़ुशी के पीछे ग़मों का असर रहा।

चाहतें थीं मग़र अधूरी ही रह गईं
हर आरज़ू पे वक़्त का पहरा कसर रहा।

हमने संभाला हर ज़ख्म मुस्कान से
पर दिल के कोने में टीस का घर रहा।

मंज़िलें पास आईं, फिर दूर हो गईं
हर सफ़र में कहीं अकेलापन भर रहा।

वो जो था कभी अपने ख़्वाबों का जहाॅं
अब टूटे ख़्वाबों का एक नगर रहा।

तेरे बग़ैर ज़िंदगी जी तो रहे हैं हम
मग़र हर पल तेरी कमी का असर रहा।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 







गज़ल एलबम 53

1
ग़ज़ल 
राहें कदम
नयी राहों पर क़दम बढ़ाना सीख ले
हर क़दम पर तू नया फ़साना सीख ले।

ये जो दर्द हैं तेरी कहानी के लिए
दर्द में भी मुस्कुराना सीख ले।

हर सफर में आएंगे कुछ मोड़ अजनबी
ख़ुद से ख़ुद को आज़माना सीख ले।

जो मिला नहीं अब तक, मिलेगा यक़ीनन 
दिल में उम्मीदें जगाना सीख ले।

दुनिया के रंग-ढंग हैं बदलते हर घड़ी
हर रंग को अपनाना सीख ले।

ख़ुदा की राहों पर बढ़ा तो पाएगा सुकून
राहते-ए-दिल को पाना सीख ले।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
-----------------------------
2
ग़ज़ल 
झोंका
हर झोंका तुझको सहारा दे सकता है
मग़र तू ख़ुद को किनारा दे सकता है।

हर दर्द का चेहरा बदलता रहता है
तू अपने अश्कों को गवारा दे सकता है।

जो खो गया वो फिर लौटेगा कब
ख़ुद को नई रोशनी का इशारा दे सकता है।

हर शख़्स यहाँ एक मंज़र ढूॅंढ रहा
तू अपने ख़्वाबों को नज़ारा दे सकता है।

जो गिर के संभला, वही राही बना
तू अपनी गिरती चाल को सहारा दे सकता है।

जो टूटे दिल को जोड़ना चाह रहा
तू अपने जज़्बात को सहारा दे सकता है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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3
ग़ज़ल 
गुजरती राहें
गुज़रती राहों से गुज़रना सीख ले
हर ग़म में ख़ुशियों को बिखरना सीख ले।

जो अपने साये से भी डरने लग गया
उसे अकेलेपन में निखरना सीख ले।

जो ठहर गए हैं तूफ़ानों के साथ
उनसे लहरों पर भी ठहरना सीख ले।

ज़माना हर घड़ी आज़माएगा तुझे
तू ख़ुद को हर बार सँभालना सीख ले।

जो दिल में उम्मीद की बात कर गए
उन चिराग़ों से रौशनी भरना सीख ले।

मंज़िलें तुझे पुकारेंगी हर तरफ़
तू अपने क़दमों को टिकाना सीख ले।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
-------------------------
4
ग़ज़ल 
सफ़र 
सफ़र में ख़ुद का सहारा बनाना सीख ले
ग़मों के साये में मुस्कुराना सीख ले।

जो वक्त ठहर गया तुझे रोकने,
उसी वक्त को आज़माना सीख ले।

ये रास्ते तेरे लिए बने ही नहीं,
तू ख़ुद अपना रास्ता बनाना सीख ले।

दुनियाॅं की चाल से तू हारा नहीं,
अपने दिल को जीत जाना सीख ले।

हर एक चोट तुझे सबक दे रही,
उन घावों को अपना बनाना सीख ले।

मुकाम पाना है तो थकना नहीं,
चलते-चलते दर्द छुपाना सीख ले।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
--------------------------------
5
ग़ज़ल 
नया आईना
ख़ुद को नया आईना दिखाना सीख ले
हर ज़ख़्म को अपना फ़साना सीख ले।

तूफ़ान आएं तो डरना नहीं कभी
लहरों से रिश्ता निभाना सीख ले।

हर राह में काॅंटे मिलेंगे बेशुमार
फ़िर भी इन राहों को सजाना सीख ले।

जो बिखर गया है, वो जुड़ सकता है
टूटे हुए दिल को मनाना सीख ले।

दुनिया के रंग रोज़ बदलते रहेंगे
अपने सपनों में रंग भरना सीख ले।

जो हार गया, वही सिखा है बहुत
अपनी हार से जीत पाना सीख ले।
गज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
________________
6
ग़ज़ल 
ज़ख़्मों की कहानी 
जख़्मों को अपने कहानी बनाना सीख ले
हर दर्द को एक निशानी बनाना सीख ले।

ख़ुशबू की चाह में काॅंटे मिलेंगे
उन काॅंटों से भी ज़ुबानी बनाना सीख ले।

दुनियाॅं तुझे हर घड़ी परखेगी
अपने वजूद को ज़वानी बनाना सीख ले।

राहों में छाॅंव भी होगी और धूप भी
हर हाल में मुस्कुराना सीख ले।

जो छूट गया, उसे अब भूल जा
ख़ुद को नई जिंदगानी बनाना सीख ले।

गिर-गिर के फ़िर से उठेगा यक़ीनन 
अपने हौसले को कहानी बनाना सीख
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
-------------------
6
ग़ज़ल 
ॲंधेरों में 
ॲंधेरों में ख़ुद को जलाना सीख ले
हर दर्द को दिल से लगाना सीख ले।

जो रोशनी छीन ले जाए तुझसे
उससे भी चिराग़ बनाना सीख ले।

कदमों में चुभें जो काॅंटे राहों के
उनसे हौसले को सजाना सीख ले।

ग़मों से रिश्ता पुराना होगा तेरा
मगर हर ग़म को भुलाना सीख ले।

जो छूट गए तुझे राह चलते हुए
उन यादों को छोड़ जाना सीख ले।

मंज़िल तो मिलेगी, ये यकीं कर ले
बस ख़ुद को राह दिखाना सीख ले
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
-----------------------
7
ग़ज़ल 
तेरी यादों में 
तेरी यादों में खो जाने से डरता हूँ
ग़मों को फिर से दोहराने से डरता हूँ।

हर क़दम पर अब भी तेरे निशान हैं
उन रेशमी रास्तों से टकराने से डरता हूँ।

जो बेवफ़ा थे कभी मेरे साथ
उनसे फिर से मुस्कुराने से डरता हूँ।

तू आए तो ग़म मिट जाएँगे सब
फिर भी तेरे सामने आने से डरता हूँ।

जो बीत गया, वही राज़ था दिल में
अब उसे फिर से ज़िंदगी में लाने से डरता हूँ।

मुझे छोड़ने के बाद भी तेरे करीब हूँ
इस सच्चाई से फिर भी झूॅंठ बोलने से डरता हूँ।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
------------------------
8
ग़ज़ल 
हर ऑंसू को एक मुस्कान 
हर आँसू को एक मुस्कान में बदलना सीख ले
ग़मों को अपने गीतों में ढलना सीख ले।

जो दिल में है, वो ज़ुबाॅं पर लाना है
हर दर्द को अपनी कहानी में पिरोना सीख ले।

कभी ना कभी तो तू ख़ुद को पाएगा
अपनी खामियों को गले लगाना सीख ले।

जो टूट गया, उसे फिर से जोड़ना है
अपने ज़ख्मों को राहत में बदलना सीख ले।

इस दुनिया से रुखसत होने से पहले
अपनी यादों को अमर बनाना सीख ले।

हर रुकावट को अब तेरा डर नहीं होगा
अपनी राह को फ़िर से चुनना सीख ले।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 



"कलाएं जीवन जीना सिखाते हैं" आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर का चिंतन

"कलाएं जीवन जीना सिखाते हैं" आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर का चिंतन 
कलाएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं होतीं, बल्कि यह जीवन को समझने, उसे बेहतर तरीके से जीने और उसकी गहराई को महसूस करने का माध्यम भी हैं। जब हम किसी कला रूप को अपनाते हैं, तो यह हमारे मनोभावों, संवेदनाओं और विचारों को एक दिशा प्रदान करती है। कला हमें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर देती है, जो हमें मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन प्राप्त करने में मदद करती है।

जीवन की जटिलताओं और संघर्षों के बीच, कलाएं हमें यह समझने में मदद करती हैं कि हर चुनौती, हर कठिनाई एक नए दृष्टिकोण और नए अनुभव का द्वार खोलती है। उदाहरण के लिए, जब एक व्यक्ति अपने भीतर की घुटन और तनाव को शब्दों, रंगों, संगीत या किसी अन्य कला रूप के माध्यम से प्रकट करता है, तो वह अपने भीतर छिपे दर्द से मुक्त हो सकता है। कला का यह रूप मनोवैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली है। इसे ‘कैथार्सिस’ कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति अपनी नकारात्मक ऊर्जा को सृजनात्मक ऊर्जा में बदल देता है।

एक बार एक बच्चे का उदाहरण सामने आया, जो पारिवारिक समस्याओं के कारण अवसाद में था। वह अपने दोस्तों से दूर हो गया था और पढ़ाई में रुचि खो चुका था। आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर ने उसे पेंटिंग के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का सुझाव दिया। शुरू में वह अनमने मन से कागज और रंगों के साथ खेलता था, लेकिन धीरे-धीरे उसने अपनी भावनाओं को कैनवास पर उतारना शुरू किया। कुछ महीनों के भीतर उसने एक ऐसी पेंटिंग बनाई, जिसमें उसकी गहरी भावनाओं की झलक साफ दिख रही थी। इस पेंटिंग ने न केवल उसके आत्मविश्वास को बढ़ाया, बल्कि उसे अपनी एक नई पहचान भी दी। आज वह बच्चा एक सफल कलाकार है।

कला हमें यह सिखाती है कि जीवन में हर रंग का महत्व है। सुख के उजले रंग हों या दुःख के गहरे रंग, हर अनुभव हमें कुछ सिखाने के लिए आता है। कला हमें इन रंगों को स्वीकार करने और अपने जीवन को एक सुंदर कृति में बदलने का माध्यम प्रदान करती है। जीवन में कभी-कभी समस्याएं और चुनौतियां हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं। कला हमें इन क्षणों को सृजन के अवसर में बदलने की प्रेरणा देती है।

कला केवल सृजन का माध्यम नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की एक शैली है। यह हमें सिखाती है कि किसी भी परिस्थिति में संतुलन कैसे बनाए रखें। कला हमें अपनी कमजोरियों को स्वीकारने और उन्हें अपनी ताकत में बदलने का रास्ता दिखाती है। यह हमें सृजन के प्रति प्रेरित करती है, सहानुभूति विकसित करती है, और जीवन के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है।

इस प्रकार, कला का उद्देश्य केवल सौंदर्य का सृजन नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन को समझने और उसकी जटिलताओं का सामना करने की ताकत भी देती है। कलाओं के माध्यम से हम यह सीखते हैं कि जीवन को केवल जिया नहीं जाता, बल्कि उसे सृजनात्मकता, संवेदनशीलता और सौंदर्य से जीना चाहिए। यही कला का असली सार है, और यही इसे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बनाता है।
आर्टिस्ट चंद्रपाल राजभर 
लेखक-SWA MUMBAI