Tuesday, December 3, 2024

ग़ज़ल एल्बम 55

1
ग़ज़ल 
सफ़र 
सफ़र था मग़र हमसफ़र खो गया
हर मोड़ पर दिल का सफ़र खो गया।

वो चेहरे जो कभी अपने लगते थे
अब यादों में उनका असर खो गया।

जो बात थी दिल में, अधूरी ही रह गई
लबों से कहने का हुनर खो गया।

हर ख़ुशी को सजाया था चाहत से
पर चाहतों का भी समर खो गया।

तेरी राहों में जो क़दम बढ़ाए थे
अब उन राहों का भी असर खो गया।

दिल को सँभालकर चले थे कहीं
पर रास्ते में ही सब सब्र खो गया।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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2
ग़ज़ल 
वो लम्हा जो मेरा था, गुज़र गया
हर ख़्वाब आँखों से बिखर गया।

कभी चाहतें थीं जो दिल में बसी
वो भी अब सन्नाटे में उतर गया।

कहानी अधूरी, सवालों से भरी
हर जवाब वक़्त से मुकर गया।

दिल ने ढूँढा सुकून हर कोने में
पर हर सुकून दर्द में सिमट गया।

जो ऱिश्ता तेरा और मेरा था कभी
वो अब अजनबीपन में बदल गया।

चलो मान लें, ज़िंदगी का ये सफ़र
बस ख़ुद से ही शुरू, ख़ुद पर ख़त्म हुआ।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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3
ग़ज़ल 
उनकी बेवफ़ाई को मैं क्या नाम दूॅं 
ख़ुदा, तू ही बता उन्हें क्या इनाम दूॅं।

जो ख़्वाब बिखरे हैं मेरी ऑंंखों में
उन ख़्वाबों के संजोने को क्या अंज़ाम दूॅं।

वो चलते गए हर जख़्म छोड़ते हुए
अब दिल की इन दरारों को क्या पैग़ाम दूॅं।

जमाना गूॅंगा-बहरा बना है यहाॅं
ख़ुदा, तू ही बता इन्हें क्या इल्ज़ाम दूॅं।

हर मोड़ पर ख़ामोशियाॅं मिली मुझको
इन ख़ामोशियों को अब मैं क्या नाम दूॅं।

दुआओं से मेरी किस्मत रोशन नहीं
अब उनके लिए दुआ को क्या आयाम दूॅं।

जो दर्द छोड़ा है उनके कदमों ने
उस दर्द को और कितना मैं आराम दूॅं।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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4
ग़ज़ल 

Monday, December 2, 2024

ग़ज़ल एल्बम 54

1
ग़ज़ल 
जो वक्त था
जो वक़्त था, वो फ़िर न लौटेगा कभी
तेरी यादें अब मेरी सौगात हैं सभी।

जिन्हें चाहा था दिल से मैंने कभी
उनसे अब कोई उम्मीद नहीं रही।

हर दर्द अब तो मुस्कान बन चुका है
जो था ग़म, वो अब राहत बन चुका है।

कुछ लम्हे अब आँखों में रुकते नहीं
जो कभी थे, वो अब पास आते नहीं।

जीते जी तो हम सब ने खो दिया
मगर मौत के बाद हम फ़िर से जोड़े गए।

जो था मेरा, वो अब तेरा हो चुका
कभी पास था, अब वो सपना हो चुका।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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2
ग़ज़ल 
वो मिला नहीं 
जो हमें चाहिए था, वो कभी मिला नहीं
इस रास्ते में फ़िर हमें तेरा प्यार मिला नहीं।

तू गया तो दिल का ख़ालीपन बढ़ गया
लेकिन तुझसे बढ़कर अब कोई मिला नहीं।

चाहतें थीं बहुत, मगर हासिल नहीं हुईं
मेरे अरमान में तुझ सा कोई मिला नहीं।

हर रोज़ नए सपने सजाते थे हम
लेकिन उन सपनों में कोई तुमसा मिला नहीं।

तू गया तो खामोशियाँ बनीं रूह का हिस्सा
 दिल में जो दर्द की आवाज़ थी वो कोई सुन नहीं

जो तुझसे बिछड़ा, वो ख़ुद से भी खो गया
अब दिल में वो भी कभी जीता नहीं।
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3
ग़ज़ल 

ख़ुद को ढूँढ़ते-ढूँढ़ते खो गया हूँ मैं
हर उम्मीद को दिल से छोड़ा गया हूँ मैं।

वक़्त की धारा में बहते-बहते
अब तो ख़ुद से ही दूर हो गया हूँ मैं।

जो कभी था दिल में तेरा नाम
अब उसी नाम से डर गया हूँ मैं।

कभी रौशनी थी राहों में अपनी
अब ॲंधेरों में खो गया हूँ मैं।

वो पल, वो लम्हे, जो साथ तूने दिया
अब अकेले सन्नाटों से घिर गया हूँ मैं।

तू था मेरे साथ जब मेरा था अस्तित्व
अब तुझसे दूर, बहुत तन्हा हो गया हूँ मैं।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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4
ग़ज़ल 
दिल के दरिया 
दिल के दरिया में अब किनारा नहीं रहा
उसकी यादों का कोई सहारा नहीं रहा।

सपनों का शहर अब वीरान हो गया
जहाँ बसते थे वो, नज़ारा नहीं रहा।

हर ग़म को सीने में दबा लिया है मैंने
अब किसी दर्द का इज़हार नहीं रहा।

वो लम्हे, जो कभी ख़ुशबू से भरे थे
अब उनमें कोई भी ख़ुमार नहीं रहा।

वक़्त ने हमसे सब कुछ छीन लिया
अब ज़िंदगी में वो निखार नहीं रहा।

जो तुझसे जुड़ा था, सब टूट चुका है
अब रिश्तों का कोई भी पुकार नहीं रहा।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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5
ग़ज़ल 
लम्हों का साथ 
जिन लम्हों ने साथ निभाया था, खो गए
वो ख़्वाब जो आँखों में आए थे, सो गए।

दुनियाॅं के रंग में बदलते रहे सब
हम अपने ही साए में कहीं खो गए।

वो बातों की ख़ुशबू, वो हँसी के पल
जो कभी थे हमारे, कहाँ वो चले गए।

हर दर्द को दिल से लगाया हमने
पर वो घाव भी अब धुँधले हो गए।

वो चेहरा, जो दिल का सुकून था कभी
आज यादों के जाल में बिखर के रह गए।

जो सफ़र शुरू हुआ था तेरे नाम से
उस सफ़र के निशाँ भी अब मिट गए।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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6
ग़ज़ल 
ख़्वाबों का किनारा 
ख़्वाबों का कोई किनारा नहीं मिला
मंज़िल का भी कोई इशारा नहीं मिला।

हर राह में ढूँढा तुझे बार-बार
लेकिन तेरा कोई सहारा नहीं मिला।

दिल की ज़मीन बंजर सी हो गई
फूलों का फ़िर से नज़ारा नहीं मिला।

जो दर्द छुपा था लफ्ज़ों के बीच
उस दर्द का भी गमख़्वारा नहीं मिला।

वो वादे, जो किए थे तुझसे कभी
उनका निभाना गवारा नहीं मिला।

ज़िंदगी ने दिए लाख सबक हमें
पर सुकून का भी खज़ाना नहीं मिला।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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7
ग़ज़ल 
सुनाने की चाह
जो कहा नहीं, वो सुनाने की चाह थी
ख़ामोशी में भी एक तराने की चाह थी।

दिल ने माॅंगी थी बस थोड़ी सी राहत
मग़र हर ग़म को छुपाने की चाह थी।

वो जो अपना था, अब पराया हो गया
फिर भी रिश्ते को निभाने की चाह थी।

सफ़र तो तय हुआ, मग़र तन्हा ही सही
हर मोड़ पर मुस्कुराने की चाह थी।

चाहा था एक रोशनी का सहारा मिले
ॲंधेरों में भी दीप जलाने की चाह थी।

दिल ने टूटकर भी ख़्वाब देखे बहुत
हर ख़्वाब को सजाने की चाह थी।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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8
ग़ज़ल 
हासिल हुआ
जो हासिल हुआ, वो खोने का डर रहा
हर ख़ुशी के पीछे ग़मों का असर रहा।

चाहतें थीं मग़र अधूरी ही रह गईं
हर आरज़ू पे वक़्त का पहरा कसर रहा।

हमने संभाला हर ज़ख्म मुस्कान से
पर दिल के कोने में टीस का घर रहा।

मंज़िलें पास आईं, फिर दूर हो गईं
हर सफ़र में कहीं अकेलापन भर रहा।

वो जो था कभी अपने ख़्वाबों का जहाॅं
अब टूटे ख़्वाबों का एक नगर रहा।

तेरे बग़ैर ज़िंदगी जी तो रहे हैं हम
मग़र हर पल तेरी कमी का असर रहा।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 







गज़ल एलबम 53

1
ग़ज़ल 
राहें कदम
नयी राहों पर क़दम बढ़ाना सीख ले
हर क़दम पर तू नया फ़साना सीख ले।

ये जो दर्द हैं तेरी कहानी के लिए
दर्द में भी मुस्कुराना सीख ले।

हर सफर में आएंगे कुछ मोड़ अजनबी
ख़ुद से ख़ुद को आज़माना सीख ले।

जो मिला नहीं अब तक, मिलेगा यक़ीनन 
दिल में उम्मीदें जगाना सीख ले।

दुनिया के रंग-ढंग हैं बदलते हर घड़ी
हर रंग को अपनाना सीख ले।

ख़ुदा की राहों पर बढ़ा तो पाएगा सुकून
राहते-ए-दिल को पाना सीख ले।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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2
ग़ज़ल 
झोंका
हर झोंका तुझको सहारा दे सकता है
मग़र तू ख़ुद को किनारा दे सकता है।

हर दर्द का चेहरा बदलता रहता है
तू अपने अश्कों को गवारा दे सकता है।

जो खो गया वो फिर लौटेगा कब
ख़ुद को नई रोशनी का इशारा दे सकता है।

हर शख़्स यहाँ एक मंज़र ढूॅंढ रहा
तू अपने ख़्वाबों को नज़ारा दे सकता है।

जो गिर के संभला, वही राही बना
तू अपनी गिरती चाल को सहारा दे सकता है।

जो टूटे दिल को जोड़ना चाह रहा
तू अपने जज़्बात को सहारा दे सकता है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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3
ग़ज़ल 
गुजरती राहें
गुज़रती राहों से गुज़रना सीख ले
हर ग़म में ख़ुशियों को बिखरना सीख ले।

जो अपने साये से भी डरने लग गया
उसे अकेलेपन में निखरना सीख ले।

जो ठहर गए हैं तूफ़ानों के साथ
उनसे लहरों पर भी ठहरना सीख ले।

ज़माना हर घड़ी आज़माएगा तुझे
तू ख़ुद को हर बार सँभालना सीख ले।

जो दिल में उम्मीद की बात कर गए
उन चिराग़ों से रौशनी भरना सीख ले।

मंज़िलें तुझे पुकारेंगी हर तरफ़
तू अपने क़दमों को टिकाना सीख ले।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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4
ग़ज़ल 
सफ़र 
सफ़र में ख़ुद का सहारा बनाना सीख ले
ग़मों के साये में मुस्कुराना सीख ले।

जो वक्त ठहर गया तुझे रोकने,
उसी वक्त को आज़माना सीख ले।

ये रास्ते तेरे लिए बने ही नहीं,
तू ख़ुद अपना रास्ता बनाना सीख ले।

दुनियाॅं की चाल से तू हारा नहीं,
अपने दिल को जीत जाना सीख ले।

हर एक चोट तुझे सबक दे रही,
उन घावों को अपना बनाना सीख ले।

मुकाम पाना है तो थकना नहीं,
चलते-चलते दर्द छुपाना सीख ले।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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5
ग़ज़ल 
नया आईना
ख़ुद को नया आईना दिखाना सीख ले
हर ज़ख़्म को अपना फ़साना सीख ले।

तूफ़ान आएं तो डरना नहीं कभी
लहरों से रिश्ता निभाना सीख ले।

हर राह में काॅंटे मिलेंगे बेशुमार
फ़िर भी इन राहों को सजाना सीख ले।

जो बिखर गया है, वो जुड़ सकता है
टूटे हुए दिल को मनाना सीख ले।

दुनिया के रंग रोज़ बदलते रहेंगे
अपने सपनों में रंग भरना सीख ले।

जो हार गया, वही सिखा है बहुत
अपनी हार से जीत पाना सीख ले।
गज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
________________
6
ग़ज़ल 
ज़ख़्मों की कहानी 
जख़्मों को अपने कहानी बनाना सीख ले
हर दर्द को एक निशानी बनाना सीख ले।

ख़ुशबू की चाह में काॅंटे मिलेंगे
उन काॅंटों से भी ज़ुबानी बनाना सीख ले।

दुनियाॅं तुझे हर घड़ी परखेगी
अपने वजूद को ज़वानी बनाना सीख ले।

राहों में छाॅंव भी होगी और धूप भी
हर हाल में मुस्कुराना सीख ले।

जो छूट गया, उसे अब भूल जा
ख़ुद को नई जिंदगानी बनाना सीख ले।

गिर-गिर के फ़िर से उठेगा यक़ीनन 
अपने हौसले को कहानी बनाना सीख
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
-------------------
6
ग़ज़ल 
ॲंधेरों में 
ॲंधेरों में ख़ुद को जलाना सीख ले
हर दर्द को दिल से लगाना सीख ले।

जो रोशनी छीन ले जाए तुझसे
उससे भी चिराग़ बनाना सीख ले।

कदमों में चुभें जो काॅंटे राहों के
उनसे हौसले को सजाना सीख ले।

ग़मों से रिश्ता पुराना होगा तेरा
मगर हर ग़म को भुलाना सीख ले।

जो छूट गए तुझे राह चलते हुए
उन यादों को छोड़ जाना सीख ले।

मंज़िल तो मिलेगी, ये यकीं कर ले
बस ख़ुद को राह दिखाना सीख ले
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
-----------------------
7
ग़ज़ल 
तेरी यादों में 
तेरी यादों में खो जाने से डरता हूँ
ग़मों को फिर से दोहराने से डरता हूँ।

हर क़दम पर अब भी तेरे निशान हैं
उन रेशमी रास्तों से टकराने से डरता हूँ।

जो बेवफ़ा थे कभी मेरे साथ
उनसे फिर से मुस्कुराने से डरता हूँ।

तू आए तो ग़म मिट जाएँगे सब
फिर भी तेरे सामने आने से डरता हूँ।

जो बीत गया, वही राज़ था दिल में
अब उसे फिर से ज़िंदगी में लाने से डरता हूँ।

मुझे छोड़ने के बाद भी तेरे करीब हूँ
इस सच्चाई से फिर भी झूॅंठ बोलने से डरता हूँ।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
------------------------
8
ग़ज़ल 
हर ऑंसू को एक मुस्कान 
हर आँसू को एक मुस्कान में बदलना सीख ले
ग़मों को अपने गीतों में ढलना सीख ले।

जो दिल में है, वो ज़ुबाॅं पर लाना है
हर दर्द को अपनी कहानी में पिरोना सीख ले।

कभी ना कभी तो तू ख़ुद को पाएगा
अपनी खामियों को गले लगाना सीख ले।

जो टूट गया, उसे फिर से जोड़ना है
अपने ज़ख्मों को राहत में बदलना सीख ले।

इस दुनिया से रुखसत होने से पहले
अपनी यादों को अमर बनाना सीख ले।

हर रुकावट को अब तेरा डर नहीं होगा
अपनी राह को फ़िर से चुनना सीख ले।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 



"कलाएं जीवन जीना सिखाते हैं" आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर का चिंतन

"कलाएं जीवन जीना सिखाते हैं" आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर का चिंतन 
कलाएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं होतीं, बल्कि यह जीवन को समझने, उसे बेहतर तरीके से जीने और उसकी गहराई को महसूस करने का माध्यम भी हैं। जब हम किसी कला रूप को अपनाते हैं, तो यह हमारे मनोभावों, संवेदनाओं और विचारों को एक दिशा प्रदान करती है। कला हमें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर देती है, जो हमें मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन प्राप्त करने में मदद करती है।

जीवन की जटिलताओं और संघर्षों के बीच, कलाएं हमें यह समझने में मदद करती हैं कि हर चुनौती, हर कठिनाई एक नए दृष्टिकोण और नए अनुभव का द्वार खोलती है। उदाहरण के लिए, जब एक व्यक्ति अपने भीतर की घुटन और तनाव को शब्दों, रंगों, संगीत या किसी अन्य कला रूप के माध्यम से प्रकट करता है, तो वह अपने भीतर छिपे दर्द से मुक्त हो सकता है। कला का यह रूप मनोवैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली है। इसे ‘कैथार्सिस’ कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति अपनी नकारात्मक ऊर्जा को सृजनात्मक ऊर्जा में बदल देता है।

एक बार एक बच्चे का उदाहरण सामने आया, जो पारिवारिक समस्याओं के कारण अवसाद में था। वह अपने दोस्तों से दूर हो गया था और पढ़ाई में रुचि खो चुका था। आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर ने उसे पेंटिंग के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का सुझाव दिया। शुरू में वह अनमने मन से कागज और रंगों के साथ खेलता था, लेकिन धीरे-धीरे उसने अपनी भावनाओं को कैनवास पर उतारना शुरू किया। कुछ महीनों के भीतर उसने एक ऐसी पेंटिंग बनाई, जिसमें उसकी गहरी भावनाओं की झलक साफ दिख रही थी। इस पेंटिंग ने न केवल उसके आत्मविश्वास को बढ़ाया, बल्कि उसे अपनी एक नई पहचान भी दी। आज वह बच्चा एक सफल कलाकार है।

कला हमें यह सिखाती है कि जीवन में हर रंग का महत्व है। सुख के उजले रंग हों या दुःख के गहरे रंग, हर अनुभव हमें कुछ सिखाने के लिए आता है। कला हमें इन रंगों को स्वीकार करने और अपने जीवन को एक सुंदर कृति में बदलने का माध्यम प्रदान करती है। जीवन में कभी-कभी समस्याएं और चुनौतियां हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं। कला हमें इन क्षणों को सृजन के अवसर में बदलने की प्रेरणा देती है।

कला केवल सृजन का माध्यम नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की एक शैली है। यह हमें सिखाती है कि किसी भी परिस्थिति में संतुलन कैसे बनाए रखें। कला हमें अपनी कमजोरियों को स्वीकारने और उन्हें अपनी ताकत में बदलने का रास्ता दिखाती है। यह हमें सृजन के प्रति प्रेरित करती है, सहानुभूति विकसित करती है, और जीवन के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है।

इस प्रकार, कला का उद्देश्य केवल सौंदर्य का सृजन नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन को समझने और उसकी जटिलताओं का सामना करने की ताकत भी देती है। कलाओं के माध्यम से हम यह सीखते हैं कि जीवन को केवल जिया नहीं जाता, बल्कि उसे सृजनात्मकता, संवेदनशीलता और सौंदर्य से जीना चाहिए। यही कला का असली सार है, और यही इसे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बनाता है।
आर्टिस्ट चंद्रपाल राजभर 
लेखक-SWA MUMBAI 

Saturday, November 30, 2024

किसी भी विभाग में समस्याएं तब ज्यादा बढ़ जाती हैं जब लोग अपना काम छोड़कर दूसरे का काम करने लगते हैं आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर का एक चिंतन

                   आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 

किसी भी विभाग में समस्याएं तब ज्यादा बढ़ जाती हैं जब लोग अपना काम छोड़कर दूसरे का काम करने लगते हैं आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर का एक चिंतन 

जब किसी भी विभाग में लोग अपने निर्धारित कार्यों को छोड़कर दूसरों के कार्यों में हस्तक्षेप करने लगते हैं, तब न केवल उस विभाग की कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, बल्कि विभागीय अनुशासन भी भंग हो जाता है। यह समस्या संस्थागत असंतुलन का कारण बनती है, जो व्यक्तिगत स्वार्थ, अयोग्यता और अव्यवस्थित कार्यप्रणाली की जड़ है। इस विचार को समझने के लिए हमें विभागीय व्यवस्था, व्यक्तित्व टकराव और प्रशासनिक क्षमताओं की व्यापक पड़ताल करनी होगी।

विभागीय कार्यप्रणाली में प्रत्येक व्यक्ति को एक विशिष्ट दायित्व सौंपा जाता है। या यूं समझ लीजिए कि उनकी नियुक्ति ही कुछ विशेष कार्यों के लिए ही होती है जब व्यक्ति अपने दायित्व को दरकिनार करके अन्य कार्यों में रुचि लेने लगता है, तो उसका मूल कार्य उपेक्षित हो जाता है। उदाहरण के रूप में, यदि एक शिक्षक अपनी शिक्षण गतिविधियों को छोड़कर प्रशासनिक कार्यों में उलझ जाता है, तो कक्षाओं का समय प्रभावित होता है, जिससे छात्रों की शिक्षा बाधित होती है। इसी प्रकार, किसी कार्यालय में क्लर्क का ध्यान दस्तावेज़ीकरण के बजाय नीतिगत निर्णयों पर केंद्रित हो जाए, तो नीतिगत निर्णय तो अधूरे रहेंगे ही, साथ ही फाइलों का प्रबंधन भी अव्यवस्थित हो जाएगा।

एक उदाहरण के रूप में, उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में यह देखा गया है कि शिक्षक, जो मुख्यतः छात्रों को पढ़ाने के लिए नियुक्त किए गए हैं, अक्सर मिड-डे मील योजना, डाटा फीडिंग, हाउसहोल्ड सर्वे, बीएलओ ड्यूटी, चुनाव ड्यूटी, मतदान प्रक्रिया में ड्यूटी, जनगणना कार्य में भागीदारी, पल्स पोलियो अभियान का संचालन और जागरूकता, मिड-डे मील योजना का प्रबंधन और रिपोर्टिंग, टीकाकरण अभियान में सहयोग, आधार कार्ड पंजीकरण और डेटा संग्रहण, स्वास्थ्य विभाग के लिए सर्वेक्षण, विद्यालय भवन की मरम्मत और निर्माण कार्य की निगरानी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत गतिविधियों में सहयोग, सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार, बच्चों के (डीबीटी) फीडिंग और किताबों का वितरण, ग्रामीण विकास योजनाओं से संबंधित कार्य, आपदा प्रबंधन और राहत कार्य, गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों का सर्वेक्षण, बाल गणना और नामांकन अभियान, विद्यालय में सांस्कृतिक और खेलकूद आयोजनों का संचालन, ग्राम पंचायत बैठकों में विद्यालय प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित रहना, पर्यावरण संरक्षण अभियान जैसे वृक्षारोपण कार्यक्रम, स्कूल स्तर पर सरकारी योजनाओं की जानकारी देना, और विद्यालय स्तर पर सफाई अभियान का नेतृत्व ऐसे सैकड़ों गैर शैक्षणिक कार्य शामिल है और अन्य प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त हो जाते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि न केवल बच्चों का शिक्षण प्रभावित होता है, बल्कि शिक्षकों का तनाव भी बढ़ता है। 2021 में जारी एक रिपोर्ट में पाया गया कि इस प्रकार के हस्तक्षेप ने छात्रों की पढ़ाई के स्तर को गिरा दिया, क्योंकि शिक्षक अपनी प्राथमिक भूमिका निभाने में असमर्थ रहे।

लोग दूसरों के कार्यों में इसलिए हस्तक्षेप करते हैं क्योंकि वे अधिक शक्ति या पद की लालसा रखते हैं। यह प्रवृत्ति विभागीय संरचना को कमजोर करती है। कुछ व्यक्ति अपनी अयोग्यता छुपाने के लिए दूसरों के कार्यों में रुचि लेते हैं। इससे उनकी खुद की जिम्मेदारियां अधूरी रह जाती हैं। जब नेतृत्व स्पष्ट दिशा निर्देश देने में विफल रहता है, तो विभागीय कार्य अनियमित हो जाते हैं। यह नेतृत्वहीनता व्यक्तियों को अपनी सीमाओं से बाहर जाने के लिए प्रेरित करती है।

इस चुनौती का समाधान विभागीय कार्यप्रणाली में स्पष्टता और अनुशासन लाने में निहित है। हर कर्मचारी को उनके कार्यों की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों को प्रशासनिक कार्यों से मुक्त रखा जाना चाहिए। उच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों को नेतृत्व और प्रबंधन में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

जब लोग अपने दायित्व को छोड़कर दूसरों के कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं, तो इसका दुष्प्रभाव न केवल विभागीय कार्यप्रणाली पर पड़ता है, बल्कि पूरे संगठन के उद्देश्य भी बाधित होते हैं। इस समस्या का समाधान तभी संभव है, जब हम अनुशासन, जवाबदेही और कार्य विभाजन के सिद्धांतों को अपनाएं और विभागीय संरचना को सुदृढ़ बनाएं।

आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
लेखक SWA MUMBAI

ग़ज़ल एल्बम 53

अभिलाषा

मन में उठती नई तरंग, छूने को हर एक उमंग
हर सपना पूरा हो मेरा, हर क्षण गाए नई तरंग।

चाहूं मैं नभ को पा लेना, तारे चुनकर ला देना
हर गगन में नाम लिखूं, सूरज को भी झुका देना।

पर्वत से ऊंचा हौसला हो, सागर सा हो गहराई
मंज़िल की हर राह सजाऊं, बाधाएं सब रह जाएं पराई।

फूलों से भी कोमल बनूं, कांटों को भी राह दिखाऊं
हर दिल में आशा भर दूं, हर आंसू में हंसी लाऊं।

धरती पर हरियाली लाऊं, नभ में चांद नया चमकाऊं
अपनी अभिलाषा की डोरी से, पूरे जग को साथ बंधाऊं।
रचना 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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भेदभाव

जवाब किसी के साथ भेदभाव कर रहे होते हैं तब आप देश में भेदभाव को बढ़ावा दे रहे होते हैं आर्टिस्ट चंद्रपाल राजभर का एक चिंतन 

भेदभाव केवल एक सामाजिक समस्या नहीं है, यह एक गहरी मनोवैज्ञानिक समस्या भी है जो हमारी सोच, भावनाओं और व्यवहारों में निहित होती है। जब कोई व्यक्ति या समूह किसी अन्य व्यक्ति या समूह के साथ भेदभाव करता है, तो उसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण और प्रभाव होते हैं। चन्द्रपाल राजभर का यह चिंतन इस बात की गहरी समझ को दर्शाता है कि भेदभाव के व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों स्तरों पर गंभीर परिणाम होते हैं।

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से भेदभाव का मुख्य कारण स्टीरियोटाइपिंग और प्रीजुडिस (पूर्वाग्रह) है। स्टीरियोटाइप्स वे मानसिक छवियां हैं जो हम किसी विशेष समूह के बारे में बना लेते हैं, अक्सर बिना उनके वास्तविक अनुभव के। उदाहरण के लिए, जाति, धर्म, लिंग, या आर्थिक स्थिति के आधार पर लोगों को वर्गीकृत करना और उनके बारे में नकारात्मक धारणाएं बनाना भेदभाव का मूल कारण बनता है। ये पूर्वाग्रह अक्सर बचपन से सीखी गई सामाजिक मान्यताओं और अनुभवों का परिणाम होते हैं।

मनोविज्ञान यह भी बताता है कि भेदभाव एक इन-ग्रुप और आउट-ग्रुप मानसिकता से उपजता है। जब लोग खुद को किसी समूह का हिस्सा मानते हैं, तो वे अपने समूह को श्रेष्ठ और अन्य समूहों को हीन मानने की प्रवृत्ति रखते हैं। यह प्रवृत्ति "सामाजिक पहचान सिद्धांत" (Social Identity Theory) द्वारा समझाई जाती है, जिसमें लोग अपनी पहचान को मजबूत करने के लिए दूसरों को अलग और कमतर समझते हैं।

भेदभाव करने वाले लोग अक्सर कॉन्फर्मेशन बायस का शिकार होते हैं। वे केवल उन्हीं सूचनाओं को स्वीकार करते हैं जो उनके पूर्वाग्रहों को सही ठहराती हैं और उन तथ्यों को नजरअंदाज कर देते हैं जो उनके विचारों का खंडन करती हैं। इससे वे अपनी ही गलत धारणाओं को और मजबूत कर लेते हैं। इसके साथ ही, भेदभाव एक "सुरक्षा तंत्र" के रूप में भी काम करता है। जब लोग अपने अंदर की असुरक्षाओं, असफलताओं या आक्रोश को दूसरों पर प्रक्षेपित करते हैं, तो वे भेदभाव का सहारा लेते हैं ताकि खुद को बेहतर महसूस कर सकें।

भेदभाव का शिकार होने वाले व्यक्तियों पर इसके गहरे मनोवैज्ञानिक प्रभाव होते हैं। लंबे समय तक भेदभाव झेलने से हीनभावना, आत्मविश्वास में कमी, और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। पीड़ितों में चिंता और अवसाद की भावना गहराई तक बैठ सकती है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास को बाधित करती है। अध्ययनों ने यह भी दिखाया है कि भेदभाव झेलने वाले लोग अक्सर इंपोस्टर सिंड्रोम (Impostor Syndrome) से जूझते हैं, जिसमें वे अपनी उपलब्धियों को कमतर मानने लगते हैं और लगातार यह सोचते हैं कि वे किसी चीज के लायक नहीं हैं।

भेदभाव का समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह सामूहिक तनाव (collective stress) को बढ़ाता है और एक ऐसा वातावरण तैयार करता है जहां प्रतिस्पर्धा के बजाय शत्रुता हावी हो जाती है। इससे समाज की उत्पादकता और समृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

चन्द्रपाल राजभर का यह चिंतन हमें यह समझने के लिए प्रेरित करता है कि भेदभाव का समाधान केवल कानूनों या नीतियों से नहीं हो सकता; इसके लिए गहरी मानसिक और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता है। हमें उन मानसिक जड़ों को समझना और मिटाना होगा जो भेदभाव को जन्म देती हैं।

सकारात्मक दृष्टिकोण से, सहानुभूति और सह-अस्तित्व का अभ्यास भेदभाव को कम करने का एक प्रभावी तरीका है। मनोवैज्ञानिक शोध यह दर्शाते हैं कि जब लोग विभिन्न समूहों के साथ घुलते-मिलते हैं और उन्हें समझने का प्रयास करते हैं, तो उनके पूर्वाग्रह कम हो जाते हैं। इसे "कॉण्टैक्ट हाइपोथेसिस" (Contact Hypothesis) कहा जाता है, जो बताती है कि आपसी संपर्क और संवाद से भेदभाव घटता है।

अंत में यह चिंतन न केवल एक कलात्मक और सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मनोवैज्ञानिक गहराई से भी हमारी सोच को चुनौती देता है। यदि हम भेदभाव को समाप्त करना चाहते हैं, तो हमें मानसिकता को बदलने, पूर्वाग्रहों को तोड़ने, और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। यही एक सशक्त, समृद्ध और न्यायपूर्ण समाज की नींव है।

Tuesday, November 26, 2024

ग़ज़ल एल्बम 52

1- ग़ज़ल 
इश्क़ की राहों में कभी ख़ुद को खो दिया...

इश्क़ की राहों में कभी ख़ुद को खो दिया
तुझे पाने के चक्कर में सब कुछ छोड़ दिया।

मेरे दिल में बसी थी जो एक तसव्वुर की छाया
अब वो ख़्वाब भी जैसे किसी और का हो दिया।

माॅंगता था तेरे प्यार में बस तसल्ली
फ़िर भी दर्द में, ख़ुद को और ज़्यादा सज़ा दिया।

तू नहीं था पास, फिर भी हर क़दम तेरी तलाश थी
तेरे बिना ज़ीने का तरीक़ा ख़ुद को सीख लिया।

तू जो न था, वो दर्द अब मुस्कान में बदल गया
इस दिल को मैंने फ़िर से ख़ुद को से जोड़ दिया।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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2
ग़ज़ल 

तन्हाई में तेरी यादों का असर है...

तन्हाई में तेरी यादों का असर है
दिल में उभरते सवालों का सहर है।

तेरी हॅंसी का वो असर, वो तेरी बातें
अब सिर्फ़ दिल में उनका इश्क़ भरा डर है।

तू था पास तो हर दर्द हल्का लगता था
तेरे बिना तो जीने का कोई रास्ता भर है।

गुज़रे पल और खोई हुई मोहब्बत
अब हर पल में इक खालीपन का डर है।

यादें तो हैं, मगर तेरे बिना क्या हैं
हवाओं में तेरी ख़ुशबू का क़सूर है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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3
ग़ज़ल 
तू ज़हाॅं भी रहे, मेरी धड़कन में है...

तू ज़हाॅं भी रहे, मेरी धड़कन में है
तेरी यादों की एक गूॅंज अब तक में है।

मुझे तेरा इंतजार, कभी खत्म नहीं हुआ
दिल की गली में तेरा नाम अब तक में है।

ख़ुशबू तेरी हवाओं में बसी रहती है
तेरी आदतों का असर हर लम्हे में है।

कभी सोचा था कि तुझे छोड़ दूॅंगा
पर अब तो तुझसे जुड़े हर रंग में है।

तेरे बिना जीने की कोशिश की मैंने
पर मेरी तन्हाई में तेरा संग अब तक में है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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4
ग़ज़ल 

तुझे खोने का डर कभी जाने नहीं पाया...

तुझे खोने का डर कभी जाने नहीं पाया
तेरे बिना ज़ीने का तरीक़ा मैं न पा पाया।

हवाओं में तेरी ख़ुशबू, आँखों में तेरा नाम,
इन एहसासों से दिल ने कभी भी छुटकारा न पाया।

कभी सोचा था, खुद को तेरे बिना भी पा लूॅंगा
पर तेरी यादों ने हमेशा मुझे पकड़ लिया।

तू कहीं भी हो, तेरा असर अब तक रहता है
मेरे दिल में तेरा अपना एक ख़ास हिस्सा रहता है।

इश्क़ में वो शिद्दत, वो मासूमियत भी खो दी
फिर भी तेरे प्यार का असर कभी कम न पाया।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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5
ग़ज़ल 

मेरे दिल की धड़कनें तुझे ही पुकारती हैं...

मेरे दिल की धड़कनें तुझे ही पुकारती हैं
तेरी यादों में अब मेरी दुनिया समाती है।

तेरे बिना हर रंग बेरंग सा लगता है
तेरी सूरत में ही रौशनी पाई जाती है।

कभी सोचा था दूर जाकर जी लूॅंगा
पर तेरे बिना तो जीने की वज़ह ही जाती है।

मुझे तुझसे कोई शिक़ायत नहीं, मग़र 
तेरे बाद, सब कुछ अधूरा सा लगता है।

हर साॅंस में तेरा नाम लिखा है दिल ने
तू जो नहीं, फ़िर भी हर जगह दिखती है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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6
ग़ज़ल 

दिल में एक सवाल सा बाक़ी है...

दिल में एक सवाल सा बाक़ी है
क्या तू मेरे बिना कभी तन्हा था?

तेरी हॅंसी की गूॅंज अब भी कानों में है
क्या तेरे दिल में भी मेरा नाम था?

हमने चाहा था तुझसे सच्चा प्यार
क्या तुमने कभी इसे महसूस किया था?

मेरे ख़्वाबों में तेरा चेहरा अभी तक है
क्या तू भी रातों में मुझे याद करता था?

अब तो दिल में बस एक ख़ामोशी है
क्या कभी ये ख़ामोशी तुझे भी महसूस हुआ था?
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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7
ग़ज़ल 
तेरे बिना दुनियाॅं कुछ भी नहीं लगती...

तेरे बिना दुनियाॅं कुछ भी नहीं लगती
हर ख़ुशी जैसे अब खो सी जाती है।

तेरे जाने के बाद, खालीपन बढ़ गया
दिल की हर धड़कन जैसे थम सी जाती है।

मुझे यक़ीन था, तुम लौट आओगे
अब वो उम्मीद भी अक़्सर टूट जाती है।

आने वाले कल में क्या होगा, पता नहीं
मग़र तुझसे ये दूरी कुछ सुलझाई जाती है।

ख़ुद को भी अब तुझसे दूर कर लिया
पर तेरे बिना, हर राह अजनबी सी लगती है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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8
ग़ज़ल 
तू जो चला गया, तो हर पल रुक सा गया...

तू जो चला गया, तो हर पल रुक सा गया
तेरी यादों का साया हर जगह झुक सा गया।

मेरे दिल की ज़ुबाॅं अब तेरे बिना मौन है
तेरे बाद सब कुछ जैसे सुनसान सा गया।

तू था पास, तो ज़िंदगी का हर पल हसीन था
तेरे जाने के बाद, हर पल कुछ भी छुक सा गया।

इश्क़ में वो रंग, वो ख़्वाब सारे खो गए
तेरी बिनाई राहों में ॲंधेरा सा गया।

पर फिर भी, दिल की गहराई में तुझे महसूस किया
तेरे जाने के बाद भी, तेरा असर ताज़गी सा गया।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 


ग़ज़ल एल्बम 51

1--ग़ज़ल 
तेरी यादों का ये आलम तो है...

तेरी राहों से जुड़ा हर कदम... मेरे नाम तो है
दिल की चाहतों में बसा एक गम... अरमान तो है।

चाहे जो तू कहे, अपना मान ले या न ले
तेरे जिक्र में छुपा मेरा भी पैगाम तो है।

मेरे हिस्से में सुकून आए या न आए
तेरी खुशबू में सजा हर एक शाम तो है।

लोग कहते हैं तेरा जिक्र कर मैं रोता हूॅं 
पर मोहब्बत का यही अंजाम तो है।

देखकर मुझे हॅंसी आए तुझे या न आए
इस दिल को हर दर्द से आराम तो है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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2
ग़ज़ल 
तेरी यादों का ये आलम तो है...

तेरी राहों से जुड़ा हर क़दम... मेरे नाम तो है
दिल की चाहतों में बसा एक ग़म... अरमान तो है।

मेरा सब कुछ लुटा, फिर भी शिकवा नहीं,
तेरे प्यार में मिला हर सितम... इनाम तो है।

तू चाहे दूर रहे, फिर भी पास लगता है
इस दिल के हर कोने में तेरा पैग़ाम तो है।

हर दुआ में तेरा नाम निकल आता है
ये इश्क़ है या रूह का कोई इम्तिहान तो है।

लोग कहते हैं दीवाना हूॅं तेरा, मैं मानता हूॅं
मुहब्बत में खोने का अपना एक मुकाम तो है।

चाहे तू मुझे भूले या याद करे कभी
तेरी यादों का दिया हरदम मेरे साथ तो है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
----------------------+++++++
3
ग़ज़ल 
तेरी यादों का ये आलम तो है...

तेरी राहों से जुड़ा हर कदम... मेरे नाम तो है,
दिल की चाहतों में बसा एक गम... अरमान तो है।

तूने चाहा न कभी, फिर भी ख्वाब तेरा देखा,
मेरे दिल की किताब में तेरा मुकाम तो है।

हर आहट पे तुझे पाने की हसरत जागे,
ये मोहब्बत का जुनून और ये गुलाम तो है।

तेरा चेहरा न दिखे, फिर भी तसव्वुर में है,
इस दर्द में भी छुपा कोई सलाम तो है।

तू चाहे दिल से मेरे दूर कहीं हो जाए,
तेरे वादों की सदा में मेरा इंतकाम तो है।

इक तेरा नाम ही दवा सा लगता है,
वरना इस दिल-ए-बीमार का अंजाम तो है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
-----------------------------
4
ग़ज़ल 

तेरी यादें 

तेरी राहों से जुड़ा हर क़दम... मेरे नाम तो है
दिल की चाहतों में बसा एक गम... अरमान तो है।

मेरे अश्कों ने लिखी तुझसे वफ़ा की दास्ताॅं
हर ऑंसू में छुपा कोई इल्हाम तो है।

तूने चाहा मुझे या न चाहा, मुझे क्या परवाह,
मोहब्बत में हर हाल में अंजाम तो है।

तेरी बातें, तेरा लहज़ा आज भी याद है
ख़ामोशी में छुपा तेरा सलाम तो है।

दिल ने माना कि दूरी सही पर इकरार भी
तेरी यादों में हर रात का जाम तो है।

तू अगर पास नहीं, दर्द भी शिक़ायत नहीं
इस दिल को तसल्ली का ये आराम तो है।

हर दुआ में बस तेरा ही ज़िक्र होता रहा
मेरे इश्क़ में रूह का कोई पैग़ाम तो है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
---------------------------
5
गजल

ख़्वाब टूटे मगर रोशनी बाक़ी है...

ख़्वाब टूटे म़गर रोशनी बाकी है
इस मोहब्बत की इक बंदगी बाक़ी है।

तू जो बिछड़ा, तो दुनिया अधूरी लगी
दिल की मिट्टी में पर ताज़गी बाक़ी है।

जख़्म गहरे सही, दर्द सहता रहा,
इश्क़ में फ़िर भी इक सादगी बाक़ी है।

ख़ुद को खोया है मैंने तुझे पाने में
अब भी साॅंसों में वो ताज़गी बाक़ी है।

तेरे जाने से उजड़ा है जीवन मग़र 
आस के चाॅंद में थोड़ी लकीर बाक़ी है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
-------------------------++-
6
ग़ज़ल 

मैं चुप हूॅं, मग़र सवाल बाक़ी है...

मैं चुप हूॅं, मग़र सवाल बाक़ी है
तेरे वादों का क्या हाल बाक़ी है।

तू गया तो हर चीज़ वीरा़न हुई
पर खंडहरों में भी इक चाल बाक़ी है।

दिल ने चाहा तुझे पूरी वफ़ा के साथ
फ़िर भी क़िस्मत का जंजाल बाक़ी है।

तेरे जाने से सन्नाटा छा गया
पर हवा में तेरा ख़्याल बाक़ी है।

तू समझा नहीं मेरे दर्द की जुबां
मेरे अश्कों में इक हाल बाक़ी है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
-----------------------------
7
ग़ज़ल 

तेरे बिना मेरी तन्हाई का आलम है...

तेरे बिना मेरी तन्हाई का आलम है
हर एक लम्हा जैसे एक पैग़ाम है।

तू जो चला गया, तो क्या बचा यहाॅं
मेरे दिल में अब तक तेरा नाम है।

तेरे जाने की कोई सूरत नहीं थी
फिर भी इस दिल में तेरी राहों का काम है।

हर जगह तेरी यादों का साया है
मेरे ख़्वाबों में बस तेरा ही तमाम है।

ज़िंदगी की किताब अब अधूरी है
क्योंकि इसमें तेरा कोई चैप्टर नहीं है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
---------------------------
8
ग़ज़ल 

तेरे बिना सब कुछ अधूरा सा लगता है...

तेरे बिना सब कुछ अधूरा सा लगता है
हर एक लम्हा खो सा जाता है।

तेरी आवाज़, तेरी सूरत, हर एक बात
अब इनसे ही दिल जुड़ा सा जाता है।

इश्क़ के सफ़र में ख़ामोशी की राहें
तेरी यादों का आसरा बन जाता है।

तेरे जाने से घुटन सी बढ़ गई है
हर पल अब इक सवाल सा बन जाता है।

तू नहीं तो कुछ भी नहीं है यहाॅं
इस दिल की रूह अब तुझमें खो जाती है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 


Sunday, November 24, 2024

ग़ज़ल एल्बम 50

अभिलाषा नहीं मेरी कि मैं किसी को दोषी ठहराऊॅं
ख़ुद के गमों को ही अब मुस्कानों में छुपाऊॅं।

चुभती हैं दिल पे जो, वो बातों की सुइयाॅं
उनकी टीस को भी मैं फूलों-सा महकाऊॅं।

हर एक ग़लतफ़हमी को नज़रअंदाज़ करता रहा
हर जलती चिंगारी को पानी-सा बुझाऊॅं।

मंज़िल पे पहुँचने का नहीं कोई ज़ुनून 
सफर की ख़ामोशियों में गीत-सा गुनगुनाऊॅं।

किसी की मोहब्बत का न कोई सवाल है
दिल को उजालों से हर शाम सजाऊॅं।

दुनिया के रंगों में न खोई मेरी सोच,
अपनी धुन में अपना ही आलम बनाऊॅं।

अभिलाषा नहीं मेरी कि मैं किसी को दोषी ठहराऊॅं
हर एक दर्द को मैं सुकून-सा बना पाऊॅं।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
--------------------
अभिलाषा नहीं मेरी कि मैं किसी को दोषी ठहराऊॅं
ख़ुद ही अपने ज़ख़्मों पर, चुपचाप मरहम लगाऊॅं।

जो दिया है वक्त ने, उसे मुक़द्दर मान लिया
ख़्वाब टूटें भी अगर, मैं नया ख़्वाब सजाऊॅं।

क्यों शिकायतें करूॅं, ये दुनिया के रिवाज हैं
हर इल्ज़ाम को मैं मुस्कान में दबाऊॅं।

मेरी वफ़ा को ठुकराया तो कोई ग़म नहीं,
उनकी यादों को भी अब दुआओं में बुलाऊॅं।

हर मोड़ पर मिले अगर कोई नये सवाल
अपने हौसले से हर ज़वाब को मैं पाऊॅं।

अश्क बहते हैं तो क्या, ये मोती हैं मेरे
अपने दर्द को मैं जश्न-सा क्यों दिखाऊॅं।

अभिलाषा नहीं मेरी कि मैं किसी को दोषी ठहराऊॅं
बस अपनी रूह को सच्चाई से और सजाऊॅं।

Saturday, November 23, 2024

ग़ज़ल एल्बम 49 मोटिवेशनल

1
ग़ज़ल 
उठो
उठो, हर दर्द को अब मुस्कुराहट बना लो
ज़िंदगी की राहों को फिर से जन्नत बना लो।

वो मंज़िलें भी तुम्हारी होंगी, जो दूर नज़र आईं
इन्हीं काॅंटों को फूलों की तरह अपनी सौगात बना लो।

हवा के रुख़ को अब अपने हिसाब से मोड़ो दो
ऑंधियों में भी अपनी मंज़िल की पहचान बना लो।

अगर दिल में है हौसला, तो रुकने का क्या मतलब?
हर क़दम को अब अपनी ताज़गी की शान बना लो।

जो मुश्किलें हों, उन्हें अब अपने रास्ते का हिस्सा बना लो
तुम किसी वीर से काम नहीं हो इन्हें अपना ज़ुनून बना लो

चलते रहो, रुकना नहीं है तुमको किसी के कहने पर
अपनी ताक़त को हर मुश्किल में अपनी पहचान बना लो।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
------------------------------
2
ग़ज़ल 
इरादा पक्का कर
तू अपना इरादा पक्का कर, फिर देख सब बदल जाएगा
सपनों का हर सफ़र, तेरे कदमों से सज जाएगा।

हवाओं से टकरा, तू अपनी राह बनाना सीख
जो तू चाहेगा, वह सब कुछ तुझे मिल जाएगा।

ॲंधेरों में भी तेरे हौसले की रोशनी चमकेगी
जो सपने तेरे हैं वो सच्चाई में बदल जाएगा

गिर कर फिर उठ, तू यकीन कर अपनी ताकत पर
जो खुद पर विश्वास रखेगा, वही खुद को बदल पाएगा

कभी नहीं रुकना, आगे बढ़ते जाना है
क्योंकि हार से भी तू, एक नई शुरुआत बनाएगा।

जो तूने ठाना है, वह तू पाकर ही रहेगा
तू वही है जो अपने भाग्य को खुद से सजा पाएगा।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
-------------------------
3
ग़ज़ल 
राहों में कांटे हों, तो उन्हें ही अपना साथी बना
हौंसले से हर मुश्किल को, अब अपनी सौगात बना।

ग़म की रातें सवेरा बन जाएं, अगर तू खुद को मान ले
अपने सपनों की राह में तू खुद को एक सितारा बना।

मुसीबतें तेरी ताकत का इम्तिहान हैं, जान ले
जब तू ठान ले, तो हर रुकावट को ख़ुदा बना।

जो भी खोया है तुझसे, वो बस एक सीख थी
अब फिर से उठ, उसे अपनी जीत बना।

हर कदम पे विश्वास रख, खुद पे ऐतबार कर
जो तू करेगा, वही तू अपनी सच्चाई बना।

कभी न रुक, चल आगे और खुद को आज़माते जा
तू ही है वो जो अपनी किस्मत को अपनी तरह से सजा
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
--------------------------
ग़ज़ल 
4
राहों में छुपे हैं सोने के खजाने, बस तलाश शुरू कर
मुसीबतों को अपनी ताकत बना, फिर नई उड़ान शुरू कर।

फिज़ाओं को भी अपनी दिशा दिखा, तू उड़ा कर ले जाएगा
हर कदम तेरी मेहनत का फल, एक दिन मुकाम पे ले जाएगा।

जो कभी ना हो पाया वो अब होगा तुझसे, बस ऐतबार रख
जितना भी तूने खोया है, उसे एक ताकत बना कर बढ़।

अंधेरों से ना डर, तेरी रोशनी खुद ही चमकेगी
दुनिया तेरी है, बस तू अपनी राहें खुद ही बना लेगा।

हर तूफान से तुझे कुछ न कुछ सीखने को मिलेगा
तू जो ठान ले, वही हर मुश्किल से ऊपर निकलेगा ।

कभी भी हार ना मान, तू खुद अपनी कहानी लिख
तेरे कदमों की आवाज़ से ही, तेरा रास्ता बनेगा।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
----------------
5
ग़ज़ल 
ख़ुद पर यकीन रख, तू जो चाहेगा, वो पाएगा
हर मुश्किल को अपनी ताक़त बना, आगे बढ़ेगा।

जो तूने देखा है ख़्वाबों में, वो हकीकत बनेगा
हर दर्द और ग़म से बड़ा, तेरा हौंसला चमकेगा।

हर गिरावट से फिर तू ख़ुद को उठाएगा
तू ही वो सितारा है, जो रात को रोशन करेगा।

मंजिलें दूर नहीं, बस तेरी मेहनत का सवाल है
हिम्मत कर ज़रा तू तेरी हर सफ़लता कमाल है

रास्ते ख़ुद ब ख़ुद तेरे लिए खुलने लगेंगे
जो तू ठानेगा, वही तेरे कदमों से बदलने लगेंगे।

चमकते रहेंगे तेरे सपने, बस न तू रुक, न थम
तेरे हौसले की रौशनी में, तेरा रास्ता ख़ुद बनेगा।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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6
ग़ज़ल 
तूफ़ानों से कह दो, इम्तिहान  ना ले मेरा
मैं हर कदम पे जीतूॅंगा, ये ऐलान है मेरा।

गिरने से डरूँ कैसे, मैं खुद ही संभल गया
राहें भी मेरे हौसले का बयान करें यहाॅं ।

ॲंधेरों में चमका हूँ, सूरज की तरह
अब रोशनी से पूछूॅं, ये जान ले जरा 

मुश्किल मेरी दुश्मन नहीं, साथी है मेरी
हर दर्द से मैंने पाया, एक अरमान है मेरा।

हौसला मेरी क़िस्मत का दरवाज़ा है
जो चाहूँगा, उसे बना दूॅं आसमान है मेरा।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
---------------------------
7
ग़ज़ल 
हवा के साथ नहीं, तू हवा के खिलाफ चल
जो तुझमें है जुनून, वही बनेगा तेरा बल।

हर ठोकर तुझे सिखाएगी, गिर कर संभलना
सफ़र को पूरा करने का यही है असल पल।

जो जलता है तुझमें, वो शमा बुझने न देना
ॲंधेरों में यही रोशनी करेगी तेरा हल।

जो हालात रुकावट बनें, उन्हें अपना बना
हर मुश्किल के आगे झुकेगा उसका अचल।

चमकने का हक उसे है, जो तपकर निखरे
तू भी अपनी तपिश से चमका ये आतिश-जल।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
--------------------
8
ग़ज़ल 
ज़माने से न डर, तू अपना इरादा बना
जो चाहेगा जहाँ में, वो तेरा रास्ता बना।

ख़ुदा भी मदद करता है, हिम्मतवालों की
तू अपने हौसले को, अब दुआ बना।

गिरने से जो डरे, वो मंज़िल तक क्या पहुंचे
गिरकर उठेगा जो, वही अपना ख़ुदा बना।

हर एक आँधियों में, है तेरे हौसले की जीत
तू तूफ़ानों का अब, एक नया सिलसिला बना।

ख़ुद को पहचान, हर दर्द से ऊपर है तू
अपने ख्वाबों को हर हाल में सच बना।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 

Friday, November 22, 2024

ग़ज़ल एल्बम 48






1
ग़ज़ल 
उसकी शादी हो रही थी

उसकी शादी हो रही थी, जैसे मेरे शरीर से कोई प्राण ले जा रहा है
दिल के हर कोने में एक दर्द सा समा रहा है।

वो जो कभी मेरे पास था, आज किसी और के पास हो गया
मेरी तन्हाई में जैसे कोई साया बहक रहा है।

आँखों में आँसू थे, फिर भी उसे देख रहा था
जैसे कोई सपना टूटकर मेरी हकीक़त बन रहा है।

खुशियाँ उसकी होंगी, म़गर मेरा दर्द बढ़ रहा है
वो जो मुझे अपना कहता था, अब दूर जा रहा है।

उसकी शादी हो रही थी, और मैं खड़ा था बस चुप
जैसे मेरी दुनियाॅं को किसी ने तबाह कर दिया है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
----------------------------------
2
ग़ज़ल 
उसकी शादी हो रही थी

उसकी शादी हो रही थी, मैं देख रहा था चुप खड़ा
दिल के अंदर बवंडर था, मगर लबों से कुछ न कहा।

वो मंडप में मुस्कुराता, जैसे सब कुछ पा लिया
और मैं तन्हाई में खोकर ख़ुद को मिटा रहा था।

हर फेरे के साथ ऐसा लगा, जैसे साॅंसें घट रही
वो मेरा सब कुछ था, अब किसी और का हो रहा।

उसकी ऑंखों में जो चमक थी, मेरा ख़्वाब तोड़ गई
मेरी मोहब्बत की दास्ताॅं को अधूरी छोड़ गई।

उसकी शादी हो रही थी, और मैं पत्थर सा बन गया
जैसे मेरे वजूद से कोई मेरी रूह  छीन गय।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
--------------------
3
ग़ज़ल 

उसकी शादी हो रही थी

उसकी शादी हो रही थी, वो सज़ा हुआ था आज
जैसे मेरे अरमानों का ख़ुदा ले रहा हो इम्तिहान।

हर मुस्कान में उसकी, मेरा दर्द छुपा हुआ था
दिल की गहराइयों में खंजर सा चुभा हुआ था।

मंडप के हर फेरे पर साॅंस मेरी टूटती गई
उसके वादों की गर्माहट अब राख बनती गई।

चूड़ियों की खनक में सुनाई दिए अफ़साने
जिनमें मेरा नाम कहीं गुम हो गया जाने।

उसकी शादी हो रही थी, और खड़ा रहा जहाॅं
जैसे मेरी रूह का हर टुकड़ा बिखर गया वहाॅं।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
-------------------------------
4
ग़ज़ल 
मैं टूट रहा था 
उसकी शादी हो रही थी, मेरी साॅंसे टूट रही थी
दिल से जुड़ी हर बात टूटकर बिखरकर रही थी।

महफ़िल सजी थी खु़शियों की, पर दिल वीरान था
जैसे कोई मेरे जिगर से,मेरी जान छीन रही थी

सजे हुए जोड़े में वो खड़ी थी मुस्कान लिए
और मैं टूटे अरमानों के साथ चुपचाप खड़ा था।

हर फेरा उसकी ज़िंदगी को खुशियों से भर रहा था
पर मेरे दिल में दर्द का समंदर बहुत गहरा हो रहा था।

उसकी शादी हो रही थी, और मेरा दिल रो रहा था
जैसे मेरे शरीर से कोई मेरा ज़िगर चुरा रहा था 
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
---------------------------------
5
ग़ज़ल 
उसकी शादी 

वो मेरे ख़्वाबों का गुलशन सजाए बैठा था
और मैं उजड़ी बहारों का क़िस्सा सुनाए बैठा था।

हर क़सम हर वादा अब फ़िज़ूल सा लग रहा था
जो कभी अपना था, अब वो अज़नबी बन रहा था ।

वो हॅंसी जो मेरे लिए कभी महकती थी
अब किसी और की दहलीज़ पर सज रही थी।

दिल कह रहा था रोक लूॅं उसे इक पल के लिए 
मग़र जुबाॅं ख़ामोश थी, और दिल बहुत रो रहा था।

उसकी शादी हो रही थी, मेरी दुनियॅं खो रही थी
जैसे मुझसे कोई मेरी ज़िंदगी चुरा रही थी ।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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6
ग़ज़ल 
वो खड़ी थी
वो सज-धज खड़ी थी किसी और के नाम पर
और मैं टूट रहा था उनके हर इक अंजाम पर।

जो रिश्ते की डोर कभी दिलों को बाॅंधती थी
आज वही डोर किसी और से जुड़ रही थी।

हर मुस्कान उसकी, मेरे दर्द को बढ़ा रही थी
वो खुशी के पल, मेरी रूह को जला रही थी।

मैंने जो सपने देखे थे उसके संग कभी
 अब वो किसी और की ऑंखों में बस रही थी ।

उसकी शादी हो रही थी, मैं हक्का बक्का था
जैसे कोई तुफान मेरी जिंद़गी छीन रही थी
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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7
ग़ज़ल 
शादी
सज रहे थे फूल वहाॅं, और मैं बिखर रहा था
वो जिसे दिल दिया, आज वो दूर हो रहा था।

मंडप में हर रस्म उसकी हॅंसी में डूबी थी
और मेरी तन्हाई में बस ख़ामोशी बसी थी।

ऑंखों में था वो मंजर, जो कभी मेरा था
आज उसकी क़िस्मत का हर लम्हा सुनहरा था।

दुआओं के साथ मैंने उसे विदा किया
दिल से म़गर हर ज़ख्म फिर से ज़िंदा किया।

उसकी शादी हो रही थी, और मैं देख रहा था
जैसे अपनी रूह को धीरे-धीरे छोड़ रहा था।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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8
ग़ज़ल 
उसकी शादी 
चमकते सितारे मंडप में जगमगा रहे थे
और मेरे सपने चुपचाप बुझते जा रहे थे।

जो कभी मेरी हर दुआ का सबब था
आज किसी और के साथ खड़ा बेख़बर था।

मेरे ख़यालों की किताब का हर पन्ना जल गया
उसके वादों का हर लफ्ज़ मुझको छल गया।

हर फेरे के साथ मेरी साॅंसें सिमट रहीं थीं
दिल की आवाज़ें मेरी रगों में थम रहीं थीं।

उसकी शादी हो रही थी, और मैं खड़ा बेकरार था 
जैसे कोई सदा के लिए मुझसे मेरा दिल हड़प रहा था




Thursday, November 21, 2024

ग़ज़ल एल्बम 47

1
गज़ल 
आज की रात फिर उसकी याद आई है

आज की रात फिर उसकी याद आई है
दिल के ज़ख्मों पर फिर चोट खाई है।

चाॅंद खिड़की से झाॅंकता है यूॅं
जैसे उसने कोई बात छुपाई है।

हवा की सरसराहट भी कुछ कह रही
उसकी ख़ुशबू कहीं से लौट आई है।

जिन लम्हों को भुला दिया था कभी
वो ही क़िस्से फिज़ाओं ने दोहराई है।

सन्नाटे में उसके क़दमों की आहट
दिल को हर बार क्यों भरमाई है।

आज की रात फिर उसकी याद आई है
दिल के वीराने में बस आग लगाई
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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2
ग़ज़ल 
आज की रात 

आज की रात फिर उसकी याद आई है
लगभग है अधूरी दुआ जैसे लौट आई है।

चाॅंदनी छू रही है बेज़ान खिड़कियाॅं
जिनमें उसकी हॅंसी गूॅंज कर समाई है।

हर सितारा है गवाह मेरे ग़म का
फिर ये तन्हा हवा क्यों सुलगाई है।

वो जो वादा था मिलने का कभी
उसकी परछाई आज भी भरमाई है।

ऑंसुओं के समंदर में डूबा दिल है
वो मोहब्बत मेरी फिर रुलाने आई है।

आज की रात फिर उसकी याद आई है
साथ जीने की कसमें फिर क्यों सताई है।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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3
ग़ज़ल 
चाहत का टूटता आईना

चाहत का टूटता आईना दिखा गया
जो ख्वाब सजा थे, वो धुॅंआ हो गया।

हाथों में थी जो तस्वीर उसकी कभी
अब बिखरे शीशों में दर्द बढ़ा गया।

हर टुकड़े में है उसकी झलक आज भी
पर छूने की कोशिश में ज़ख्म दे गया।

जो वादे थे उसके, अधूरे रह गए
सच का नकाब ओढ़, झूॅंठ सजा गया।

दिल के कोने में गूॅंजे हैं सन्नाटे
वो अपने निशानों को भी मिटा गया।

चाहत का टूटता आईना चुभ रहा
यादों के काॅंटे हर लम्हा खा गया।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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4
ग़ज़ल 
चाहत का टूटता आईना

चाहत का टूटता आईना अब धुॅंधला गया,
जो दिल में था उजाला, वो ॲंधेरा हो गया।

रिश्तों के काॅंच पर उॅंगलियाॅं खून से लिखी,
हर ख्वाब अब खंडहर सा बना गया।

तेरे वादों के जो थे सितारे आसमां में,
वो अब टूटकर गिर गए और खो गया।

इश्क की राह में जो था फूलों का गहना,
अब काॅंटे वही घावों में गहरे हो गए।

आईने की तरह दिल में जो सूरत थी कभी,
वो अब टूटकर सिर्फ़ एक याद हो गया।

चाहत का टूटता आईना दिल में रहा,
और तुझसे जुड़ा हर रिश्ता चुराया गया।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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5
ग़ज़ल 
चाहत का टूटता आईना

चाहत का टूटता आईना अब क्या कहे
जो ख़्वाब हमने देखे, वो बिखर गए।

वो शोर-शराबा जो दिल में गूॅंजता था
अब सन्नाटे में खो गया और डर गया।

दिल के हर कोने में जो नाम तेरा था
वो अब वीरानियों में खोकर चुप हो गया।

सफ़र जो हमने साथ तय किया था कभी
अब रास्तों में दर्द ही दर्द छोड़ गया।

तेरी यादें मेरी धड़कन में बसीं थीं
अब वही यादें भी अजनबी सी हो गईं।

चाहत का टूटता आईना सिर्फ़ दर्द दे गया
जो प्यार था कभी, वो अब बस सवाल हो गया।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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6
ग़ज़ल 
 टूटता आईना

चाहत का टूटता आईना फिर से दिखा
जो प्यार था कभी, वो अब अज़नबी सा हुआ।

दिल की गहराइयों में जो तू था बसा
वो अब ख़ामोशियों में खो सा गया।

तेरी हर बात में जो ख़्वाबों की मिठास थी
अब वो सिर्फ़ यादों की कसक बना गया।

राहों में जो तेरे कदमों का असर था
अब वो दरारों में कहीं खो गया।

जो हाथ कभी तुझे थामने के लिए बढ़ा
अब वहीं हाथ अपने ही ज़ख्मों से ढ़क गया।

चाहत का टूटता आईना दिल में बस गया
जहाॅं कभी खुशी थी, अब ग़म का घर बन गया।
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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7
ग़ज़ल 
तेरे झूॅंठ का सच

तेरे झूॅंठ का सच अब सामने आया है
दिल में एक और ग़म का तूफ़ान आया है।

जो वादा था तेरा सच्चाई का
वो सिर्फ़ एक छलावा बनकर आया है।

तेरी हँसी के पीछे जो ग़म छिपा था
वो अब आँखों में अश्कों का समंदर आया है।

तू जो कहता था प्यार में बसा है सच
अब वो तेरे अल्फ़ाज़ों का झूॅंठा फ़साना आया है।

दिल को दिलासा देने वाले वो पल
अब महज़ एक ख़्वाब सा टूटकर आया है।

तेरे झूॅंठ का सच अब मेरे सामने है
जो प्यार का था रंग, वो अब बदल आया है 
ग़ज़ल 
आर्टिस्ट चन्द्रपाल राजभर 
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8
ग़ज़ल 
तेरे झूॅंठ का सच
तेरे झूॅंठ का सच अब खुलकर आया है
जो कभी दिल में था, वो अब सामने आया है।

तू कहता था दिल से दिल की बात होती है
अब तेरे अल्फ़ाज़ों का रंग बदलकर आया है।

वो जो वादा था कभी, वो अब एक कहानी है
तेरी सच्चाई अब मुझे धोखा सा दिखाई है।

जो रंग तेरी आँखों में था, वो फीका हो गया
तेरी मोहब्बत का सच अब रेत सा बहा है।

तेरे झूॅंठ  का सच दिल में गहरे गड़ गया
अब ख़ामोशी में, वो जख़्म हर रोज़ सजा है।

तेरी यादों का सिलसिला अब टूट गया
तेरे झूॅंठ का सच दिल में एक सवाल बना है